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US-Iran Talks: वार्ता विफल होने पर हताश मुनीर लगा रहे दौड़, ईरान ने PAK से बनाई दूरी; भूमिका पर उठ रहे सवाल

Mon, 27 Apr 2026 08:48 PM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एथेंस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एथेंस Published by: Pavan Updated Mon, 27 Apr 2026 08:48 PM IST
सार

अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए कभी शेखी बघारने वाला पाकिस्तान अब ओमान से मदद की गुहार लगा रहा है। बड़े-बड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचाने वाले आसिम मुनीर हताश-निराश हो कर दौड़ लगा रहे हैं। दरअसल, अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के साथ ही अब पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहा है। पढ़ें ईरान ने पाकिस्तान से दूरी क्यों बना ली है...

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Munir gets desperate as Pakistan's relevance fades after failed US-Iran talks: Report
अमेरिका-ईरान वार्ता फेल होने बढ़ी मुनीर की हताशा - फोटो : IANS

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में रुकावट के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में होने वाली दूसरी दौर की बातचीत शुरू ही नहीं हो पाई, जिससे इस्लामाबाद में निराशा और बेचैनी बढ़ गई है। पिछले कई दिनों से राजधानी में कड़े सुरक्षा इंतजाम और लगभग लॉकडाउन जैसी स्थिति बनी रही, जिससे आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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अराघची के लौटने से बढ़ी मुनीर की हताशा
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अचानक इस्लामाबाद से लौट गए, जिसके बाद बातचीत पूरी तरह ठप हो गई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा भी रद्द कर दिया। इसे दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया पर बड़ा झटका माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आसिम मुनीर 25 अप्रैल को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंचे, जहां उन्होंने बातचीत को फिर से शुरू कराने के लिए ओमान की मदद लेने की कोशिश की। इसे पाकिस्तान की घटती हुई अहमियत को बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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ईरान को पाकिस्तान पर क्यों नहीं रहा भरोसा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान को शक है कि पाकिस्तान बातचीत की गोपनीय जानकारी अमेरिका को साझा कर रहा था। यही वजह है कि तेहरान अब पाकिस्तान को एक निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं मान रहा है। ईरान का मानना है कि पाकिस्तान की मेजबानी में हो रही ये बातचीत एक तरह की रणनीतिक चाल हो सकती है, जिससे अमेरिका को समय मिल सके और वह अपने सैन्य संसाधनों को फिर से मजबूत कर सके। ऐसे में ईरान अब ओमान को ज्यादा भरोसेमंद मध्यस्थ मान रहा है, क्योंकि ओमान पहले भी कई बार सफलतापूर्वक मध्यस्थता कर चुका है।

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कूटनीतिक मंच पर फिर पिटा पाकिस्तान
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है। बातचीत का टूटना और ईरान का अविश्वास, दोनों मिलकर पाकिस्तान की भूमिका को सीमित कर रहे हैं, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहमियत कम होती नजर आ रही है।

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