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चीन के खिलाफ लामबंदी, बाइडन करेंगे क्वैड नेताओं के साथ शिखर वार्ता? अमेरिका की 'एशिया की धुरी’ नीति का हिस्सा

Fri, 05 Mar 2021 03:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Mar 2021 03:43 PM IST
सार

ट्रंप के व्हाइट हाउस से विदा होने के बाद क्वैड के भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलती रही हैं। जानकारों का कहना है कि अब अगर प्रस्तावित शिखर वार्ता होती है, तो उससे इस बारे में जताई गई आशंकाओं को विराम मिल जाएगा...

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Mobilizing against China expansion policy, Joe Biden will do summit with Quad countries
Quad nations - फोटो : social media

विस्तार

अब ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने लंबे चले विचार-विमर्श के बाद अपनी चीन नीति को अंतिम रूप दे दिया है। ताजा संकेत यह है कि उनकी इस नीति में क्वैड यानी अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के चौगुट की अहम भूमिका होगी। अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने व्हाइट हाउस के जानकार सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि राष्ट्रपति बाइडन अगले महीने क्वैड नेताओं के साथ शिखर वार्ता करेंगे। इससे संकेत मिला है कि बाइडन की नीति में चीन की ताकत और उसके बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करना एक अहम बिंदु होगा। हालांकि वेबसाइट एक्सियोस ने कहा है कि अभी व्हाइट हाउस ने प्रस्तावित क्वैड शिखर वार्ता की पुष्टि नहीं की है।

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वेबसाइट एक्सियोस ने कहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना बाइडन की ‘एशिया की धुरी’ नीति में प्रमुख उद्देश्य के रूप में उभरा है। राष्ट्रपति के शिखर बैठक करने के इरादे से यह संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि बाइडन प्रशासन उन देशों से संबंधों और उन गठबंधनों को उच्च प्राथमिकता देगा, जो चीन का प्रभाव रोकने में सहायक हो सकते हैँ।
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बाइडन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदा सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ अलग-अलग फोन पर बातचीत कर चुके हैं। वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक अब उनके साथ समूह में बात करने का मकसद क्वैड को ताकत देना है। कई अमेरिकी रणनीतिकारों ने कहा है कि क्वैड एशिया के नाटो के रूप में उभर सकता है।
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इसके पहले अमेरिका के विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकेन क्वैड विदेश मंत्रियों के साथ सामूहिक वार्ता कर चुके हैं। उस बातचीत में चारों देशों ने बिना नाम लिए चीन की आलोचना की थी। वार्ता के बाद जारी बयान में संकल्प जताया गया था कि ये चारों देश पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में एकतरफा ढंग से और ताकत के इस्तेमाल से यथास्थिति को बदलने की किसी कोशिश का मजबूती से विरोध करेंगे।

क्वैड की स्थापना 2007 में की गई थी। तब इसका मकसद इस क्षेत्र के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच सुरक्षा वार्ता का मंच बनाना बताया गया था। लेकिन तब ये प्रयास ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और भारत ने इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इस कोशिश में नई जान आई। ट्रंप के कार्यकाल में चारों देशों ने सुरक्षा के मामले में अपने रुख को समन्वित करने में ज्यादा दिलचस्पी ली। ये चारों देश चीन के उत्थान से चिंतित रहे हैं।

ट्रंप के व्हाइट हाउस से विदा होने के बाद क्वैड के भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलती रही हैं। जानकारों का कहना है कि अब अगर प्रस्तावित शिखर वार्ता होती है, तो उससे इस बारे में जताई गई आशंकाओं को विराम मिल जाएगा।


गौरतलब है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका ने ‘एशिया की धुरी’ नीति अपनाई थी। तब कहा गया था कि अमेरिका भविष्य में एशिया में अपने गठबंधनों को यूरोपीय गठबंधनों जितना महत्व देगा। उसी दौर में मुक्त व्यापार समझौते के रूप में ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) को आगे बढ़ाया गया। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने टीपीपी को रद्द कर दिया, जिससे ‘एशिया की धुरी’ योजना खटाई में पड़ गई। अब ऐसा लगता है कि बाइडन नए हालत और नई सूरत में फिर से उस नीति को आग बढ़ा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इसका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूरगामी असर होगा।   

 

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