म्यांमार : सैन्य तख्तापलट पर बाइडन बोले, प्रतिबंध लगाएंगे

एजेंसी, वाशिंगटन/नेपीता Published by: देव कश्यप Updated Wed, 03 Feb 2021 03:21 AM IST
आंग सान सू की
आंग सान सू की - फोटो : File Photo
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भारत के पड़ोसी म्यांमार में सोमवार को सेना द्वारा तख्तापलट के बाद सत्ता कमांडर-इन-चीफ मिन आंग ह्लाइंग के हाथों में आ गई है। इस पर अमेरिका ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस तख्तापलट को लोकतंत्र की ओर बढ़ते कदम पर सीधा हमला करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि शीर्ष नेताओं को जल्द रिहा नहीं किया गया तो देश पर कड़े प्रतिबंधों पर विचार करेंगे।
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म्यांमार सेना द्वारा अपने स्वामित्व वाले ‘मयावाडी टीवी’ पर देश का नियंत्रण लेने व एक साल तक आपातकाल की घोषणा करने के दूसरे दिन देश की सड़कों पर कर्फ्यू के कारण सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि देश की नेता आंग सान सू की समेत शीर्ष प्राधिकारियों की गिरफ्तारी के खिलाफ देश में छुटपुट विरोध प्रदर्शन हुए हैं। जबकि इस सैन्य कार्रवाई पर बाइडन ने कहा कि ‘म्यांमार की सेना द्वारा तख्तापलट, शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारियां और राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा देश में सत्ता के लोकतांत्रिक हस्तांतरण पर सीधा हमला है।’ राष्ट्रपति ने वैश्विक समुदाय से एक सुर में म्यांमार सेना पर दबाव डालने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सेना को जनता की इच्छा को दरकिनार नहीं करना चाहिए। करीब एक दशक से देश के लोग लोकतांत्रिक सरकार और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण पर लगातार काम कर रहे हैं। इसका सम्मान होना चाहिए।


सू की का पता नहीं चला, सुरक्षा परिषद चिंतित
अमेरिकी चेतावनी के अलावा पूरी दुनिया ने म्यांमार में तख्तापलट के 24 घंटे बाद भी नोबेल शांत विजेता आंग सान सू की के बारे में कुछ भी पता नहीं चलने को लेकर चिंता जताई। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने भी म्यांमार सेना पर चौतरफा दबाव बनाने को कहा है। यूएनएससी ने इस मुद्दे पर आपात बैठक बुला ली है जिसमें सैन्य तख्तापलट के बाद पैदा हुए हालात पर चर्चा होनी है। परिषद की अध्यक्ष और ब्रिटेन की दूत बारबरा वुडवर्ड ने कहा, परिषद उपायों पर ध्यान देगी, देश के नेताओं की रिहाई के विचार पर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि इस समय कोई विशेष उपायों पर चर्चा नहीं की जा रही है।

सरकारी घरों में बंद रहे सांसद
म्यांमार में सैन्य तख्तापलट और शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के एक दिन बाद संसद के कई सदस्य मंगलवार को राजधानी स्थित अपने सरकारी घरों के अंदर ही बंद रहे। एक सांसद ने बताया कि वह और करीब 400 अन्य सांसद परिसर के अंदर ही एक दूसरे से बात कर पा रहे हैं और फोन के जरिये अपने निर्वाचन क्षेत्रों के संपर्क में भी हैं लेकिन उन्हें नेपीता में आवासीय परिसर छोड़ने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस परिसर के अंदर थी और सैनिक बाहर। सुरक्षा चिंताओं के कारण नाम न जाहिर करने की इच्छा जताते हुए सांसद ने कहा, हमें जागते हुए सतर्क रहना है।

चीन में बेचैनी, ठंडी प्रतिक्रिया दी
म्यांमार में तख्तापलट को लेकर चीन ने सिर्फ हालात की सूचना जुटाने और संविधान तथा कानूनी ढांचे के तहत अपने मतभेद दूर करने की ठंडी प्रतिक्रिया दी है। यह उसकी इस देश में अरबों डॉलर के निवेश को लेकर बेचैनी के कारण हुआ। दोनों देशों के मामलों के विशेषज्ञ यून सुन ने कहा कि इस तख्तापलट से चीन को न सिर्फ अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है बल्कि उसके राष्ट्रीय हितों को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि चीन सू की का समर्थन करता रहा है। बता दें कि चीन ने यहां खनन, आधारभूत संरचना और गैस पाइप लाइन परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश किया है जिस पर अब अनिश्चितता मंडरा रही है। 

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