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US-India Ties: ट्रंप के बदले तेवर को विशेषज्ञ ने यू-टर्न बताया; कुगेलमैन बोले- भारत-चीन पर बयान में दिखी हताशा

Sat, 06 Sep 2025 02:44 AM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 06 Sep 2025 02:44 AM IST
सार

चीन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिप्पणी की थी कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। ट्रंप की इस टिप्पणी पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन ने कहा कि यू-टर्न लेना ट्रंप की आदत है। ट्रंप की टिप्पणी भारत द्वारा व्यापार वार्ता में सभी रियायतें देने से इनकार करने और भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय ट्रंप को न लेने देने से उनकी हताशा को दर्शाती है। 
 

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Michael Kugelman says Trump changed attitude U-turn frustration visible in his statement on India-China
माइकल कुगेलमैन, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने 'भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है।' ट्रंप की इस टिप्पणी ने बहस छेड़ दी है। एशिया पैसिफिक फाउंडेशन ऑफ कनाडा के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ट्रंप के बयान बेहद अप्रत्याशित होते हैं। आज जो वह कहते हैं, कल उससे बिल्कुल अलग हो सकता है। कुगेलमैन ने कहा, 'यू-टर्न लेना ट्रंप की आदत है। वे साफ तौर पर चीन की नीतियों से नाराज हैं।' कुगेलमैन ने यह भी कहा कि ट्रंप की यह टिप्पणी भारत द्वारा व्यापार वार्ता में सभी रियायतें देने से इनकार करने और भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय ट्रंप को न लेने देने से उनकी हताशा को दर्शाती है। 

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अमेरिका-चीन संबंधों पर पूछे गए सवाल पर कुगेलमैन ने कहा, 'राष्ट्रपति और उनके प्रशासन ने चीन को लेकर कोई साफ नीति पेश नहीं की है। आम धारणा तो यह थी कि मौजूदा ट्रंप प्रशासन, पिछले प्रशासन की नीति को आगे बढ़ाएगा और चीन को एक रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी, चुनौती या खतरे के रूप में देखेगा।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप चीन से प्रतिस्पर्धा जारी रखना चाहते हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने कई बार यह भी संकेत दिया है कि वे चीन के साथ किसी न किसी तरह का समझौता करना भी चाहते हैं।
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ट्रंप आज जो कहते हैं, कल बिलकुल अलग हो सकता है
कुगेलमैन ने दोहराया कि ट्रंप के बयान अक्सर बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा, 'आज वह कुछ कहते हैं, तो कल बिलकुल अलग कह सकते हैं। यही कारण है कि अभी तक भारत और चीन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।'
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भारत जैसे अहम साझेदार को खोने का बयान चीन के लिए सकारात्मक 
संभावित चीनी प्रतिक्रिया पर कुगेलमैन का मानना है कि बीजिंग को ट्रंप की इस तरह की अनिश्चित टिप्पणियों से फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा, 'यह सब बीजिंग के ही हित में जाता है। चीन तो वैसे भी एक नए तरह की विश्व व्यवस्था की शुरुआत करना चाहता है, जिसमें अमेरिका को चुनौती दी जा सके। और अगर राष्ट्रपति कह रहे हैं कि अमेरिका ने भारत जैसे अहम साझेदार को चीन के हाथों खो दिया है, तो यह साफ तौर पर चीन के लिए सकारात्मक बात है।'

यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के प्रति कड़ा रुख
रूस के मामले में कुगेलमैन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का रुख उसके प्रति कड़ा रहा है, खासकर यूक्रेन युद्ध को लेकर। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति रूस के प्रति सख्त रुख अपनाए हुए हैं। वे इस बात से नाखुश हैं कि रूस उनकी अपील पर यूक्रेन में लड़ाई रोक नहीं रहा।'

तनाव कम करने की कोशिश कर रहे भारत-चीन
कुगेलमैन ने आगे कहा, 'हकीकत यह है कि भारत चीन के पास नहीं गया है। बीते एक साल से भारत-चीन तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपने दूसरे कार्यकाल में कई बार यह संकेत दिया था कि वे चीन के साथ शांति और सुरक्षा पर काम करना चाहते हैं। लेकिन यह बयान उनकी भारत सरकार से नाराजगी दिखाता है। भारत ने व्यापार वार्ताओं में उनकी सभी शर्तें नहीं मानीं और न ही उन्हें भारत-पाकिस्तान युद्धविराम का श्रेय लेने दिया। इसलिए यह बयान तथ्य से ज्यादा एक राजनीतिक बयान है।'


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एससीओ सम्मेलन के बाद ट्रंप ने की टिप्पणी 
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब हाल ही में चीन के तियानजिन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भारत, रूस और चीन ने साझा मंच पर एकजुटता दिखाई। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे कि उनका भविष्य एक साथ लंबा और समृद्ध हो।'

भारत-चीन के खिलाफ व्यापार को लेकर तीखे हमले कर रहे ट्रंप
यह बयान उस समय आया है, जब ट्रंप लगातार भारत और चीन के खिलाफ व्यापार को लेकर तीखे हमले कर रहे हैं। पिछले महीने ही अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया था, जिसकी वजह भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना बताया गया। इस पर कुगेलमैन ने कहा, 'व्हाइट हाउस में ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों का रुख बाकी अमेरिकी अधिकारियों से अलग है। भारत को लेकर ज्यादातर कड़े बयान ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकारों से ही आ रहे हैं। इससे भारत-अमेरिका रिश्तों को कोई फायदा नहीं हो रहा।'

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