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UN: 'लादेन की खातिरदारी, संसद पर हमला, आतंकियों का बचाव', यूएन में MEA जयशंकर के पांच अहम बयान

Thu, 15 Dec 2022 09:36 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 15 Dec 2022 09:36 AM IST
सार

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग उठाते हुए कहा कि इस वैश्विक निकाय में सुधार समय की मांग है। मुझे यकीन है कि दक्षिण एशिया के देश भी भारत की इस प्रतिबद्धता के साथ हैं।

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MEA S Jaishankar speech at UN hitting out at security council organisation Pakistan and China 5 points
संयुक्त राष्ट्र में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : Twitter/S Jaishankar

विस्तार

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। दरअसल, पाकिस्तान की तरफ से बैठक में एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उठाया गया। इस पर जयशंकर ने पलटवार करते हुए कहा कि जो देश अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन-लादेन का मेजबान हो सकता है और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला करवा सकता है, उसे यूएन में 'उपदेशक' बनने की कोई जरूरत नहीं है। 
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क्या-क्या बोले जयशंकर?

1. जयशंकर ने 2001 में हुए संसद हमले को लेकर कहा, "आज से 18 साल पहले 13 दिसंबर को पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने दिल्ली में संसद परिसर पर हमला किया था। आतंकियों ने यहां खुलेआम फायरिंग की थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हुी थी।"
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2. चीन पर निशाना साधते हुए जयशंकर बोले- "आतंकवाद की चुनौतियों का जहां पूरी दुनिया साथ मिलकर मजबूती से मुकाबला कर रही है, वहीं आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों और उनकी साजिश रचने वालों को बचाने और उन्हें उचित ठहराने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग हो रहा है।" विदेश मंत्री का इशारा चीन की तरफ था, जिसने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी ठहराने की भारत और अमेरिका के प्रस्तावों को बार-बार रोका है।  
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3. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग उठाते हुए कहा कि इस वैश्विक निकाय में सुधार समय की मांग है। मुझे यकीन है कि दक्षिण एशिया के देश भी भारत की इस प्रतिबद्धता के साथ हैं। हम सभी जानते हैं कि ‘समान प्रतिनिधित्व का प्रश्न और सुरक्षा परिषद की सदस्यता में वृद्धि’ पिछले तन दशकों से संयुक्त राष्ट्र महासभा के एजेंडे में रहा है। अब जबकि सुधारों पर बहस लक्ष्यहीन हो गई है, वास्तविक दुनिया में नाटकीय बदलाव आया है। 

4. विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया हिंसा, सशस्त्र संघर्ष और मानवीय आपात स्थितियों से जूझ रही है, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए महात्मा गांधी के आदर्श प्रासंगिक बने हुए हैं। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस के साथ संयुक्त राष्ट्र के उत्तरी लॉन में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद यह टिप्पणी की। महात्मा गांधी की यह मूर्ति भारत ने उपहार में दी है, जिसे प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार ने बनाई है।

5. यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए विदेश मंत्री ने कहा, "निर्णय लेने वाले बड़े-बड़े मंचों पर भोजन, उर्वरक और ईंधन सुरक्षा पर हाल की चिंताओं को पर्याप्त रूप से व्यक्त नहीं किया गया था। इसलिए दुनिया के अधिकांश लोगों को यह लगा कि उनके हितों का महत्व नहीं है। हम ऐसा दोबारा नहीं होने देंगे।
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