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काबुल गुरुद्वारे हमले का मास्टरमाइंड आईएसकेपी प्रमुख असलम फारूकी गिरफ्तार
Sat, 04 Apr 2020 07:18 PM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 04 Apr 2020 07:18 PM IST
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आईएसकेपी प्रमुख असलम फारूकी
- फोटो : ANI
काबुल गुरुद्वारे हमले में अफगान सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। अफगान सुरक्षाबलों द्वारा एक विशेष अभियान में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) के एक आतंकवादी मावलवी अब्दुल्ला उर्फ असलम फारूकी को गिरफ्तार किया गया है। फारूकी पर ही हमले की योजना बनाने का आरोप है। काबुल गुरुद्वारे पर 25 मार्च को हमला हुआ था।
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लश्कर-ए-तैयबा समूह और फिर तहरीक-ए-तालिबान के आतंकी समूह से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक मावलवी अब्दुल्ला अप्रैल 2019 में मावलवी जिया-उल-हक उर्फ अबू उमर खोरासानी की जगह लेकर आईएसकेपी प्रमुख बना था।
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Pakistani national Mawlawi Abdullah, who was earlier associated with the proscribed Lashkar-e-Tayebba (LeT) group & then Tehreek-e-Taliban terror group, replaced Mawlawi Zia-ul-Haq aka Abu Omar Khorasani as ISKP chief in April 2019. (2/2) https://t.co/TbYZTKzxyl
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) April 4, 2020
गौरतलब हो कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मौजूद गुरुद्वारे में घुसकर 25 मार्च को भारी हथियारों से लैस एक आत्मघाती हमलावर ने गोलीबारी की थी। इस हमले में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई वहीं आठ लोग घयाल हुए थे। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। अफगान विशेष बलों ने हमलावार को मार गिराया था।
गौरतलब है कि सिख समुदाय यहां अल्पसंख्यक है। आंतरिक मंत्रालय ने एक बंदूकधारी द्वारा किए गए हमले पर एक ट्वीट में कहा था कि दुर्भाग्य से इस हमले में 25 नागरिक मारे गए और आठ अन्य घायल हो गए। गुरुद्वारे के अंदर फंसे 80 लोगों को सुरक्षा बलों ने बचा लिया। इससे पहले, अफगान मीडिया ने बताया था कि लगभग छह घंटे तक चले हमले को चार आतंकवादियों ने अंजाम दिया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि महिलाओं और बच्चों सहित 80 लोगों को गुरुद्वारे से बचाया गया है। आईएसआईएस आतंकवादी समूह ने एक बयान जारी कर पुष्टि की कि उसके सदस्यों ने काबुल शहर में सिखों पर हमले को अंजाम दिया।
वहीं, अफगानिस्तान के मुख्य आतंकवादी समूह तालिबान ने गुरुद्वारे पर हमले में अपनी भागीदारी से इनकार किया था। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा था कि आतंकवादी समूह का काबुल के शोर बाजार इलाके में हुए हमले से कोई संबंध नहीं है।
बता दें कि पिछले महीने की शुरुआत में इस्लामिक स्टेट से संबंधित एक संगठन ने काबुल में अल्पसंख्यक शिया मुस्लिमों के एक धार्मिक समागम पर हमला किया था जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई थी। इस रुढ़िवादी मुस्लिम बहुल देश में सिखों को बड़े पैमाने पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।