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पाकिस्तान: इमरान के सामने फूट-फूटकर रोए मौलाना, बोले- 'अल्लाह, अब जिंदगी या मौत तेरे हाथ में'

Sat, 25 Apr 2020 11:53 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 25 Apr 2020 11:53 AM IST
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Maulana Tariq Jamil crying onlive show in front of PM Imran Khan, says Allah be saved from the havoc of Coronavirus
पीएम इमरान खान- मौलाना तारिक जमील - फोटो : Twitter

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है। लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द कोरोना से मुक्ति मिले। इसी कड़ी में, पाकिस्तान में एक लाइव शो पर एक मौलाना अल्लाह से माफी मांगते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान के आगे फूट-फूटकर रोने लगे। मौलाना के रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। 

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पाकिस्तान के प्रसिद्ध मौलाना और तब्लीगी जमात से जुड़े मौलाना तारिक जमील एक लाइव शो में कोरोना पर कुछ बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। कार्यक्रम में कोरोना पर बोलते हुए मौलाना फूट-फूटकर रोने लगे और अल्लाह से माफी मांगने लगे। बता दें कि मौलाना तारिक जमील को पीएम इमरान का करीबी बताया जाता है। 
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दरअसल, लाइव शो पर कोरोना पर बोलते हुए मौलना दुआ मांगने लगे और कहा कि, 'या अल्लाह कोरोना के कहर से हमें बचा लें। हम सब नासमझ हैं। हमें अपनी गलतियों के लिए माफ कर दें। हमसे गलती हो गई है। हम इस आफत को टाल नहीं सकते हैं। अब तेरा ही सहारा बचा है। जिंदगी और मौत तेरे हाथ में है।'
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यह बोलते-बोलते मौलाना शो पर ही फूट-फूटकर रोने लगे। इस दौरान, शो पर मौजूद पीएम इमरान खान समेत सभी लोग मौलाना को ध्यान से सुन रहे थे और वे भी मौलाना के साथ दुआ मांगते दिखाई दिए। 


पाकिस्तान ने रमजान में सामूहिक नमाज पढ़ने की दी इजाजत
वहीं, कोरोना वायरस के खतरे के बीच मौलानाओं के दबाव में झुकते हुए पाकिस्तान सरकार ने रमजान के पवित्र महीने में मस्जिदों में सामूहिक नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी। राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी ने धार्मिक नेताओं और सभी प्रांतों के राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद यह घोषणा की। 

अल्वी ने कहा कि 20 सूत्रीय योजना पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा था कि यह एक महत्वपूर्ण समझौता है और सभी धर्मगुरुओं के बीच सहमति के बाद इस पर पहुंचा गया है। मौलवी मस्जिदों में नमाज अदा करते समय सामाजिक दूरी को लेकर सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए सहमत हुए हैं।

समझौते के अनुसार, 50 वर्ष से ऊपर के लोग, नाबालिग और फ्लू से पीड़ित लोगों को मस्जिदों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तरावीह (विशेष प्रार्थना) मस्जिदों के अलावा सड़कों, फुटपाथों और अन्य जगहों पर आयोजित नहीं की जानी चाहिए।

 
इसके अनुसार, मस्जिदों में सभी कालीनों को हटा दिया जाएगा और फर्श नियमित रूप से कीटाणुनाशक से साफ किया जाएगा। नमाज पढ़ते समय नमाज पढ़ने वालों को छह फीट की दूरी बनाए रखनी होगी और लोगों को चेहरे पर मास्क पहनना होगा और हाथ मिलाने या दूसरों को गले लगाने से बचना होगा। 

अल्वी ने कहा कि अगर सरकार किसी भी बिंदु पर महसूस करती है कि दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है या बीमारी फैल रही है, तो वह मस्जिदों में नमाज पढ़ने के बारे में अपने फैसले पर फिर से विचार कर सकती है। 

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