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मंगल मिशन: तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं की शरण में रूसी वैज्ञानिक, सीख रहे गहरे ध्यान, शीत निद्रा जैसे तरीके
Thu, 10 Jun 2021 10:26 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क अमर उजाला, मॉस्को
वर्ल्ड डेस्क अमर उजाला, मॉस्को
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 10 Jun 2021 10:26 PM IST
सार
तिब्बती बौद्ध भिक्षु इन वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के सुखद सफर के तरीके बताएंगे। गहन ध्यान, गहरी नींद जैसी तकनीकों से वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कम नुकसान होगा।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रूस के अंतरिक्ष वैज्ञानिक इन दिनों तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं की शरण में हैं। वे यह जानने का प्रयास कर रहे हैं ये भिक्षु कैसे हफ्तों तक अर्ध सुप्तावस्था में रह पाते हैं और वापस सामान्य अवस्था में किस तरह आते हैं। बता दें, रूस मंगल ग्रह पर पहला मानव मिशन भेजने की योजना बना रहा है।
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मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक 100 तिब्बती भिक्षुओं पर यह अध्ययन कर रहे हैं। लंबी दूरी के स्पेस मिशन के प्रमुख और मंगल-500 अभियान का नेतृत्व कर रहे प्रो. युरी बबयेव के मुताबिक भिक्षुओं द्वारा रखी जाने वाली शीतनिद्रा की स्थिति मंगल जैसे मिशन के दौरान महत्वपूर्ण साबित होगी।
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मरणोपरांत ध्यान जैसे दावों का अध्ययन
प्रो. बबयेव की टीम खासतौर पर टुकडम (मरणोपरांत ध्यान) जैसे दावों का भी अध्ययन कर रही है। इसमें भिक्षुओं को चिकित्सकीय रूप से मृत घोषित कर दिया जाता है, इसके बावजूद वे हफ्तों तक बिना किसी क्षय के सीधे बैठे रहते हैं। इतने दिन बाद भी उनके शरीर में मृत देह से आने वाली जैसी कोई दुर्गंध या अन्य लक्षण नहीं दिखता।
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इसके अलावा चेतना की बदली हुई अवस्थाओं का इस्तेमाल हमारे लिए बहुत कारगर है, क्योंकि इसकी मदद से मेटाबॉलिज्म की गति बदली जा सकती है। इन अवस्थाओं को कई घंटों के ध्यान, एकाकीपन और मंत्रोच्चार की मदद से हासिल किया जाता है। इनसे गहरी एकाग्रता मिलती है।
दलाई लामा की अनुमति के बाद अध्ययन शुरू किया
प्रो. बबयेव ने कहा कि हम हर संभावित तरीके की तलाश कर रहे हैं, जो हमारी मदद कर सके। उन्होंने बताया कि तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा की अनुमति के बाद ही अध्ययन शुरू किया गया है। हालांकि, महामारी के कारण इसमें थोड़ी देरी हुई। रूसी अंतरिक्ष विज्ञानियों का मानना है कि तिब्बती भिक्षुओं के तरीकों और तकनीकों का इस्तेमाल लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्रा के लिए वरदान साबित हो सकता है। प्रो. बबयेव के मुताबिक ये तरीके शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाए बिना लोगों के अंतरिक्ष में जाने का ख्वाब पूरा करने में मदद करेंगे।
अंतरिक्ष यात्रियों को थकान कम महसूस होगी
वैज्ञानिकों की टीम यह भी जांच रही है कि गहन ध्यान की अवस्था में भिक्षुओं के दिमाग में किस तरह की विद्युत गतिविधि होती है। शोधकर्ता मानते हैं कि गहन ध्यान से दिमाग बाहरी हलचल से पूरी तरह मुक्त हो सकता है।
गहरी नींद के विकल्प पर शोध
फिलहाल टीम नासा के साथ मिलकर स्पेस फ्लाइट के दौरान 'गहरी नींद' के विकल्प पर शोध कर रही है। इस स्थिति में मेटाबॉलिज्म रुकने से विकिरण प्रतिरोध क्षमता बढ़ेगी। स्पेसक्राफ्ट के तंग परिवेश में घर्षण की संभावनाएं भी कम होंगी। यात्री थकान कम महसूस करेंगे और लंबे समय के मिशन के दौरान उनमें आपसी संघर्ष भी नहीं होगा।