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ब्रिटेन: कई भारतीयों का हुआ प्रत्यर्पण पर कानून की आड़ लेकर बच रहे माल्या-नीरव

Tue, 08 Jun 2021 03:43 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन Published by: देव कश्यप Updated Tue, 08 Jun 2021 03:43 AM IST
सार

  • जनवरी 2018 से जुलाई 2019 के बीच 148 भारतीय किए गए प्रत्यर्पित

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Many Indians extradited from Britain but Vijay Mallya and Nirav Modi escaping under the cover of law
नीरव मोदी-विजय माल्या (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत के आर्थिक अपराधियों और अन्य भगोड़ों के लिए ब्रिटेन एक सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। हालांकि कई भारतीयों का ब्रिटेन से प्रत्यर्पण हुआ लेकिन कानून की आड़ में भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या और हीरा कारोबारी नीरव मोदी जैसे लोग बचते भी आ रहे हैं। यह स्थिति तब है जब ब्रिटेन के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है।

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ब्रिटिश गृहमंत्री प्रीति पटेल ने कहा कि 13,500 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी करने वाले नीरव के प्रत्यर्पण आदेश पर इस साल फरवरी में ही हस्ताक्षर कर दिए गए। इसी तरह से माल्या के प्रत्यर्पण को भी 2019 में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन दोनों ही भगोड़े कानूनी सुविधाओं का फायदा उठाकर ब्रिटेन में डेरा जमाए रखने में सफल हो गए हैं।
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अरबपति भगोड़े महंगे वकीलों को हायर कर भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए हर कानूनी मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन दोनों का ही एक ही तर्क है कि भारत में उनके मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। साथ ही वे भारतीय जेलों की खराब हालत को भी मुद्दा बना रहे हैं। भारत के नीरव और माल्या मामले की निष्पक्ष सुनवाई और स्वच्छ जेल उपलब्ध कराने के दावों के बावजूद इन दोनों को वहां से लाने में अभी समय लगेगा।
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जनवरी 2018 से जुलाई 2019 के बीच 148 भारतीय नागरिकों को ब्रिटेन से प्रत्यर्पित किया गया। इन सभी को अवैध रूप से ब्रिटेन में घुसने के आरोप में वापस भेजा गया। इसके अलावा ब्रिटेन आप्रवासन प्राधिकरण/गृहमंत्रालय ने 1574 से अधिक भारतीयों नागरिकों के लिए भारत सरकार से आपातकालीन यात्रा दस्तावेज हासिल किए और इन्हें कोविड-19 प्रतिबंधों में ढील मिलने पर प्रत्यर्पित किया जाएगा।


इन पर भी अवैध रूप से आने का आरोप है। भारत ने ब्रिटेन समेत 47 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि और 11 अन्य देशों के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्था की हुई है। साथ ही भारत ने विभिन्न देशों के साथ आपसी कानूनी सहायता संधियां की हुई हैं। इसके बावजूद प्रत्यर्पण प्रक्रिया काफी जटिल बनी हुई है क्योंकि इसमें विभिन्न कानूनी एजेंसियां, डिप्लोमेसी, अंतरराष्ट्रीय कानून, संधियां है जिनका फायदा माल्या और नीरव मोदी जैसे अरबपति भगोड़े उठाते हैं।  

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