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Hindi News ›   India News ›   Mamata Banerjee Reshuffle TMC youth women wings removes Saayoni Mala Roy from key positions

Politics: बगावत के बीच ममता ने की संगठन की सर्जरी, सायोनी घोष-माला रॉय को दिया झटका; इन नेताओं को सौंपी कमान

Sun, 14 Jun 2026 11:01 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 14 Jun 2026 11:01 AM IST
सार

Mamata Banerjee Reshuffle TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में जारी राजनीतिक संकट के बीच ममता बनर्जी ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस और माला रॉय को महिला इकाई के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। पार्टी में बागी सांसदों की सक्रियता बढ़ने के बीच यह फैसला लिया गया है। आइए, विस्तार से जानते अब इनकी जगह ममता ने किस पर भरोसा जताया है। 

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Mamata Banerjee Reshuffle TMC youth women wings removes Saayoni Mala Roy from key positions
ममता बनर्जी और सायोनी घोष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। ममता बनर्जी ने पार्टी की युवा और महिला इकाइयों में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपते हुए सांसद सायोनी घोष और सांसद माला रॉय को उनके प्रमुख पदों से हटा दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी संगठन पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही हैं।
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सायोनी घोष और माला रॉय को क्यों हटाया गया?

पार्टी सूत्रों के अनुसार, जादवपुर से सांसद सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाकर युवा नेता अर्नब बनर्जी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय की जगह नदिया जिले के कालीगंज से विधायक अलीफा अहमद को तृणमूल महिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही ममता बनर्जी ने संगठन के पुनर्गठन के दौरान सायोनी घोष और माला रॉय को इन पदों पर दोबारा नियुक्त किया था। लेकिन अब अचानक हुए इस बदलाव को पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति संघर्ष से जोड़कर देखा जा रहा है।
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क्या टीएमसी में बगावत का संकट गहरा गया?

पार्टी के भीतर असंतुष्ट सांसदों का एक समूह खुलकर नेतृत्व के खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है। बागी खेमे का दावा है कि लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 सांसद उनके साथ हैं। इनमें सायोनी घोष और माला रॉय के नाम भी बताए जा रहे हैं। बागी सांसदों का कहना है कि वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर खुद को वास्तविक टीएमसी के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। वहीं सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने यह भी कहा है कि यदि उनके समूह को मान्यता मिलती है तो वह संसद में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करेगा। इन घटनाओं ने टीएमसी के भीतर संकट को और गहरा कर दिया है।

ममता बनर्जी की नई रणनीति क्या है?

5 जून को ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी पुरानी समितियों और प्रकोष्ठों को भंग कर संगठन का पुनर्गठन किया था। नए ढांचे में उन्होंने अपने भरोसेमंद नेताओं और पुराने सहयोगियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद पर बरकरार रखा गया है। वहीं सांसद कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को लोकसभा में टीएमसी के वफादार सांसदों का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी संगठन में अनुशासन बनाए रखने और पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही हैं। आने वाले दिनों में टीएमसी की आंतरिक राजनीति और भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।
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