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स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ीं?: स्थानीय चुनावों में भारी नुकसान का डर, जानें पार्टी में क्यों उठे बगावत के सुर
Wed, 06 May 2026 12:16 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 06 May 2026 12:16 PM IST
सार
ब्रिटेन में गुरुवार को होने वाले स्थानीय चुनाव प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के लिए अग्निपरीक्षा बन गए हैं। खराब अर्थव्यवस्था, होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने और विवादित फैसलों के कारण उनकी लोकप्रियता काफी गिर गई है। अनुमान है कि लेबर पार्टी को इन चुनावों में भारी नुकसान होगा, जिससे स्टार्मर को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है। आइए, इस खबर को विस्तार से जानते हैं...
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कीर स्टार्मर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ब्रिटेन में इस वक्त राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। गुरुवार को होने वाले स्थानीय चुनाव ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन गए हैं। इन चुनावों के नतीजे यह तय कर सकते हैं कि स्टार्मर अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे या उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ेगा। यह चुनाव साबित कर देंगे कि अब ब्रिटेन एक बंटी हुई राजनीति के दौर में प्रवेश कर चुका है। माना जा रहा है कि देश की जनता प्रधानमंत्री से काफी नाराज है और इसका सीधा असर चुनाव की वोटिंग में देखने को मिलेगा। ब्रिटेन की राजनीति अब कई अलग-अलग पार्टियों में बंटती हुई नजर आ रही है, जिससे सत्ताधारी पार्टी की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं।
कीर स्टार्मर की 'लेबर पार्टी' को इंग्लैंड की स्थानीय परिषदों के साथ-साथ स्कॉटलैंड और वेल्स की विधानसभाओं में होने वाले इन चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कमजोर अर्थव्यवस्था और जनता की नाराजगी के कारण प्रधानमंत्री की लोकप्रियता काफी नीचे गिर गई है। विपक्षी पार्टियां गुरुवार को होने वाले इस चुनाव को स्टार्मर सरकार के दो साल के कामकाज पर एक कड़े जनमत संग्रह की तरह पेश कर रही हैं।
धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' ने तो इस चुनाव में अपना खास नारा ही "रिफॉर्म को वोट दें, स्टार्मर को बाहर करें" रख लिया है। वैसे तो अगला राष्ट्रीय चुनाव साल 2029 तक नहीं होना है, लेकिन अगर गुरुवार को लेबर पार्टी बुरी तरह हारती है, तो स्टार्मर के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी में एक बड़ी बगावत शुरू हो सकती है। एक विशेषज्ञ के अनुसार, भारी जीत के दो साल के अंदर ही स्टार्मर अब लोगों की निराशा का बहुत बड़ा कारण बन गए हैं।
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ये भी पढ़ें- US-Pakistan: पाकिस्तान के पेशावर में अमेरिका बंद करेगा वाणिज्य दूतावास, सुरक्षा के डर से ट्रंप का फैसला
बढ़ा दी है प्रधानमंत्री की परेशानी?
जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही कीर स्टार्मर ने कई ऐसी गलतियां की हैं, जिससे उनकी साख को भारी धक्का लगा है। उनकी सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, खस्ताहाल बुनियादी सेवाएं सुधारने और महंगाई कम करने के अपने वादों में पूरी तरह नाकाम रही है। इसके साथ ही, ईरान के साथ अमेरिकी-इस्राइली युद्ध के कारण यह काम और भी मुश्किल हो गया है। इस युद्ध ने होर्मुज के रास्ते से आने वाले तेल की सप्लाई को रोक दिया है। इसके अलावा, एक दागी छवि वाले पीटर मैंडेलसन को वाशिंगटन का राजदूत बनाने के उनके अजीब फैसले से भी देश की जनता और पार्टी के नेता बहुत ज्यादा खफा चल रहे हैं।
स्टार्मर की जगह कौन सा नेता लेगा?
जानकारों का अनुमान है कि लेबर पार्टी इंग्लैंड की 2,500 में से आधी से ज्यादा सीटें बहुत बुरी तरह हार सकती है। यह लेबर पार्टी और प्रधानमंत्री दोनों के लिए बहुत ही खतरे की घंटी है। अगर चुनाव में इतनी करारी हार होती है, तो स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, पूर्व उप प्रधानमंत्री एंजेला रेनर या मेयर एंडी बर्नहैम जैसे बड़े नेता स्टार्मर को पद से हटाने के लिए सीधी चुनौती दे सकते हैं। नियम के अनुसार किसी भी नेता को ऐसा करने के लिए संसद में कम से कम 80 सांसदों के समर्थन की सख्त जरूरत होगी। जानकारों का साफ कहना है कि अब यह सवाल नहीं है कि स्टार्मर जाएंगे या नहीं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि वह कब जाएंगे।
ब्रिटेन का राजनीति बदलने वाली हैं?
दशकों से ब्रिटेन में केवल दो ही मुख्य पार्टियां सत्ता के आस-पास रही हैं, लेकिन अब यहां की राजनीति पूरी तरह बदल रही है। इस बार लेबर पार्टी का वोट 'ग्रीन पार्टी' और 'रिफॉर्म यूके' जैसी पार्टियों में बंटने की पूरी उम्मीद है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ब्रिटेन अब 'पांच-पार्टी सिस्टम' की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। वेल्स में एक सदी से राज कर रही लेबर पार्टी अब तीसरे नंबर पर खिसक सकती है और वहां 'प्लेड सिमरू' पार्टी चुनाव जीत सकती है। वहीं, स्कॉटलैंड में 'स्कॉटिश नेशनल पार्टी' ने कड़ा ऐलान किया है कि अगर वह चुनाव जीती तो ब्रिटेन से आजादी के लिए एक नया जनमत संग्रह कराएगी। अब पुरानी राजनीति खत्म हो रही है और बदलाव तय माना जा रहा है।
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कीर स्टार्मर की 'लेबर पार्टी' को इंग्लैंड की स्थानीय परिषदों के साथ-साथ स्कॉटलैंड और वेल्स की विधानसभाओं में होने वाले इन चुनावों में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कमजोर अर्थव्यवस्था और जनता की नाराजगी के कारण प्रधानमंत्री की लोकप्रियता काफी नीचे गिर गई है। विपक्षी पार्टियां गुरुवार को होने वाले इस चुनाव को स्टार्मर सरकार के दो साल के कामकाज पर एक कड़े जनमत संग्रह की तरह पेश कर रही हैं।
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धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'रिफॉर्म यूके' ने तो इस चुनाव में अपना खास नारा ही "रिफॉर्म को वोट दें, स्टार्मर को बाहर करें" रख लिया है। वैसे तो अगला राष्ट्रीय चुनाव साल 2029 तक नहीं होना है, लेकिन अगर गुरुवार को लेबर पार्टी बुरी तरह हारती है, तो स्टार्मर के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी में एक बड़ी बगावत शुरू हो सकती है। एक विशेषज्ञ के अनुसार, भारी जीत के दो साल के अंदर ही स्टार्मर अब लोगों की निराशा का बहुत बड़ा कारण बन गए हैं।
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बढ़ा दी है प्रधानमंत्री की परेशानी?
जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही कीर स्टार्मर ने कई ऐसी गलतियां की हैं, जिससे उनकी साख को भारी धक्का लगा है। उनकी सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, खस्ताहाल बुनियादी सेवाएं सुधारने और महंगाई कम करने के अपने वादों में पूरी तरह नाकाम रही है। इसके साथ ही, ईरान के साथ अमेरिकी-इस्राइली युद्ध के कारण यह काम और भी मुश्किल हो गया है। इस युद्ध ने होर्मुज के रास्ते से आने वाले तेल की सप्लाई को रोक दिया है। इसके अलावा, एक दागी छवि वाले पीटर मैंडेलसन को वाशिंगटन का राजदूत बनाने के उनके अजीब फैसले से भी देश की जनता और पार्टी के नेता बहुत ज्यादा खफा चल रहे हैं।
स्टार्मर की जगह कौन सा नेता लेगा?
जानकारों का अनुमान है कि लेबर पार्टी इंग्लैंड की 2,500 में से आधी से ज्यादा सीटें बहुत बुरी तरह हार सकती है। यह लेबर पार्टी और प्रधानमंत्री दोनों के लिए बहुत ही खतरे की घंटी है। अगर चुनाव में इतनी करारी हार होती है, तो स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, पूर्व उप प्रधानमंत्री एंजेला रेनर या मेयर एंडी बर्नहैम जैसे बड़े नेता स्टार्मर को पद से हटाने के लिए सीधी चुनौती दे सकते हैं। नियम के अनुसार किसी भी नेता को ऐसा करने के लिए संसद में कम से कम 80 सांसदों के समर्थन की सख्त जरूरत होगी। जानकारों का साफ कहना है कि अब यह सवाल नहीं है कि स्टार्मर जाएंगे या नहीं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि वह कब जाएंगे।
ब्रिटेन का राजनीति बदलने वाली हैं?
दशकों से ब्रिटेन में केवल दो ही मुख्य पार्टियां सत्ता के आस-पास रही हैं, लेकिन अब यहां की राजनीति पूरी तरह बदल रही है। इस बार लेबर पार्टी का वोट 'ग्रीन पार्टी' और 'रिफॉर्म यूके' जैसी पार्टियों में बंटने की पूरी उम्मीद है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि ब्रिटेन अब 'पांच-पार्टी सिस्टम' की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। वेल्स में एक सदी से राज कर रही लेबर पार्टी अब तीसरे नंबर पर खिसक सकती है और वहां 'प्लेड सिमरू' पार्टी चुनाव जीत सकती है। वहीं, स्कॉटलैंड में 'स्कॉटिश नेशनल पार्टी' ने कड़ा ऐलान किया है कि अगर वह चुनाव जीती तो ब्रिटेन से आजादी के लिए एक नया जनमत संग्रह कराएगी। अब पुरानी राजनीति खत्म हो रही है और बदलाव तय माना जा रहा है।
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