अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में इस नेता की दावेदारी से चीन का एलजीबीटी समुदाय खुश
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अमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की रेस में इस बार बहुत से नए चेहरे शामिल हैं। इन्हीं में से एक पीट बूटएजएज भी हैं। बूटएजएज ने अपने राष्ट्रपति अभियान के औपचारिक लॉन्च की घोषणा रविवार को की है। वह वर्तमान में इंडियाना के साउथ बेंड में मेयर हैं। अगर बूटएजएज को चुनवों में जीत मिलती है, तो अमेरिका के इतिहास में वह पहले 'गे' (समलैंगिक) राष्ट्रपति होंगे।
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अमेरिका में 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की रेस में इस बार बहुत से नए चेहरे शामिल हैं। इन्हीं में से एक पीट बूटएजएज भी हैं। बूटएजएज ने अपने राष्ट्रपति अभियान के औपचारिक लॉन्च की घोषणा रविवार को की है। वह वर्तमान में इंडियाना के साउथ बेंड में मेयर हैं। अगर बूटएजएज को चुनवों में जीत मिलती है, तो अमेरिका के इतिहास में वह पहले 'गे' (समलैंगिक) राष्ट्रपति होंगे।
इस वक्त ना केवल अमेरिका बल्कि दुनियाभर के एलजीबीटी समुदाय की नजर उनपर है। इन देशों में चीन भी शामिल है। यहां का एलजीबीटी समुदाय बूटएजएज के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने को लेकर बेहद उत्साहित है। चीन में इस समुदाय के हालात ज्यादा ठीक नहीं हैं, यहां समुदाय को लोगों को काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
अमेरिका में कैसी है एलजीबीटी समुदाय की स्थिति?
अमेरिका में भी एलबीटी समुदाय के साथ सबकुछ ठीक नहीं है। यहां उनके साथ भेदभाव किया जाता है। अमेरिकी सेना में भी 1994 में शुरू हुई 'डोन्ट आस्क, डोन्ट टेल' की नीति फिर से शुरू हो गई है। ये नीति 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने खत्म कर दी थी। लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से शुरू कर दी है। नीति इसी शुक्रवार से दोबारा लागू हुई है।
इसके तहत अमेरिकी सेना में अगर कोई भी सैनिक ये बोलता है कि वह समलैंगिक है, तो उसे अपनी नौकरी छोड़नी होगी। वहीं समलैंगिकों को सेना में भर्ती नहीं किया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई सैनिक समलैंगिक होते हुए भी, इलाज के लिए तैयार हो जाता हैं, तो उसे इसके लिए मदद दी जाएगी। और वह अपनी नौकरी जारी रख सकता है।
2016 के अध्ययन में पता चला है कि अमेरिका में 10 हजार से भी अधिक सैनिक समलैंगिक हैं।
अमेरिका में इस समुदाय के लोगों ने इस नियम को शर्मनाक बताया है। उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से भी आपत्ति है। जिसमें ट्रंप ने कहा है कि सेना में समलैंगिकों के होने से चिकित्सा लागत काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर बूटएजएज अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं, तो हो सकता है कि समुदाय पर लगी बंदिशें हट जाएं। उनके राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारी की बात सुनकर एलजीबीटी समुदाय के लोग बेहद खुश हैं।