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केन्या: 191 हत्याओं के मामले में पादरी दोषी, अनुयायियों को भूखे रहकर जान देने को किया था मजबूर; कब होगी सजा?
Tue, 20 Oct 2026 12:51 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नैरोबी।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नैरोबी।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:51 AM IST
सार
केन्या में एक धर्मगुरु को 191 लोगों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है। इनमें 190 बच्चे शामिल हैं। आरोप है कि उसने अनुयायियों को यीशु से मिलने के लिए भूखे रहकर जान देने को कहा था। बच्चों को पहले निशाना बनाया गया और भागने या खाना खाने की कोशिश करने वालों को पीटा गया। आखिर इस पूरे मामले में क्या हुआ था? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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पादरी पॉल मैकेंजी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
केन्या में एक पादरी को 191 लोगों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है। उसने अपने अनुयायियों को खुद और अपने बच्चों को भूखा रखने के लिए मजबूर किया था, ताकि उनकी मौत हो जाए। पादरी ने अनुयायियों से कहा था कि ऐसा करने पर उन्हें स्वर्ग जाने और ईसा मसीह के साथ रहने का मौका मिलेगा।
पादरी पॉल मैकेंजी के साथ 28 अन्य लोगों को भी दोषी ठहराया गया है। ये लोग उस धार्मिक समूह को संचालित करने में मदद करते थे, जो केन्या के दक्षिण-पूर्वी तटीय इलाके में मैकेंजी के गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च से जुड़ा था।
सोमवार को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि मैकेंजी, उसके सहयोगियों और पहरेदारों ने जंगल में समुदाय बसाने के बाद एक ऐसी व्यवस्था बनाई थी, जिसमें धार्मिक शिक्षाओं और चर्च के नियमों के जरिये अनुयायियों को जबरन भूखा रखा जाता था।
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हत्या के इन मामलों में 190 बच्चों और एक वयस्क की मौत शामिल है। मैकेंजी और अन्य लोगों पर 230 से अधिक लोगों की मौत के मामले में अलग से गैर इरादतन हत्या, आतंकवाद और बच्चों को यातना देने के आरोप भी हैं। मैकेंजी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि उसने अपने अनुयायियों को भूखा रहने के लिए मजबूर नहीं किया। इस मामले में उसके साथ आरोपी बनाए गए लोगों ने भी खुद को निर्दोष बताया है।
कब सुनाई जाएगी सजा?
हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद मैकेंजी और अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा हो सकती है। सजा सुनाने के लिए 6 नवंबर की तारीख तय की गई है।
दुनिया में किसी धार्मिक समूह से जुड़ी सबसे भयावह त्रासदियों में से एक के बारे में जानिए।
2023 में जंगल में मिला था धार्मिक समूह
इस धार्मिक समूह का पता अप्रैल 2023 में चला। इससे पहले मैकेंजी ने तटीय पर्यटन शहर मालिंदी में अपने चर्च को बंद कर दिया था। इसके बाद वह सैकड़ों अनुयायियों के साथ अंदरूनी इलाके में स्थित पास के शकाहोला जंगल में चला गया था।
लोगों के लापता होने की खबरों की जांच कर रही पुलिस को जंगल में बेहद कमजोर हालत में अनुयायी मिले। वहां एक बड़े भूखंड पर कई उथली कब्रें भी मिलीं। 400 से अधिक शवों को कब्रों से निकालने में कई सप्ताह लगे। इनमें से कई शव सामूहिक कब्रों में मिले थे।
केन्या में मृत्युदंड का प्रावधान है। हालांकि, 1987 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मृत्युदंड को असांविधानिक करार दिया था। इसके बाद हत्या के मामलों में मृत्युदंड देना न्यायाधीश के विवेक पर छोड़ दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर लोगों की मौत भूख से हुई थी। इस घटना को बाद में शकाहोला नरसंहार के नाम से जाना गया। हालांकि, कुछ लोगों की मौत दम घुटने, गला घोंटने या सिर में चोट लगने से हुई थी। कुछ अन्य लोगों की मौत का कारण पता नहीं चल सका। उनके शव सड़ चुके थे। बचाए गए कुछ पीड़ितों की हालत इतनी कमजोर थी कि उनकी कुछ ही समय बाद मौत हो गई।
पादरी बनने से पहले क्या करता था मैकेंजी?
मैकेंजी पहले सड़क पर सामान बेचता था और टैक्सी चालक के रूप में भी काम करता था। उसने 2003 में मालिंदी में अपना गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च बनाया था। वह ईसाई धर्म का प्रचार करता था। उसकी कुछ शिक्षाओं में औपचारिक शिक्षा, कुछ दवाओं और टीकाकरण का विरोध करना शामिल था।
2019 में उसे केन्या के नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान संख्या देने की सरकार की कोशिश का विरोध करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उसका कहना था कि ये पहचान संख्याएं शैतानी हैं।
उसी साल उसने अपना चर्च बंद कर दिया। इसके बाद वह अपने अनुयायियों को लेकर जंगल में स्थित एक बड़े भूखंड पर चला गया। वहां उन्होंने घर बनाए और गांवों में रहने लगे। बचे हुए लोगों के अनुसार, इन गांवों के नाम बाइबिल से लिए गए थे। इनमें नाजरेथ भी शामिल था।
विरोध करने पर क्या होता था?
कोरोना महामारी के दौरान उसकी दुनिया के अंत से जुड़ी शिक्षाओं को बढ़ावा मिला। वह कहने लगा कि दुनिया खत्म होने वाली है। इसके बाद उसने और धार्मिक समूह के अन्य प्रमुख लोगों ने सख्ती से भूखा रखने के नियम लागू करने शुरू कर दिए। यहां तक कि माता-पिता को अपने बच्चों को खाना खिलाने से भी रोक दिया गया। बचे हुए लोगों के अनुसार, जो लोग उसकी शिक्षाओं का विरोध करते थे या जंगल छोड़कर जाने की कोशिश करते थे, उन्हें पीटा जाता था।
कितने समय तक भूखा रखा गया?
सोमवार को दोषी ठहराए जाने का फैसला सुनाने वाली न्यायाधीश डायना कावेद्जा ने कहा कि सबूतों से पता चला है कि आरोपियों ने स्वर्ग जाने का रास्ता बताकर लोगों को भूखा रहने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्होंने इसे जबरन लागू करना शुरू कर दिया। इसकी शुरुआत बच्चों से हुई थी।
उन्होंने बताया कि यह सिलसिला जनवरी 2021 के आसपास शुरू हुआ था। अधिकारियों को इस मामले का पता चलने से पहले यह दो साल से अधिक समय तक जारी रहा।
मैकेंजी और उसके साथ आरोपियों के खिलाफ फरवरी 2024 में औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे। अभियोजन पक्ष ने 123 गवाहों के बयान और सबूत पेश किए। अधिकारियों के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे बच्चे भी शामिल थे, जो इस धार्मिक समूह में फंस गए थे। हत्या के आरोपों का सामना कर रहे दो अन्य आरोपियों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।
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पादरी पॉल मैकेंजी के साथ 28 अन्य लोगों को भी दोषी ठहराया गया है। ये लोग उस धार्मिक समूह को संचालित करने में मदद करते थे, जो केन्या के दक्षिण-पूर्वी तटीय इलाके में मैकेंजी के गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च से जुड़ा था।
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सोमवार को फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि मैकेंजी, उसके सहयोगियों और पहरेदारों ने जंगल में समुदाय बसाने के बाद एक ऐसी व्यवस्था बनाई थी, जिसमें धार्मिक शिक्षाओं और चर्च के नियमों के जरिये अनुयायियों को जबरन भूखा रखा जाता था।
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हत्या के इन मामलों में 190 बच्चों और एक वयस्क की मौत शामिल है। मैकेंजी और अन्य लोगों पर 230 से अधिक लोगों की मौत के मामले में अलग से गैर इरादतन हत्या, आतंकवाद और बच्चों को यातना देने के आरोप भी हैं। मैकेंजी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि उसने अपने अनुयायियों को भूखा रहने के लिए मजबूर नहीं किया। इस मामले में उसके साथ आरोपी बनाए गए लोगों ने भी खुद को निर्दोष बताया है।
कब सुनाई जाएगी सजा?
हत्या के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद मैकेंजी और अन्य लोगों को उम्रकैद की सजा हो सकती है। सजा सुनाने के लिए 6 नवंबर की तारीख तय की गई है।
दुनिया में किसी धार्मिक समूह से जुड़ी सबसे भयावह त्रासदियों में से एक के बारे में जानिए।
2023 में जंगल में मिला था धार्मिक समूह
इस धार्मिक समूह का पता अप्रैल 2023 में चला। इससे पहले मैकेंजी ने तटीय पर्यटन शहर मालिंदी में अपने चर्च को बंद कर दिया था। इसके बाद वह सैकड़ों अनुयायियों के साथ अंदरूनी इलाके में स्थित पास के शकाहोला जंगल में चला गया था।
लोगों के लापता होने की खबरों की जांच कर रही पुलिस को जंगल में बेहद कमजोर हालत में अनुयायी मिले। वहां एक बड़े भूखंड पर कई उथली कब्रें भी मिलीं। 400 से अधिक शवों को कब्रों से निकालने में कई सप्ताह लगे। इनमें से कई शव सामूहिक कब्रों में मिले थे।
केन्या में मृत्युदंड का प्रावधान है। हालांकि, 1987 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मृत्युदंड को असांविधानिक करार दिया था। इसके बाद हत्या के मामलों में मृत्युदंड देना न्यायाधीश के विवेक पर छोड़ दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर लोगों की मौत भूख से हुई थी। इस घटना को बाद में शकाहोला नरसंहार के नाम से जाना गया। हालांकि, कुछ लोगों की मौत दम घुटने, गला घोंटने या सिर में चोट लगने से हुई थी। कुछ अन्य लोगों की मौत का कारण पता नहीं चल सका। उनके शव सड़ चुके थे। बचाए गए कुछ पीड़ितों की हालत इतनी कमजोर थी कि उनकी कुछ ही समय बाद मौत हो गई।
पादरी बनने से पहले क्या करता था मैकेंजी?
मैकेंजी पहले सड़क पर सामान बेचता था और टैक्सी चालक के रूप में भी काम करता था। उसने 2003 में मालिंदी में अपना गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च बनाया था। वह ईसाई धर्म का प्रचार करता था। उसकी कुछ शिक्षाओं में औपचारिक शिक्षा, कुछ दवाओं और टीकाकरण का विरोध करना शामिल था।
2019 में उसे केन्या के नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान संख्या देने की सरकार की कोशिश का विरोध करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उसका कहना था कि ये पहचान संख्याएं शैतानी हैं।
उसी साल उसने अपना चर्च बंद कर दिया। इसके बाद वह अपने अनुयायियों को लेकर जंगल में स्थित एक बड़े भूखंड पर चला गया। वहां उन्होंने घर बनाए और गांवों में रहने लगे। बचे हुए लोगों के अनुसार, इन गांवों के नाम बाइबिल से लिए गए थे। इनमें नाजरेथ भी शामिल था।
विरोध करने पर क्या होता था?
कोरोना महामारी के दौरान उसकी दुनिया के अंत से जुड़ी शिक्षाओं को बढ़ावा मिला। वह कहने लगा कि दुनिया खत्म होने वाली है। इसके बाद उसने और धार्मिक समूह के अन्य प्रमुख लोगों ने सख्ती से भूखा रखने के नियम लागू करने शुरू कर दिए। यहां तक कि माता-पिता को अपने बच्चों को खाना खिलाने से भी रोक दिया गया। बचे हुए लोगों के अनुसार, जो लोग उसकी शिक्षाओं का विरोध करते थे या जंगल छोड़कर जाने की कोशिश करते थे, उन्हें पीटा जाता था।
कितने समय तक भूखा रखा गया?
सोमवार को दोषी ठहराए जाने का फैसला सुनाने वाली न्यायाधीश डायना कावेद्जा ने कहा कि सबूतों से पता चला है कि आरोपियों ने स्वर्ग जाने का रास्ता बताकर लोगों को भूखा रहने के लिए प्रेरित किया। बाद में उन्होंने इसे जबरन लागू करना शुरू कर दिया। इसकी शुरुआत बच्चों से हुई थी।
उन्होंने बताया कि यह सिलसिला जनवरी 2021 के आसपास शुरू हुआ था। अधिकारियों को इस मामले का पता चलने से पहले यह दो साल से अधिक समय तक जारी रहा।
मैकेंजी और उसके साथ आरोपियों के खिलाफ फरवरी 2024 में औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे। अभियोजन पक्ष ने 123 गवाहों के बयान और सबूत पेश किए। अधिकारियों के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे बच्चे भी शामिल थे, जो इस धार्मिक समूह में फंस गए थे। हत्या के आरोपों का सामना कर रहे दो अन्य आरोपियों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।