फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Landmark court ruling blocks Taiwan man extradition to China

ECHR: यूरोप की मानवाधिकार अदालत ने सुनाया 'ऐतिहासिक' फैसला, ताइवान के एक व्यक्ति को चीन को सौंपने पर लगाई रोक

Thu, 17 Nov 2022 02:59 AM IST
देव कश्यप एएनआई, वाशिंगटन।
एएनआई, वाशिंगटन। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 17 Nov 2022 02:59 AM IST
सार

वॉयस ऑफ अमेरिका (वीओए) ) की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्तूबर में एक फ्रांसीसी अदालत ने फैसला सुनाया था कि दूरसंचार धोखाधड़ी के मामले आरोपी ताइवानी नागरिक को पोलैंड से चीन में प्रत्यर्पित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उसे दुर्व्यवहार या यातना का सामना करना पड़ सकता है और निष्पक्ष सुनवाई तक उसकी पहुंच नहीं हो सकती है।

विज्ञापन
Landmark court ruling blocks Taiwan man extradition to China
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यूरोप की मानवाधिकार अदालत ने एक 'ऐतिहासिक' फैसला सुनाते हुए ताइवान के एक व्यक्ति को चीन को सौंपने पर रोक लगा दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ईसीएचआर) ने सर्वसम्मति से पाया है कि एक ताइवानी नागरिक का चीन में प्रत्यर्पण, उसे दुर्व्यवहार और यातना के महत्वपूर्ण जोखिम में डाल देगा। पोलैंड की अदालतों ने पहले प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।

विज्ञापन


वॉयस ऑफ अमेरिका (वीओए) ) की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्तूबर में एक फ्रांसीसी अदालत ने फैसला सुनाया था कि दूरसंचार धोखाधड़ी के मामले आरोपी ताइवानी नागरिक को पोलैंड से चीन में प्रत्यर्पित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उसे दुर्व्यवहार या यातना का सामना करना पड़ सकता है और निष्पक्ष सुनवाई तक उसकी पहुंच नहीं हो सकती है। न्यायाधीशों ने हंग ताओ लियू की पांच साल की हिरासत पर भी फैसला सुनाया, जबकि उन्होंने अपील की थी कि प्रत्यर्पण अनुरोध गैर-कानूनी था। वीओए ने कहा कि फैसला जनवरी में लागू हो सकता है।

विज्ञापन


ईसीएचआर में लियू के वकील, पोलैंड के कानून के प्रोफेसर मार्सिन गोर्स्की ने (Marcin Gorski) वीओए को बताया कि "कुल मिलाकर मामले का परिणाम यह है कि मूल रूप से आपकी व्यक्तिगत स्थिति की परवाह किए बिना- चाहे आप चीन में किसी प्रकार की विपक्षी गतिविधियों में शामिल एक राजनीतिक कार्यकर्ता हों या नहीं.. आपको चीन में प्रत्यर्पित नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि मूल रूप से ऐसे संभावना होती है कि कोई भी सौंपे गए व्यक्ति के साथ बुरा बर्ताव किया जाएगा।"
विज्ञापन
विज्ञापन

 

मैड्रिड के अधिकार समूह सेफगार्ड डिफेंडर्स ने इस मामले पर कहा कि इस महत्वपूर्ण निर्णय का अर्थ यह होगा कि यूरोपीय देशों में रह रहे संदिग्धों को फिर से चीन को प्रत्यर्पित करना लगभग असंभव होगा। सेफगार्ड डिफेंडर्स ने आगे कहा कि "अब तक की अधिकांश या सभी यूरोप की सरकारी कार्रवाइयों की तुलना में यह कहना अभी मुश्किल है कि यह निर्णय कितना प्रभावशाली हो सकता है, और इसने कैसे एक झटके में चीन द्वारा कमजोर किए जा रहे बुनियादी अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत प्रयास किया है, जैसा कि यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स (ECHR) में निहित है।


लियू के प्रत्यर्पण को पोलैंड के कानूनी अधिकारियों द्वारा मंजूदी दी गई थी, जिसमें पोलैंड का सर्वोच्च न्यायालय भी शामिल था। अपीलकर्ता ने कहा कि उसे चीन को प्रत्यर्पित करना यातना और दुर्व्यवहार के साथ-साथ निष्पक्ष जांच के अधिकार से वंचित करेगा, और इस संबंध में ईसीएचआर के अनुच्छेद तीन और छह का उल्लंघन होगा।

  
मैड्रिड के अधिकार समूह ने कहा कि "यह फैसला भविष्य में चीन के प्रत्यर्पण पर सभी स्थानीय यूरोपीय देशों के अदालती फैसलों के साथ-साथ सरकारों का मार्गदर्शन करने के लिए निर्धारित है। अब चीन द्वारा प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किए जाने पर इस फैसले को ध्यान में रखकर मंजूरी देनी होगी। क्योंकि ऐसे मामलों में अदालत की मंजूरी की संभावना नहीं होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed