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कोरोना वैक्सीन की तुलना करने के लिए भारत में स्थापित की जाएगी प्रयोगशाला
Fri, 02 Oct 2020 01:30 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:30 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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एक प्रमुख गैर लाभकारी स्वास्थ्य आपात समूह ने संभावित कोविड-19 टीकों के डाटा का आकलन करने के लिए एक वैश्विक प्रयोगशाला नेटवर्क की स्थापना की है। इसके जरिए वैज्ञानिकों और दवा निर्माताओ को उनकी तुलना करने और सबसे प्रभावी शॉट्स के चयन में तेजी लाने में आसानी होगी।
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एपिडैमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन के साथ वैक्सीन आर एंड डी की निदेशक मेलानी सिवल का कहना है कि ये एक तरह से सेब का सेब से तुलना करना है। जब दवा निर्माता असरदार शॉट्स की तुलना कर सकेंगे तभी कोरोना वायरस महामारी को रोकने में सफलता मिलेगी।
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यूरोप, एशिया और उंत्तरी अमेरिकी में फैले एक नेटवर्क में, प्रयोगशालाएं कोविड-19 उम्मीदवारों पर हो रहे परीक्षणों से सैंपल लेकर उनका विश्लेषण करेंगी। मेलानी सिवल का कहना है कि जब आप किसी नई बीमारी के लिए कोई संभावित वैक्सीन तैयार करते हैं, तो हर कोई अपनी जानकारी को आगे रखता है।
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वो लोग वैक्सीन को बनाने के लिए अलग प्रोटोकॉल और अभिकर्मकों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए जब आप एक रीडआउट लेते हैं, तो विभिन्न उम्मीदवारों के बीच तुलना करना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगर एक केंदीकरण प्रयोगशाला बनाई जाएगी तो इससे एक बात स्पष्ट हो जाएगी कि हम सेब की ही तुलना सेब से कर रहे हैं।
एपिडैमिक प्रीपेयर्डनेस इनोवेशन शुरुआत में छह प्रयोगशालाओं को स्थापित कर रहा है। ये प्रयोगशालाएं कनाडा, ब्रिटेन, इटली, नीदरलैंड, बांग्लादेश और भारत में स्थापित की जाएंगी। दुनिया भर में अभी 100 से ज्यादा संभावित कोरोना की वैक्सीन पर काम चल रहा है। वहीं रूस और चीन ने पूर्ण प्रभावकारिता के साथ ही अपनी वैक्सीन को तैयार घोषित कर दिया है।
सिवल का कहना है कि इसमें भी डाटा एकत्र करने और उनका मूल्यांकन करने के लिए इस्तेमाल की जा रही प्रणाली एक मुद्दा बन सकती है। उनका कहना है कि सैकड़ों कोरोना वैक्सीन तैयार किए जा रहे हैं। हमारे पास एक ऐसी प्रणाली है जो वर्तमान में परीक्षण कर रहे उम्मीदवारों की इम्यूनिटी का मूल्यांकन और उनकी तुलना कर सके।
उन्होंने बताया कि अभी के लिए नेटवर्क प्राथमिक चरण के वैक्सीन उम्मीदवार और पहले और दूसरे चरण के मानव परीक्षणों से नमूनों का आकलन करेगा। हालांकि नेटवर्क का कहना है कि आने वाले महीनों में वह अपनी क्षमता को तीसरे चरण के परीक्षण तक विस्तार करने पर विचार कर रहा है।