न्यूजीलैंड में दोबारा सत्ता में लौट सकती है लेबर पार्टी, मतदान और नतीजे शनिवार को
- जनमत सर्वेक्षणों में प्रधानमंत्री जेसिंडा के समर्थक सबसे ज्यादा
- मतदान से ठीक पहले जनमत सर्वेक्षणों में आर्डर्न की लेबर पार्टी 46 फीसदी मतदाताओं की पसंद
विस्तार
न्यूजीलैंड के आम चुनाव में प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न की सत्ता में वापसी की प्रबल संभावना है। नई संसद के चुनाव के लिए शनिवार को वोट डाले जाएंगे। आर्डर्न ने अपनी उदार और समावेशी नीतियों से देश के एक बड़े जनमत का दिल जीत रखा है। 2017 से शुरू हुए उनके प्रधानमंत्री के पहले कार्यकाल में भीषण आतंकवादी हमले और कोरोना महामारी जैसे बड़े संकट आए। लेकिन इस दौरान आर्डर्न ने जो धीरज और दूरदृष्टि दिखाई, उसकी दुनिया भर में तारीफ हुई। न्यूजीलैंड छोटी आबादी वाला देश है, इसके बावजूद आर्डेर्न के कार्यकाल में उसे दुनिया में बेहतरीन शासन के एक उदाहरण के रूप में पेश किया जाता रहा है।
मतदान से ठीक पहले जनमत सर्वेक्षणों में आर्डेर्न की लेबर पार्टी को 46 फीसदी मतदाताओं की पसंद बताया गया है। सर्वेक्षणों में उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी नेशनल पार्टी को 31 फीसदी, ग्रीन पार्टी को 8 फीसदी, एक्ट न्यूजीलैंड पार्टी को 8 फीसदी और न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी को 3 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिलने का अनुमान लगाया गया है। न्यूजीलैंड की चुनाव प्रणाली के मुताबिक हर मतदाता दो वोट डालता है।
एक वोट वह अपने चुनाव क्षेत्र के उम्मीदवारों के बीच अपने पसंदीदा उम्मीदवार को देता है, जबकि एक वोट पार्टी के नाम पर डालता है। ये चुनाव प्रणाली 1996 में छोटे दलों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई थी। इसका नतीजा यह हुआ है कि बड़े दलों के लिए बहुमत पाना मुश्किल हो गया। अकसर उन्हें बहुमत जुटाने के लिए किसी छोटे दल या दलों से गठबंधन बनाना पड़ता है।
न्यूजीलैंड की संसद में 121 सीटें हैं। इनमें 71 सांसद प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। बाकी 70 सांसद पार्टियों को मिले वोट फीसदी के अनुपात के आधार पर चुने जाते हैं। शनिवार को भारतीय समय के मुताबिक सुबह साढ़े ग्यारह बजे मतदान खत्म होगा। उसके बाद मतगणना शुरू होगी और शाम तक सारे नतीजे मिल जाने की उम्मीद है।
इस बार एक खास बात यह है कि कंजरवेटिव विचारों वाली मुख्य विपक्षी नेशनल पार्टी का नेतृत्व भी इस बार एक महिला के हाथ में है। इसकी नेता 61 वर्षीया जुडिथ कॉलिन्स ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को अपना आदर्श मानती हैं और आयरन हैंड से शासन चलाने में यकीन करती हैं। इसीलिए न्यूजीलैंड की मीडिया ने उन्हें ‘क्रशर’ (कुचल देने वाला) नाम दिया है। इस रूप में वे 40 वर्षीय जेसिंडा आर्डर्न की विपरीत धुरी हैं।
मार्च 2019 में न्यूजीलैंड में एक मस्जिद पर आतंकवादी हमला हुआ था। ये हमला एक श्वेत नस्लवादी ने किया था। जेसिंडा आर्डर्न ने उस वक्त पीड़ित मुस्लिम समुदाय को समाज से जोड़ने के लिए अभूतपूर्व पहल की। एक शोक सभा में वे मुस्लिम महिलाओं जैसी लिबास में गईं। उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट किया कि न्यूजीलैंड पर वहां रहने वाले हर व्यक्ति और समुदाय का समान अधिकार है।
इसके अलावा उन्होंने मूलवासी माउरी समुदाय के ऐतिहासिक जख्मों पर मरहम लगाने की पहल की। पिछले दिसंबर में ज्वालामुखी फटने पर पीड़ितों को राहत देने में सक्रिय और प्रभावी व्यक्तिगत भूमिका उन्होंने निभाई। उनके जन-प्रिय नेतृत्व की एक खास झलक कोरोना महामारी के दौर में भी देखने को मिली। नियमित रूप से अपनी जनता को संबोधित कर उन्होंने लोगों को शिक्षित करने और लॉकडाउन के दौरान कमजोर वर्ग के लोगों की देखभाल के ऐसे कदम उठाए, जिसकी दुनिया भर की मीडिया में खूब तारीफ हुई।
जेसिंडा आर्डर्न की यही भूमिका अब उनकी पार्टी के काम आ रही है। न्यूजीलैंड में जहां अकसर हर तीन साल पर सत्ता बदलने की परंपरा रही है, वहां इस बार लेबर पार्टी के फिर से सत्ता में लौट आने की पुरजोर संभावना जताई जा रही है।