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जानिए इस डिवाइस के बारे में जो बताएगा इथोपिया विमान हादसे का पूरा सच
Sun, 17 Mar 2019 04:18 PM IST
Gaurav Pandey
प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली
प्रियेश मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Sun, 17 Mar 2019 04:18 PM IST
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ब्लैक बॉक्स
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इथोपियन एयरलाइन का बोइंग विमान पिछले रविवार को हादसे का शिकार हो गया था। इस हादसे में 157 लोगों की मौत हो गई। अब फ्रांस की एजेंसी नागरिक उड्डयन सुरक्षा जांच और विश्लेषण ब्यूरो (बीईए) के जांचकर्ता ऐसे सुराग की तलाश कर रहे हैं जिससे इथोपिया एयरलाइंस के विमान के टेक-ऑफ के बाद जमीन पर गिरने के कारणों का पता चल सके।
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बीईए के ये सदस्य दुर्घटनाग्रस्त बोइंग 737 मैक्स विमान के पेरिस पहुंचे दो ब्लैक बॉक्स का विश्लेषण करने में लगे हैं। किसी भी प्लेन में ब्लैक बॉक्स एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसे तकनीकी रूप से उड़ान (फ्लाइट) डाटा रिकॉर्डर कहा जाता है। इसमें उड़ान, एयरस्पीड, ऊंचाई, कॉकपिट में हुई बातचीत और हवा के दबाव जैसे 88 महत्वपूर्ण पैरामीटर रिकॉर्ड होते हैं।
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जब कोई दुर्घटना होती है तो ब्लैक बॉक्स के द्वारा ही उसके कारणों के बारे में जाना जाता है। आइए जानते हैं कि यह डिवाइस काम कैसे करती है।
आप इस डिवाइस के नाम से भ्रमित न हों। यह न तो काले रंग का होता है न ही बॉक्स के रूप में होता है। यह वास्तव में नारंगी रंग का कंप्रेशर के आकार का उपकरण है। जिसके रंग के कारण यह दूर से नजर आ जाता है। 1950 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डेविड वॉरेन ने इस उपकरण का आविष्कार किया था। यह सभी विमानों में लगाना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाने और 88 प्रकार के डाटा को सुरक्षित रखने में किया जाता है।
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ऐसा होता है ब्लैक बॉक्स
फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर
इसका वजन लगभग 4.5 किलोग्राम होता है। इस बॉक्स के मुख्यत चार भाग होते हैं-
इसके अलावा ब्लैक बॉक्स में दो रिकॉर्डर लगे होते हैं। पहला कॉकपिट वायस रिकॉर्डर जो पायलट की आवाज और कॉकपिट की आवाज को रिकॉर्ड करता है। दूसरा फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर होता है।
- इसके पहले भाग में एक चेचिस या इंटरफेस होता है जो डिवाइस को किसी जगह पर फिट करने के काम में आता है। इसके अलावा ऊपरी भाग में रिकॉर्डिंग और प्लेबैक की सुविधा होती है।
- इस डिवाइस में एक लोकेटर बीकन भी लगा होता है जो पानी की गहराइयों में भी सिग्नल भेजता रहता है। मलेशियन एयरलाइंस की दुर्घटना के समय इसी लोकेटर बीकन की तलाश की जा रही थी जिससे ब्लैक बॉक्स मिल सके।
- तीसरे भाग में स्टेनलेस स्टील या टाइटेनियम से बनी कोर हाउसिंग होती है जिसे 'क्रैश सर्वाइवल मेमोरी यूनिट' भी कहा जाता है। यह भाग बहुत मजबूत होता है जो न तो आग से जल सकता है न ही पानी में गीला हो सकता है।
- चौथे भाग में सर्किट बोर्ड और नाखून के आकार की रिकॉर्डिंग चिप्स होते हैं जो डाटा को सुरक्षित रखते हैं।
इसके अलावा ब्लैक बॉक्स में दो रिकॉर्डर लगे होते हैं। पहला कॉकपिट वायस रिकॉर्डर जो पायलट की आवाज और कॉकपिट की आवाज को रिकॉर्ड करता है। दूसरा फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर होता है।
रिकॉर्डर से डाटा कैसे प्राप्त किया जाता है
तकनीकी विशेषज्ञ ब्लैक बॉक्स के उपर लगी सुरक्षात्मक समाग्री को ध्यान से हटाते हैं जिससे गलती से कहीं डाटा न मिट जाए। फिर ऑडियो या डाटा फाइल डाउनलोड और कॉपी किया जाता है। इसके बाद उन डाटा का विश्लेषण कर दुर्घटना के कारणों का पता लगाते हैं। इसमें जांचकर्ता कभी-कभी स्पेक्ट्रल एनालिसिस भी करते हैं जिसकी मदद से विस्फोट से पहले के दरार होने की आवाज को सुना जाता है।ब्लैक बॉक्स में कितनी देर की रिकॉर्डिंग होती है
इथियोपियन एयरलाइन (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
सामान्यत: ब्लैक बॉक्स में 19 उड़ानों के डाटा मौजूद होते हैं उसके अलावा सीवीआर में दो घंटे की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। कहा जा रहा है कि इथोपियाई विमान हादसा उड़ान के बस छह मिनट बाद ही हो गया था, इसलिए ब्लैक बॉक्स में सभी डाटा सुरक्षित होंगे। एक जांचकर्ता के अनुसार, ब्लैक बॉक्स सामान्यत: यह बताता है कि कोई दुर्घटना कब और कैसे हुई है। इससे आपको दुर्घटना के कारणों को समझने में मदद मिलती है। हालांकि, कई बार यह ठीक-ठीक तरह से दुर्घटना के कारणों को बताने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।