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Kakhovka Dam: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नष्ट कखोव्का बांध कितना पुराना, यह नुकसान किसके लिए भारी पड़ेगा?

Wed, 07 Jun 2023 08:22 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 07 Jun 2023 08:22 PM IST
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सार
कखोव्का पनबिजली संयंत्र के हिस्से के रूप में बांध को साल 1956 में नीप्रो नदी पर बनाया गया था। यह 30 मीटर (98 फीट) ऊंचा और 3.2 किमी (2 मील) लंबा है। यह बांध खेरसॉन क्षेत्र के नोवा कखोव्का शहर में है जो फिलहाल रूस के कब्जे में है।
 
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Kakhovka dam: What was the incident and how will it affect the ongoing russia ukraine war
कखोव्का बांध - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है। दोनों पक्षों में भारी जान-माल  की क्षति हो चुकी है। इस बीच, मंगलवार को यूक्रेन सरकार ने रूस पर उसके विशाल बांध को नष्ट करने का आरोप लगाया है।  यूक्रेन ने कहा कि बांध के टूटने से युद्ध क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैल गया है। वहीं, दूसरी ओर रूस की ओर से कहा गया कि यह कार्य खुद यूक्रेन ने ही किया है। 


दोनों देश कखोव्का बांध को नष्ट करने का आरोप एक-दूसरे पर लगा रहे हैं। ऐसे में जानना जरूरी हैं कि कखोव्का बांध कहां है? बांध कितना पुराना है? इसका महत्व क्या है? यह रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को कैसे प्रभावित करेगा? बांध नष्ट होने से कितना नुकसान हुआ है? 

यूक्रेन का बांध ध्वस्त
यूक्रेन का बांध ध्वस्त - फोटो : वीडियो ग्रैब
पहले जानते हैं हुआ क्या है?
दक्षिणी यूक्रेन और क्रीमिया को पानी की आपूर्ति करने वाला कखोव्का बांध मंगलवार तड़के टूट गया। सीमा से सटा यह बांध सीमा पर रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्र में पड़ता है। डैम टूटने से आसपास के क्षेत्र में बाढ़ आ गई। इससे सबसे बड़ा खतरा पास के एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र को उत्पन्न हो गया है।

कखोव्का बांध के क्षतिग्रस्त होने से नजदीक में बसे एक शहर और दो दर्जन गांवों में बाढ़ आ गई। वहीं, बाढ़ के कारण इन इलाकों से 17,000 लोगों को निकाल कर सुरक्षित जगह ले जाया गया है। अब रूस और यूक्रेन दोनों ही घटना के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

बांध कितना पुराना है?
कखोव्का पनबिजली संयंत्र के हिस्से के रूप में बांध को साल 1956 में नीप्रो नदी पर बनाया गया था। यह 30 मीटर (98 फीट) ऊंचा और 3.2 किमी (2 मील) लंबा है। यह बांध खेरसॉन क्षेत्र के नोवा कखोव्का शहर में है जो फिलहाल रूस के कब्जे में है।

बांध सोवियत काल में बनाया गया था। निप्रो नदी पर बने छह बांध में से यह एक है। यह देश के दूर उत्तर से दक्षिण में समुद्र में फैला हुआ है। बांध में अमेरिकी राज्य यूटा में ग्रेट साल्ट लेक की मात्रा के बराबर पानी रखने की क्षमता है। स्थानीय लोग इसे कखोव्का सागर कहते हैं क्योंकि कुछ जगहों पर बांध का दूसरा किनारा नहीं दिखाई देता है।

यूक्रेन का बांध ध्वस्त
यूक्रेन का बांध ध्वस्त - फोटो : SOCIAL MEDIA
कखोव्का बांध अहम क्यों है?
बांध पर रूसी सेना ने फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ युद्ध की शुरुआत में कब्जा कर लिया था। बांध दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र और रूस नियंत्रित क्रीमिया प्रायद्वीप के लिए एक रणनीतिक जल स्रोत है। अब इसके टूटने से आई बाढ़ यूक्रेनी बलों को खोए हुए क्षेत्र को फिर से हासिल करने से रोक सकती है।

इस क्षति ने परमाणु घटना की आशंका को बढ़ा दिया है, क्योंकि जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र पास में ही स्थित है। बता दें कि जापोरिज्जिया यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है।

यूक्रेन और रूस क्या कह रहे हैं?
यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदोमीर जेलेंस्की ने बांध के टूटने के लिए रूस को दोषी ठहराया है। इसके साथ ही जेलेंस्की ने एक आपातकालीन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सत्र भी बुलाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, 'रूस ने संयंत्र के संरचनाओं में अंदरूनी विस्फोट किया है। दुनिया को प्रतिक्रिया देनी चाहिए।'

आगे उन्होंने कहा, 'यह आतंकवाद की सिर्फ एक रूसी करतूत है। यह सिर्फ एक रूसी युद्ध अपराध है। रूस को यूक्रेनी भूमि छोड़ देनी चाहिए और अपने आतंक के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।'

यूक्रेन के पनबिजली संचालक ने कहा कि कखोव्का बांध से जुड़ा बिजलीघर भी पूरी तरह से नष्ट हो गया है। सयंत्र के प्रमुख इहोर सिरोटा ने कहा, 'स्टेशन को बहाल नहीं किया जा सकता है, यह पूरी तरह से नष्ट हो गया है ... हाइड्रोलिक संरचना बह गई है।

इस बीच रूस ने यूक्रेन पर जानबूझकर तोड़फोड़ का आरोप लगाया। रूस ने दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने 48 घंटे पहले शुरू किए गए जवाबी हमले में हुए नुकसान के बाद बांध को क्षतिग्रस्त कर दिया। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी चेतावनी दी कि नुकसान हजारों निवासियों सहित पर्यावरण के लिए के लिए बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पेसकोव ने मीडिया से कहा, 'यूक्रेन सरकार को सभी नतीजों के लिए पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'

रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस-यूक्रेन युद्ध - फोटो : Social media
यह रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को कैसे प्रभावित करेगा?
नुकसान की खबर तब आई जब रूस ने दावा किया कि यूक्रेन ने जवाबी हमला शुरू कर दिया है। यूक्रेन ने कहा कि मॉस्को का लक्ष्य रूसी सेना से क्षेत्र को वापस लेने के लिए इसके हमलों के लिए बाधाएं पैदा करना था। 

क्वीव ने पहले मास्को पर बांध के खनन का आरोप लगाया था, जब अक्तूबर में पास में ही युद्ध छिड़ गया था। हालांकि रूस ने दावे का खंडन किया। वहीं, रूसी सेना की जांच करने वाली कंफ्लिक्ट इंटेलिजेंस टीम के संस्थापक रुस्लान लेविएव ने कहा, 'दोनों पक्षों के लिए बांध को कमजोर करने का कोई मतलब नहीं है।'

कखोव्का बांध
कखोव्का बांध - फोटो : SOCIAL MEDIA
इसके अन्य प्रभाव भी होंगे?
रूस ने कहा कि 14 इलाकों में 22,000 से अधिक निवासी बाढ़ क्षेत्रों में हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि भारी जनसंख्या वाले इलाकों के लिए बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। दूसरी ओर यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, लगभग 16,000 लोग गंभीर बाढ़ क्षेत्र में हैं। नोवा कखोव्का शहर में मौजूद रूसी मेयर व्लादिमीर लियोन्टीव ने कहा कि लगभग 300 घरों के निवासियों को खाली कर दिया गया है।

क्षति के चलते 150 टन इंजन तेल भी नदी में गिर गया है। इसको लेकर यूक्रेन ने इकोसाइड (पर्यावर्णीय नुकसान) की आशंका जताई है। नोवा कखोव्का चिड़ियाघर बाढ़ के क्षेत्रों में से एक है जहां लगभग 260 जानवर हैं। पशु अधिकार समूह ने कहा कि एक अन्य प्राणि उद्यान, कजकोवा डिब्रोवा के लगभग सभी जानवर बाढ़ में डूबकर मर गए।

परमाणु संयंत्र की सुरक्षा दांव पर
बाढ़ के अलावा, बांध के ढहने से परमाणु घटना की आशंका पैदा हो गई क्योंकि जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र अपने शीतलन प्रणाली के लिए कखोव्का जलाशय पर निर्भर है। संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा कि उसके विशेषज्ञ स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं लेकिन संयंत्र में तत्काल कोई परमाणु सुरक्षा जोखिम नहीं है।
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