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पश्चिम एशिया संकट: ईरान पर हमले के लिए नेतन्याहू ने तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों को उकसाया, जॉन केरी का खुलासा

Thu, 23 Apr 2026 11:24 PM IST
राकेश कुमार एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 23 Apr 2026 11:24 PM IST
सार

जॉन केरी ने खुलासा किया है कि नेतन्याहू के ईरान पर हमले के प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति बुश, ओबामा और बाइडन ने ठुकरा दिया था। वे शांतिपूर्ण विकल्पों पर भरोसा करते थे। हालांकि, ट्रंप ने इसका समर्थन किया, लेकिन अब वर्तमान प्रशासन और जेडी वेंस इस रणनीतिक धारणा पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
 

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पूर्व अमेरिकी विदेश सचिव जॉन केरी। - फोटो : फेसबुक/John Kerry

विस्तार

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वर्षों से ईरान के साथ सैन्य संघर्ष शुरू करने के लिए कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर दबाव बनाया था। केरी के अनुसार, नेतन्याहू के इस युद्धक प्रस्ताव को जॉर्ज डब्लू बुश, बराक ओबामा और जो बाइडन ने सिरे से खारिज कर दिया था।
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केरी ने बताया कि कैसे पिछली अमेरिकी सरकारों ने पश्चिम एशिया में एक और बड़े युद्ध की कोशिशों का विरोध किया। केरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'बराक ओबामा ने मना किया, जॉर्ज बुश ने मना किया और राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इसे स्वीकार नहीं किया। मैं व्यक्तिगत रूप से उन महत्वपूर्ण चर्चाओं और बैठकों का हिस्सा रहा हूं।'
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केरी ने क्या-क्या कहा? 
जॉन केरी ने दावा किया कि पूर्व राष्ट्रपतियों ने ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से इसलिए इनकार किया क्योंकि उनका मानना था कि शांतिपूर्ण समाधान के सभी रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। केरी के मुताबिक, अमेरिका का रुख हमेशा से यह रहा है कि जब तक कूटनीति की रत्ती भर भी संभावना शेष है, तब तक युद्ध जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठाना चाहिए।
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वियतनाम युद्ध के दौरान एक सैनिक के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए केरी ने कहा कि वियतनाम और इराक जैसे संघर्षों ने अमेरिका को एक बेहद महत्वपूर्ण सबक सिखाया है। उन्होंने कहा, 'वियतनाम युद्ध के एक अनुभवी सैनिक के रूप में मैं यह कह सकता हूं कि हमें उस युद्ध के बारे में अंधेरे में रखा गया और झूठ बोला गया। इराक युद्ध से भी यही सीख मिली कि आप अपनी जनता से झूठ बोलकर उनके बेटे-बेटियों को मोर्चे पर लड़ने के लिए नहीं भेज सकते।'


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नेतन्याहू को मिला ट्रंप का साथ
हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू को अपने इस एजेंडे में डोनाल्ड ट्रंप का भरपूर साथ मिला। रिपोर्ट बताती है कि 11 फरवरी को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में नेतन्याहू ने दावा किया था कि ईरानी जनता शासन बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप ने इस दावे पर भरोसा जताया और एक संयुक्त सैन्य अभियान को हरी झंडी दे दी थी।

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