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John Bolton: मादुरो, भारतीय टैरिफ और नोबेल की चाह; US के पूर्व सुरक्षा सलाहकार ने ट्रंप की नीति पर उठाए सवाल

Tue, 06 Jan 2026 09:23 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 06 Jan 2026 09:23 PM IST
सार

John Bolton On Donald Trump Policy: पूर्व अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ट्रंप की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन शांति प्रयास नोबेल पुरस्कार केंद्रित हैं। उन्होंने चीन को सबसे बड़ा खतरा बताया और भारत-अमेरिका सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। 

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John Bolton on Donald Trump foreign policy Russia Ukraine war analysis Maduro regime crisis india tarrif
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने रूस-यूक्रेन युद्ध, वेनेजुएला, चीन और भारत से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बोल्टन का कहना है कि ट्रंप की प्राथमिकता स्थायी वैश्विक समाधान नहीं, बल्कि नोबेल शांति पुरस्कार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा अधिक दिखाई देती है। उन्होंने इसे अमेरिकी विदेश नीति के लिए खतरनाक संकेत बताया।

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वेनेजुएला जैसी कार्रवाई को लेकर बोल्टन ने कहा कि हर देश की स्थिति अलग है, लेकिन क्यूबा सबसे अहम है। उन्होंने बताया कि कास्त्रो के बाद की क्यूबाई सरकार को डर है कि अगर मादुरो शासन गिरा तो अगला नंबर उसी का हो सकता है। बोल्टन के मुताबिक, क्यूबा और वेनेजुएला एक-दूसरे पर काफी हद तक निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जो खुद क्यूबाई मूल के हैं, मादुरो शासन को हटाने की कोशिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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भारत पर टैरिफ और ट्रंप की रणनीति
भारत पर टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले को बोल्टन ने अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के साथ मिलकर चीन के खतरे का मुकाबला करना चाहिए था। लेकिन ट्रंप टैरिफ और तेल बिक्री को लेकर जरूरत से ज्यादा केंद्रित रहे।

बोल्टन के मुताबिक, भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिका-भारत संबंधों में तनाव बढ़ा, जबकि चीन और तुर्किये जैसे देशों पर ऐसा कदम नहीं उठाया गया, जो ज्यादा रूसी तेल खरीदते हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच सीधी बातचीत से कोई समाधान निकल सके।


रूस-यूक्रेन युद्ध पर कही ये बात
जॉन बोल्टन ने कहा कि रूस ने यूक्रेन पर पहला हमला 2014 में किया था और दूसरी बड़ी कार्रवाई की तैयारी भी उसी समय से शुरू हो गई थी। उनके मुताबिक मौजूदा हालात में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप की शांति पहल को गंभीरता से नहीं लिया। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में रूस-यूक्रेन शांति समझौते को नोबेल पुरस्कार से जोड़ दिया, लेकिन पुतिन बार-बार किसी समझौते से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में शांति की उम्मीद कमजोर दिखती है।

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2026 के लिए व्हाइट हाउस की प्राथमिकताएं
बोल्टन ने कहा कि 2026 में अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन है। उन्होंने बताया कि चीन की सैन्य शक्ति लगातार बढ़ रही है, जो दक्षिण चीन सागर, ताइवान और भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। उनके अनुसार, रूस का यूक्रेन में आक्रामक युद्ध दूसरा बड़ा खतरा है, जबकि ईरान और उत्तर कोरिया परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के कारण तीसरे नंबर पर हैं। बोल्टन ने जोर दिया कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और अमेरिका को कहीं अधिक मजबूती से साथ काम करना चाहिए।

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