अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बिडेन को बढ़त, जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद ट्रंप के खिलाफ रोष
- अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जोई बिडेन के जीतने के आसार
- जॉर्ज फ्लॉयड की मौते के बाद डोनाल्ड ट्रंप के प्रति लोगों में गुस्सा
- मार्च से ऑनलाइन चुनावी कैंपेन कर रहे हैं पूर्व उप राष्ट्रपति जोई बिडेन
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रियल क्लियर पॉलिटिक्स के औसतन अनुमान की माने तो पिछले महीने से जोई बिडेन का नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जोई बिडेन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं लेकिन रियल क्लियर पॉलिटिक्स ने इस बार जोई बिडेन का 7.8 फीसदी प्वाइंट दिए हैं जो मई की शुरुआत में मिले 5.3 फीसदी से काफी ज्यादा है। चार जून 2016 में आरसीपी (रियल क्लियर पॉलिटिक्स) के आंकड़ों के मुताबिक हिलेरी क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप से 1.5 प्वाइंट आगे थीं।
चुनावी पोल को लेकर कई निजी एजेंसियों ने भी आंकड़ों को जारी किया है। मैनमाउथ यूनिवर्सिटी जिसमें 742 मतदाता रजिस्टर है, के मुताबिक बिडेन को ट्रंप से 11 प्वाइंट ज्यादा मिलने की उम्मीद है। अमेरिका में 52 फीसदी मतदाता बिडेन के समर्थन में हैं और 41 फीसदी डोनाल्ड ट्रंप को हटाना चाह रहे हैं।
वहीं एबीसी न्यूज़ और वॉशिंगटन पोस्ट जहां 835 मतदाता रजिस्टर हैं, उसके मुताबिक जोई बिडेन को दस प्वाइंट आगे दिखाया जा रहा है और चेंज रिसर्च पोल दिस वीक के अनुसार बिडेन के जीतने के 41-48 फीसदी उम्मीद है। डोनाल्ड ट्रंप के कैंपेन क्म्यूनिकेशन डायरेक्टर टिम मुर्ताघ का कहना है कि सब जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए की गई सार्वजनिक पोलिंग साफ तौर पर गलत निकलती है।
टिम के मुताबिक उनके आंतरिक आंकड़े लगातार डोनाल्ड ट्रंप की बिडेन के खिलाफ जीत दिखा रहे हैं। मैनमाउथ जैसे कई निजी सर्वे जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद जारी किए गए हैं। मैनमाउथ यूनिवर्सिटी के निदेशक पैट्रिक मुर्रे का कहना है कि जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद डोनाल्ड ट्रंप के हारने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ गई हैं।
मुर्रे का कहना है कि अमेरिका में कई मतदाताओं को लगता है कि जॉर्ज फ्लॉयड वाले मामले में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में कमी रही लेकिन चुनाव जीतने की रेस पदाधिकारियों पर होने वाले जनमत संग्रह पर निर्भर करता है। बिडेन मार्च से ऑनलाइन तरीके से अपना कैंपेन कर रहे हैं।
अमेरिका में अबतक कोरोना से 1,07,000 लोग मारे जा चुके हैं। इसके अलावा हाल ही में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद भी कई लोगों में ट्रंप के खिलाफ गुस्सा है। डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए काफी गुस्सैल तरीकों को अपनाया। एक अनुमान की माने तो अमेरिका में 64 फीसदी ऐसे लोग हैं जो प्रदर्शनकारियों के समर्थन में थे जबकि 27 फीसदी ही लोग विरोध कर रहे थे।