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Joe Biden: बाइडन ने विदेश नीति पर की अंतिम वार्ता, रूस-यूक्रेन मुद्दे पर अमेरिकी योगदान पर डाला प्रकाश

Tue, 14 Jan 2025 07:31 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 14 Jan 2025 07:31 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को अपने कार्यकाल के दौरान विदेश नीति पर अंतिम बार संबोधित किया इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में दो प्राथमिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में काम किया गया। इसमें पहला यूक्रेन के लिए वैश्विक समर्थन जुटाना और दूसरा परमाणु शक्तियों के बीच संघर्ष को रोकने को बताया। 

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Joe Biden held talks on foreign policy for the last time during his tenure reflects on defending Ukraine
जो बाइडन - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद के लिए शपथ ग्रहण करने वाले है। इसके बाद वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, जिसको लेकर बाइडन ने सोमवार को विदेश नीति पर अंतिम बार संहोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने कार्याकाल में विदेशों में अमेरिकी भागेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में दो प्राथमिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में काम किया गया। इसमें पहला यूक्रेन के लिए वैश्विक समर्थन जुटाना और दूसरा परमाणु शक्तियों के बीच संघर्ष को रोकना है। 
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यूक्रेन की स्थिति पर किया बातचीत
बाइडन ने बताया कि उनके प्रशासन ने आने वाले समय के लिए भी यूक्रेन का समर्थन जारी रखने की नींव रखी है, ताकि ट्रंप प्रशासन भी इसे बनाए रखे। बाइडन ने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में अमेरिका की ताकत बढ़ी है, न अमेरिका में बल्कि दुनिया में भी। उनका कहना था कि जब उन्होंने और कमला हैरिस ने पद संभाला, तब से अमेरिका पहले से ज्यादा सक्षम और तैयार है।
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रूस पर दवाब बनाने के लिए किए प्रयास
साथ ही बाइडन का कहना था कि उन्होंने दुनिया भर से यूक्रेन का समर्थन हासिल करने में मदद की, ताकि रूस को दबाव में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण काम यह था कि अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध से बचने के लिए कदम उठाए जाएं, जिससे पूरी दुनिया सुरक्षित रह सके।
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नाटो पर भी की बातचीत
इसके अलावा बाइडन ने नाटो संगठन के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि पहले, नाटो के केवल 9 सदस्य देशों ने अपने GDP का 2% हिस्सा रक्षा पर खर्च किया था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 23 देशों तक पहुंच गई है। इसका मतलब यह है कि नाटो के सदस्य देशों ने अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाया है और अब नाटो संगठन पहले से ज्यादा मजबूत और सक्षम हो गया है। इस तरह से बाइडन ने यह बताया कि उनके प्रशासन ने न केवल अमेरिका की ताकत बढ़ाई, बल्कि उन्होंने दुनिया भर में शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए।
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