Japan midterm elections: जापान में मध्यावधि चुनाव की आहट, जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद भंग हो सकती है संसद
जापानी मीडिया में चर्चा है कि इस वर्ष मई में जी-7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा डियेट भंग करने की सिफारिश कर देंगे। जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन जापान के हिरोशिमा में होने वाला है...
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जापान में सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) में संसद के निचले सदन डियेट का मध्यावधि चुनाव कराने पर गंभीरता से विचार शुरू हो गया है। रविवार को देश में आए पांच उप चुनाव नतीजों में पार्टी को बड़ी सफलता मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व ने तुरंत से फिर से जनादेश हासिल करने पर विचार शुरू कर दिया। रविवार को पांच सीटों के उप चुनाव नतीजे आए, जिनमें से चार में एलडीपी को जीत मिली।
जापानी मीडिया में चर्चा है कि इस वर्ष मई में जी-7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा डियेट भंग करने की सिफारिश कर देंगे। जी-7 देशों का शिखर सम्मेलन जापान के हिरोशिमा में होने वाला है। फिलहाल डियेट का सत्र चल रहा है, जो 21 जून तक चलेगा। लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसी सत्र के दौरान सदन के भंग होने की ज्यादा संभावना है।
पिछले साल के आखिर में किशिदा की एप्रूवल रेटिंग (उनके काम से संतुष्ट लोगों की संख्या) काफी गिर गई थी। तब सिर्फ 35 फीसदी लोग उनके काम से संतुष्टि जता रहे थे। लेकिन मार्च में एप्रूवल रेटिंग 48 फीसदी हो गई। समझा जाता है कि किशिदा की यूक्रेन यात्रा को देश में काफी पसंद किया गया, जिसका सियासी लाभ प्रधानमंत्री को मिला है। इसके अलावा देश में जन्म दर बढ़ाने के लिए उनकी सरकार ने जो ठोस उपाय किए हैं, उन्हें भी देश में काफी पसंद किया गया है। जापान में आबादी घटने की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है।
कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि हालांकि अगर उप चुनाव में जीती गई सीटों की संख्या से एलडीपी को बड़ी सफलता मिलने का संकेत मिलता है, लेकिन अगर नतीजों पर बारीक नजर डाली जाए, तो साफ होता है कि जीतने के लिए एलडीपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी। दो सीटों पर जीत का अंतर बहुत कम रहा।
उप चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद एलडीपी के महासचिव तोशिमित्सु मोतेगी ने टीवी चैनल एनएचके से कहा- ‘ओसाका और कुछ दूसरी जगहों पर ये उप चुनाव स्थानीय चुनावों के साथ हुए। इनमें हमें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। अब हमें अपने संगठन को मजबूत करना होगा और अपनी चुनाव तैयारियों की गंभीरता से समीक्षा करनी होगी।’ मध्यावधि चुनाव की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा- ‘हमें समस्याओं का मुकाबला कर और अच्छे नतीजे देकर जन अपेक्षाओं का सामना करना ही होगा।’
प्रधानमंत्री किशिदा ने मध्यावधि चुनाव कराने के बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे इस बारे में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा- ‘हम अपनी ठोस नीतियों को आगे बढ़ाएंगे और अच्छे नतीजे देंगे। हमारे सामने फिलहाल यही काम है।’ पर्यवेक्षकों का कहना है कि किशिदा फिलहाल मध्यावधि चुनाव के विकल्प को खुला रखना चाहते हैं। अगर उन्हें स्थितियां अनुकूल महसूस नहीं हुईं, तो मुमकिन है कि चुनाव कराने के लिए वे अगले साल के आरंभ तक इंतजार करें।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक किशिदा की नजर अगले साल होने वाले एलडीपी अध्यक्ष पद के चुनाव पर भी है। अगर वे उससे पहले चुनाव करवा कर पार्टी को विजयी बना देते हैं, तो उनके अध्यक्ष बनने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।