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जापान ने जी-7 बैठक में चीन की डिजिटल करेंसी के मुद्दे पर विचार करने की उठाई मांग, चीनी इरादों पर उठ रहे सवाल

Wed, 10 Feb 2021 06:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 10 Feb 2021 06:54 PM IST
सार

चीन ने बोलचाल में अपनी डिजिटल करेंसी का नाम ई-युवान रखा है। चीन के नव वर्ष पर हो रही छुट्टियों के मौके पर उसने चार करोड़ युवान जारी करने का एलान किया है। इन्हें बीजिंग और सुझाऊ शहरों के लिए जारी किया जाएगा...

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Japan demands to consider the issue of Chinese digital currency at the G7 meeting
China Yuan - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जापान ने मांग उठाई है कि धनी देशों का समूह जी-7 चीन की डिजिटल करेंसी के मसले को हल करे। जी-7 के वित्त मंत्रियों की वर्चुअल बैठक शुक्रवार को होगी। 2021 में जी-7 की यह पहली बैठक है। इस बीच चीनी डिजिटल करेंसी का मसला दुनिया भर में चर्चित हो गया है। जी-7 के साथ चीन के डिजिटल करेंसी जारी करने के इरादे को लेकर चिंतित हैं। माना जा रहा है कि इससे दुनियाभर में जो वित्तीय व्यवस्था दशकों से चल रही है, उसके लिए खतरा पैदा हो सकता है।

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जापान के वित्त मंत्री तारो असो ने कहा है कि जी-7 के वित्तीय प्रमुखों को डिजिटल करेंसी के मसले पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा- इसके पहले कि विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी जारी करें, इस मुद्दे पर नीति तय कर लेना जरूरी है। जी-7 के दूसरे देश भी डिजिटल करेंसी के मामले में चीन के आगे निकल जाने के लेकर चिंतित हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना डिजिटल करेंसी का परीक्षण शुरू कर चुका है। चीन के कुछ क्षेत्रों में इसके जरिए लेन-देन का काम चल रहा है।
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जी-7 की अध्यक्षता इस साल ब्रिटेन के पास है। अमेरिका में सरकार बदलने के बाद यह जी-7 की पहली बैठक है। अमेरिका में जेनेट येलेन नई वित्त मंत्री बनी हैं। उनके इस पद पर आने के बाद पहली बार जी-7 के वित्त मंत्रियों की बैठक होने जा रही है। जी-7 में अमेरिका और ब्रिटेन के अलावा कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। शुक्रवार की बैठक में मुख्य एजेंडा कोरोना वायरस महामारी के कारण विश्व अर्थव्यवस्था को पहुंची क्षति है। जी-7 के वित्त मंत्री कोरोना वायरस महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से दुनिया को निकालने के उपायों पर विचार करेंगे। इसके अलावा दुनिया भर में कारोबार करने वाली तकनीक कंपनियों पर टैक्स लगाने की नई व्यवस्था खड़ी करने के बारे में भी विचार-विमर्श होगा। जापान के मांग उठाने के बाद अब संभावना है कि डिजिटल करेंसी का मामला भी इसमें उठ सकता है।
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चीन ने बोलचाल में अपनी डिजिटल करेंसी का नाम ई-युवान रखा है। चीन के नव वर्ष पर हो रही छुट्टियों के मौके पर उसने चार करोड़ युवान जारी करने का एलान किया है। इन्हें बीजिंग और सुझाऊ शहरों के लिए जारी किया जाएगा। इसमें से एक करोड़ युवान का वितरण लकी ड्रॉ के जरिए होगा। 200 युवान के रेड पैकेट लकी ड्रॉ के जरिए लोगों को दिए जाएंगे। ये जानकारी चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली ने सोमवार को दी थी।

लकी ड्रॉ से मिली मुद्रा को 17 फरवरी तक खर्च करना होगा। इस करेंसी के जरिए कुछ चुने हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स से खरीदारी की जा सकेगी। इस करेंसी को कपड़ा, जूते, सिनेमा, होटल और अन्य क्षेत्रों में खर्च करने की सुविधा दी गई है। रेड पैकेज के रूप में चीन ने कुल एक करोड़ युवान वितरित करने का फैसला किया है।

इसके पहले जनवरी में बीजिंग, शंघाई और ग्वांगदोंग प्रांतों में डिजिटल करेंसी का परीक्षण किया जा चुका है। ये तीनों चीन के सबसे धनी प्रांत हैं। ई-युवान का आधिकारिक नाम डिजिटल करेंसी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट (डीसीईपी) रखा गया है। इसे चीन का सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना जारी करेगा और मुद्रा में निहित मूल्य की गारंटी देगा।

डीसीईपी के परीक्षण शियोनगान, चेंगदू और अन्य दूसरे स्थलों पर भी किए गए हैं, जो 2022 में विंटर ओलिंपिक्स की मेजबानी करेंगे। इससे अनुमान लगाया गया है कि चीन विंटर ओलिंपिक्स तक अपनी डिजिटल मुद्रा को पूरी तरह जारी कर देगा। हालांकि पीपुल्स बैंक ने अभी यही कहा है कि ई-युवान को आधिकारिक रूप से शुरू करने की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।


खबरों के मुताबिक दुनिया के तकरीबन 20 देशों में डिजिटल करेंसी शुरू करने की संभावना पर या तो विचार हो रहा है, या फिर उनका परीक्षण शुरू हो गया है। इन देशों में स्वीडन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और कंबोडिया शामिल हैं। इसीलिए जी-7 के देश इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं, इसे देखने पर दुनिया भर की निगाहें टिकी होंगी।

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