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China-Japan Row: ताइवान को लेकर जापान-चीन में तीखी जुबानी जंग, जापानी प्रधानमंत्री के बयान पर भड़का ड्रैगन

Mon, 10 Nov 2025 08:24 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो / बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो / बीजिंग Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 10 Nov 2025 08:24 PM IST
सार

जापान और चीन के रिश्तों में आने वाले दिनों में कड़वाहट बढ़ सकती है। वहीं जापानी पीएम ताकाइची के बयान और उस पर चीनी अधिकारी की धमकी ने स्थिति को भड़का दिया है। ताइवान के मुद्दे पर दोनों देशों की स्थिति अब खुलकर आमने-सामने है, एक 'सुरक्षा खतरे' की बात कर रहा है, तो दूसरा 'संप्रभुता पर हमला' मान रहा है।

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Japan, China exchange barbs after PM Takaichi remarks over Taiwan; embroil in major diplomatic row over Taiwan
ताइवान को लेकर जापान-चीन में तीखी जुबानी जंग - फोटो : ANI

विस्तार

ताइवान को लेकर जापान और चीन के बीच सोमवार को कड़ा राजनयिक विवाद छिड़ गया। मामला तब शुरू हुआ जब जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो वह जापान के लिए 'अस्तित्व को खतरे में डालने वाली स्थिति' होगी, जिसमें जापान को आत्मरक्षा के लिए सैन्य बल का प्रयोग करना पड़ सकता है। यह बयान चीन को बेहद नागवार गुजरा। बीजिंग ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए सख्त आपत्ति दर्ज कराई।
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चीनी अधिकारी की धमकी भरी पोस्ट
विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब ओसाका में चीन के कौंसुल जनरल शुए जियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद आपत्तिजनक पोस्ट डाली। उन्होंने लिखा, 'जो गंदा गला हमारी ओर झपटा है, उसे बिना झिझक काट देना ही एकमात्र विकल्प है। क्या आप तैयार हैं?' यह पोस्ट ताकाइची के ताइवान संबंधी बयान के संदर्भ में थी। बाद में इसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था।
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जापान की कड़ी प्रतिक्रिया
जापान सरकार ने तुरंत चीन से कड़ा विरोध दर्ज कराया। मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा, 'भले ही पोस्ट का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह टिप्पणी बेहद अनुचित और अस्वीकार्य है।' उन्होंने बताया कि जापान के विदेश मंत्रालय ने चीन को औपचारिक रूप से विरोध पत्र सौंपा और पोस्ट हटाने की मांग की।
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चीन का बचाव: 'यह निजी पोस्ट थी'
बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि शुए जियान की पोस्ट एक 'निजी टिप्पणी' थी, जो 'जापानी प्रधानमंत्री के खतरनाक और गलत बयानों' पर की गई थी। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, 'कुछ जापानी राजनेता ताइवान को चीन से अलग करने की कोशिश कर रहे हैं। वे जनता को भ्रमित कर रहे हैं और मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं।' लिन ने आगे कहा कि चीन ने ताकाइची के बयान पर जापान से 'औपचारिक और सख्त शिकायत' दर्ज कराई है। उन्होंने पूछा, 'क्या जापान चीन के मूल हितों को चुनौती देना चाहता है? क्या वह चीन-जापान संबंधों को गलत दिशा में ले जाना चाहता है?'

क्या है विवाद की जड़?
शुक्रवार को संसद में ताकाइची से पूछा गया था कि किन परिस्थितियों में जापान 'अस्तित्व को खतरे में डालने वाली स्थिति' घोषित कर सकता है। इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'अगर चीन ताइवान की नाकेबंदी करता है या अमेरिकी सेनाओं को आने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह स्थिति हमारे अस्तित्व के लिए खतरा मानी जा सकती है।' इस बयान को उनके पूर्ववर्तियों के रुख से काफी अलग और आक्रामक माना गया। विवाद बढ़ने के बाद ताकाइची ने सफाई दी कि उन्होंने 'सरकारी नीति की सीमा के भीतर ही बात की थी।'

हालिया मुलाकात के बावजूद तनाव
कुछ ही दिन पहले, सियोल में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) सम्मेलन के दौरान ताकाइची और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी, जो दिखने में सौहार्दपूर्ण रही थी। लेकिन उसी सम्मेलन में ताकाइची ने ताइवान के प्रतिनिधि से भी अलग मुलाकात की, जिसने चीन को नाराज कर दिया।


ताइवान और जापान-चीन रिश्ते
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे मिलाने के लिए बल प्रयोग से इंकार नहीं करता। वहीं, जापान का मानना है कि ताइवान पर संकट उसके अपने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि ताइवान समुद्री रास्तों और अमेरिकी सैन्य सहयोग के लिहाज से जापान के करीब है। दोनों देशों के बीच सालाना 300 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार होता है, लेकिन ताइवान, ऐतिहासिक मुद्दों और क्षेत्रीय विवादों को लेकर उनके रिश्ते अक्सर तनाव में रहते हैं।
 
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