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जम्मू-कश्मीर : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बैठक आज, बंद कमरे में होगी चर्चा
Fri, 16 Aug 2019 01:07 AM IST
योगेश साहू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश साहू
Updated Fri, 16 Aug 2019 01:07 AM IST
सार
- पाकिस्तान के खास मित्र देश चीन के आग्रह पर होने जा रही है बैठक
- चीन ने बैठक के लिए आधिकारिक तौर पर पोलैंड को खत लिखा है
- इसकी वजह यह है कि पोलैंड अगस्त महीने में काउंसिल का चेयरमैन है
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फाइल फोटो ( संयुक्त राष्ट्र परिषद की बैठक)
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने, अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से आपत्ति उठाए जाने के बाद शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। संयुक्त राष्ट्र परिषद यह बैठक पाकिस्तान के खास मित्र देश चीन के कहने पर करने जा रही है। राजनयिकों के अनुसार यह बैठक सुबह बंद कमरे में की जाएगी। बता दें कि एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यूएन को पत्र लिखकर कश्मीर मुद्दे पर आपात बैठक बुलाने की गुहार लगाई थी।
राजनयिकों ने बताया कि सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष पोलैंड ने इस मुद्दे को चर्चा के लिए सुबह 10 बजे (1400 जीएमटी) सूचीबद्ध किया है। वैसे ऐसा बहुत ही कम हुआ है जब सुरक्षा परिषद ने कश्मीर पर चर्चा की गई हो। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले इस मसले पर सुरक्षा परिषद की पूर्ण बैठक 1965 में हुई थी।
राजनयिकों ने बताया कि शुक्रवार को होने वाली चर्चा को सुरक्षा परिषद की पूर्ण बैठक नहीं माना जा रहा है। इसे बंद कमरे में होने वाली बैठक कहा जा रहा है जो अब बहुत सामान्य होता जा रहा है।
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भारत के जम्मू कश्मीर पर लिए फैसले के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने लगातार भारत के फैसले का विरोध किया और अपने चीनी दोस्त से इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का आग्रह किया था। इस पर चीन ने जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान की शिकायतों को सुने जाने की मांग संयुक्त राष्ट्र परिषद से की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन की ओर से आधिकारिक तौर पर पोलैंड को खत लिखा गया है। बता दें खत पोलैंड को इसलिए लिखा गया है क्योंकि वह अगस्त महीने का काउंसिल चेयरमैन है। यही कारण है कि बैठक बुलाने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी है।
इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी का कहना है कि चीन की इस मांग पर बात हो रही है। इससे पहले चीन की तरफ से इस मसले पर भारत-पाकिस्तान को शांति बरतने की बात कही गई थी। इस मुद्दे पर बीते दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी थी। साथ ही उन्होंने चीन जाकर वहां के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। पाकिस्तान का आरोप था कि भारत के द्वारा लिया गया फैसला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है।
हालांकि पाकिस्तान ने इस मसले को कई देशों के सामने उठाया लेकिन हर किसी ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है। साथ ही पाकिस्तान से द्विपक्षीय तौर पर काम करने को कहा। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मसले को भारत का आंतरिक मसला बताया था।
गौरतलब है कि सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसे दो भागों में विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। वहीं एक अन्य केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को बनाया गया है।
भारत-पाक के बीच मोदी सबसे बड़ा रोड़ा : शाह महमूद
वहीं, पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए उन्हें भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा रोड़ा बताया। कुरैशी ने कहा कि मोदी ने चुनाव जीतने के लिए कश्मीर को दांव पर लगा दिया। फरवरी में चुनाव जीतने के लिए मोदी ने खूब तनाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर बातचीत से भारत असहज है और बैठक का विरोध कर रहा है।
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राजनयिकों ने बताया कि सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष पोलैंड ने इस मुद्दे को चर्चा के लिए सुबह 10 बजे (1400 जीएमटी) सूचीबद्ध किया है। वैसे ऐसा बहुत ही कम हुआ है जब सुरक्षा परिषद ने कश्मीर पर चर्चा की गई हो। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले इस मसले पर सुरक्षा परिषद की पूर्ण बैठक 1965 में हुई थी।
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राजनयिकों ने बताया कि शुक्रवार को होने वाली चर्चा को सुरक्षा परिषद की पूर्ण बैठक नहीं माना जा रहा है। इसे बंद कमरे में होने वाली बैठक कहा जा रहा है जो अब बहुत सामान्य होता जा रहा है।
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भारत के जम्मू कश्मीर पर लिए फैसले के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने लगातार भारत के फैसले का विरोध किया और अपने चीनी दोस्त से इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का आग्रह किया था। इस पर चीन ने जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान की शिकायतों को सुने जाने की मांग संयुक्त राष्ट्र परिषद से की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन की ओर से आधिकारिक तौर पर पोलैंड को खत लिखा गया है। बता दें खत पोलैंड को इसलिए लिखा गया है क्योंकि वह अगस्त महीने का काउंसिल चेयरमैन है। यही कारण है कि बैठक बुलाने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी है।
इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी का कहना है कि चीन की इस मांग पर बात हो रही है। इससे पहले चीन की तरफ से इस मसले पर भारत-पाकिस्तान को शांति बरतने की बात कही गई थी। इस मुद्दे पर बीते दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी थी। साथ ही उन्होंने चीन जाकर वहां के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी। पाकिस्तान का आरोप था कि भारत के द्वारा लिया गया फैसला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है।
हालांकि पाकिस्तान ने इस मसले को कई देशों के सामने उठाया लेकिन हर किसी ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है। साथ ही पाकिस्तान से द्विपक्षीय तौर पर काम करने को कहा। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मसले को भारत का आंतरिक मसला बताया था।
गौरतलब है कि सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसे दो भागों में विभाजित कर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। वहीं एक अन्य केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को बनाया गया है।
भारत-पाक के बीच मोदी सबसे बड़ा रोड़ा : शाह महमूद
वहीं, पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए उन्हें भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा रोड़ा बताया। कुरैशी ने कहा कि मोदी ने चुनाव जीतने के लिए कश्मीर को दांव पर लगा दिया। फरवरी में चुनाव जीतने के लिए मोदी ने खूब तनाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर बातचीत से भारत असहज है और बैठक का विरोध कर रहा है।