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Forest Fires In Indonesia: इंडोनेशिया के जंगलों में आग लगाने के आरोप में 44 लोग गिरफ्तार, सरकार का सख्त एक्शन
Wed, 23 Jul 2025 07:19 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 23 Jul 2025 07:19 PM IST
सार
Forest Fires In Indonesia: इंडोनेशिया में जंगलों में लगने वाली आग अब केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि मानव जीवन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी बड़ी समस्या बन चुकी है। सरकार की ओर से की जा रही सख्त कार्रवाई और कृत्रिम बारिश जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
इंडोनेशियाई पुलिस ने जंगलों और पीटलैंड (नमी वाली भूमि) में आग लगाने के आरोप में 44 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आगजनी की घटनाओं के कारण वातावरण में जहरीला धुआं फैल रहा है, जिससे देश और पड़ोसी देशों में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (बीएनपीबी) के प्रमुख सुहरयांतो ने बुधवार को बताया कि ये आग केवल सूखे की वजह से नहीं, बल्कि लोगों की तरफ से जानबूझकर लगाई गई है। उन्होंने कहा, 'आशा है कि इन गिरफ्तारियों से लोगों को सबक मिलेगा और वे जमीन साफ करने के लिए आग लगाना बंद करेंगे।'
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आरोपियों को हो सकती है 10 साल की सजा
इन 44 आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। सभी को मंगलवार को रियाउ प्रांत की राजधानी पेकनबारू में मीडिया के सामने पेश किया गया। सभी को हथकड़ी पहनाई गई थी और वे नारंगी जेल की वर्दी में थे। सुहरयांतो ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत मुकदमा चलेगा, जिसमें अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। यह पहली बार नहीं है जब आगजनी के मामलों में लोगों को पकड़ा गया है। 2019 में भी पुलिस ने जंगल की आग से जुड़े 230 लोगों को गिरफ्तार किया था।
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सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके
रियाउ प्रांत के रोकन हिलिर और रोकन हुलु जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां करीब 500 हेक्टेयर (1,235 एकड़) जंगल जल चुके हैं। घना धुआं इतना फैल गया है कि दृश्यता एक किलोमीटर से भी कम रह गई है। वहीं, सरकार ने आग बुझाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। मंगलवार से रियाउ प्रांत में बादलों पर नमक डालकर कृत्रिम बारिश कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो 25 जुलाई तक जारी रहेगी। सुहरयांतो ने आम लोगों से अपील की है कि वे आग लगाने वालों की जानकारी सरकार को दें और इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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आग लगने से अंतरराष्ट्रीय विवाद
हर साल सूखे के मौसम में सुमात्रा और बोर्नियो द्वीपों पर जंगलों में आग लगती है, जिसका धुआं सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड तक फैलता है। 2023 में इंडोनेशिया ने यह दावा किया था कि मलेशिया में फैला धुआं उसकी वजह से नहीं है, हालांकि अतीत में वह कई बार माफी मांग चुका है।
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आरोपियों को हो सकती है 10 साल की सजा
इन 44 आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। सभी को मंगलवार को रियाउ प्रांत की राजधानी पेकनबारू में मीडिया के सामने पेश किया गया। सभी को हथकड़ी पहनाई गई थी और वे नारंगी जेल की वर्दी में थे। सुहरयांतो ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत मुकदमा चलेगा, जिसमें अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। यह पहली बार नहीं है जब आगजनी के मामलों में लोगों को पकड़ा गया है। 2019 में भी पुलिस ने जंगल की आग से जुड़े 230 लोगों को गिरफ्तार किया था।
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सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके
रियाउ प्रांत के रोकन हिलिर और रोकन हुलु जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां करीब 500 हेक्टेयर (1,235 एकड़) जंगल जल चुके हैं। घना धुआं इतना फैल गया है कि दृश्यता एक किलोमीटर से भी कम रह गई है। वहीं, सरकार ने आग बुझाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। मंगलवार से रियाउ प्रांत में बादलों पर नमक डालकर कृत्रिम बारिश कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो 25 जुलाई तक जारी रहेगी। सुहरयांतो ने आम लोगों से अपील की है कि वे आग लगाने वालों की जानकारी सरकार को दें और इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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आग लगने से अंतरराष्ट्रीय विवाद
हर साल सूखे के मौसम में सुमात्रा और बोर्नियो द्वीपों पर जंगलों में आग लगती है, जिसका धुआं सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड तक फैलता है। 2023 में इंडोनेशिया ने यह दावा किया था कि मलेशिया में फैला धुआं उसकी वजह से नहीं है, हालांकि अतीत में वह कई बार माफी मांग चुका है।