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Russia: बिजली उत्पादन को लेकर भारत-रूस के बीच समझौता, जानिए मॉस्को में भारतीय समुदाय से क्या बोले जयशंकर
Tue, 26 Dec 2023 10:16 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला,मॉस्को
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला,मॉस्को
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Tue, 26 Dec 2023 10:16 PM IST
सार
रूस दौर पर पहुंचे जयशंकर ने कहा कि तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की बिजली उत्पादन इकाईयों के निर्माण से जुड़े कुछ जरूरी समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर
- फोटो : ANI
विस्तार
तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में भविष्य की बिजली उत्पादन इकाइयों के निर्माण को लेकर भारत और रूस ने मंगलवार को समझौतों पर हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग पर उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ व्यापक और सार्थक बैठक के बाद यह घोषणा की। इस दौरान परमाणु ऊर्जा और दवाओं, फार्मास्युटिकल पदार्थों और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्रों में समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
विदेश मंत्री जयशंकर रूस के पांच दिन के दौरे पर हैं। मॉस्को में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, आज मेरी और उप प्रधानमंत्री मंटुरोव की उपस्थिति में, हमने कुडनकुलम परमाणु परियोजना की भविष्य की इकाइयों से संबंधित कुछ बहुत महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस की तकनीकी सहायता से तमिलनाडु में बनाया जा रहा है। इसका निर्माण मार्च 2002 में शुरू हुआ था। फरवरी 2016 से, कुडनकुलम एनपीपी की पहली बिजली इकाई 1,000 मेगावाट की अपनी डिजाइन क्षमता पर लगातार काम कर रही है। रूस के सरकारी मीडिया के मुताबिक, संयंत्र के 2027 तक पूरी क्षमता से काम शुरू कर देने की उम्मीद है।
बैठक के दौरान, जयशंकर ने व्यापार, वित्त, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और परमाणु के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति पर गौर किया। बैठक से पूर्व उन्होंने रूसी रणनीतिक समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों संग बातचीत में कहा, भू-राजनीतिक और रणनीतिक आधार भारत-रूस संबंधों को हमेशा सकारात्मक पथ पर बनाए रखेंगे।
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रूस भारत का विशेष साथी
भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष जैसे कुछ क्षेत्रों में रूस को भारत का विशेष साथी बताया। उन्होंने कहा, उच्च भरोसेमंद देशों के साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाता है। दोनों देश इस पर भी सहमत हुए हैं कि भारत व यूरेशियाई आर्थिक क्षेत्र के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू करने के लिए जनवरी के अंत तक वार्ताकार टीमें मिलेंगी।
भुगतान समस्या हल करने पर जोर
रूस और भारत के बीच भुगतान की समस्या से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने कहा कि एक असामान्य स्थिति में, हम ऐसे तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं जिससे बैंक एक-दूसरे के साथ लेनदेन कर सकें। वह बुधवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिलेंगे। उनके बीच द्विपक्षीय, बहुपक्षीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। विदेश मंत्री ने रूस के साथ संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद जताई।
रूस-भारत के संबंध प्रगाढ़- जयशंकर
इससे पहले एक अन्य कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा कि भू-राजनीति और रणनीतिक रूप से एक दूसरे पर निर्भरता की वजह से भारत और रूस के संबंध हमेशा मजबूत बने रहेंगे। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में लिखा था कि वह रूसी नेताओं के साथ दोनों देशों में कनेक्टिविटी बढ़ाने, क्षेत्रीय संघर्ष आदि मुद्दों पर बात करेंगे।
यूक्रेन युद्ध के दौरान भी रूस की आलोचना से भारत ने किया परहेज
बता दें कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दुनियाभर में रूस के इस कदम की आलोचना हुई लेकिन भारत ने भारी दबाव के बावजूद अपने पुराने मित्र देश की आलोचना नहीं की। हालांकि भारत ने साफ किया कि वह युद्ध के खिलाफ है लेकिन खुले तौर पर रूस की आलोचना करने से भारतीय नेतृत्व ने परहेज किया और कहा कि कूटनीति और बातचीत से विवाद का हल होना चाहिए। यूक्रेन से युद्ध के बाद भारत ने रूस के बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया है।
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विदेश मंत्री जयशंकर रूस के पांच दिन के दौरे पर हैं। मॉस्को में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, आज मेरी और उप प्रधानमंत्री मंटुरोव की उपस्थिति में, हमने कुडनकुलम परमाणु परियोजना की भविष्य की इकाइयों से संबंधित कुछ बहुत महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस की तकनीकी सहायता से तमिलनाडु में बनाया जा रहा है। इसका निर्माण मार्च 2002 में शुरू हुआ था। फरवरी 2016 से, कुडनकुलम एनपीपी की पहली बिजली इकाई 1,000 मेगावाट की अपनी डिजाइन क्षमता पर लगातार काम कर रही है। रूस के सरकारी मीडिया के मुताबिक, संयंत्र के 2027 तक पूरी क्षमता से काम शुरू कर देने की उम्मीद है।
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बैठक के दौरान, जयशंकर ने व्यापार, वित्त, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, नागरिक उड्डयन और परमाणु के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति पर गौर किया। बैठक से पूर्व उन्होंने रूसी रणनीतिक समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों संग बातचीत में कहा, भू-राजनीतिक और रणनीतिक आधार भारत-रूस संबंधों को हमेशा सकारात्मक पथ पर बनाए रखेंगे।
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#WATCH | On India-Russia relations, EAM Dr S Jaishankar during interaction with the Indian community in Moscow says, "Russia is a special partner in a few areas- defence, nuclear energy. Today, we signed some important agreements pertaining to future units of the Kudankulam… pic.twitter.com/Rx6iqpTG8o
— ANI (@ANI) December 26, 2023
रूस भारत का विशेष साथी
भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष जैसे कुछ क्षेत्रों में रूस को भारत का विशेष साथी बताया। उन्होंने कहा, उच्च भरोसेमंद देशों के साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाता है। दोनों देश इस पर भी सहमत हुए हैं कि भारत व यूरेशियाई आर्थिक क्षेत्र के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू करने के लिए जनवरी के अंत तक वार्ताकार टीमें मिलेंगी।
भुगतान समस्या हल करने पर जोर
रूस और भारत के बीच भुगतान की समस्या से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने कहा कि एक असामान्य स्थिति में, हम ऐसे तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं जिससे बैंक एक-दूसरे के साथ लेनदेन कर सकें। वह बुधवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिलेंगे। उनके बीच द्विपक्षीय, बहुपक्षीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। विदेश मंत्री ने रूस के साथ संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद जताई।
रूस-भारत के संबंध प्रगाढ़- जयशंकर
इससे पहले एक अन्य कार्यक्रम के दौरान जयशंकर ने कहा कि भू-राजनीति और रणनीतिक रूप से एक दूसरे पर निर्भरता की वजह से भारत और रूस के संबंध हमेशा मजबूत बने रहेंगे। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में लिखा था कि वह रूसी नेताओं के साथ दोनों देशों में कनेक्टिविटी बढ़ाने, क्षेत्रीय संघर्ष आदि मुद्दों पर बात करेंगे।
यूक्रेन युद्ध के दौरान भी रूस की आलोचना से भारत ने किया परहेज
बता दें कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद दुनियाभर में रूस के इस कदम की आलोचना हुई लेकिन भारत ने भारी दबाव के बावजूद अपने पुराने मित्र देश की आलोचना नहीं की। हालांकि भारत ने साफ किया कि वह युद्ध के खिलाफ है लेकिन खुले तौर पर रूस की आलोचना करने से भारतीय नेतृत्व ने परहेज किया और कहा कि कूटनीति और बातचीत से विवाद का हल होना चाहिए। यूक्रेन से युद्ध के बाद भारत ने रूस के बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया है।