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UK: जयशंकर ने चोरी हुई मूर्तियों के स्वदेश वापसी समारोह की अध्यक्षता की, 1970 के दशक में ले जाई गई थीं ब्रिटेन
Thu, 16 Nov 2023 08:16 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 16 Nov 2023 08:16 AM IST
सार
सन् 1970 और 1980 के दशक के बीच उत्तर प्रदेश के लोखरी में एक मंदिर से योगिनी चामुंडा और योगिनी गोमुखी मूर्तियां चोरी हो गई थी। इन मूर्तियों को लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट और आर्ट रिकवरी इंटरनेशनल के सहयोग से खोज निकाला।
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जयशंकर ने चोरी हुई मूर्तियों के स्वदेश वापसी समारोह की अध्यक्षता की
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को लंदन में भारत से चुराई गई और हाल ही में इंग्लैंड में खोजी गई आठवीं शताब्दी की दो मूर्तियों की स्वदेश वापसी समारोह की अध्यक्षता की।
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1970 के दशक में हुई थी चोरी
बता दें, सन् 1970 और 1980 के दशक के बीच उत्तर प्रदेश के लोखरी में एक मंदिर से योगिनी चामुंडा और योगिनी गोमुखी मूर्तियां चोरी हो गई थी। इन मूर्तियों को लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट और आर्ट रिकवरी इंटरनेशनल के सहयोग से खोज निकाला। माना जाता है कि लोखरी मंदिर में 20 योगिनी मूर्तियां हैं, जिन्हें जानवरों के सिर के साथ सुंदर महिलाओं के रूप में चित्रित किया गया है।
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इस मंदिर से मूर्तियों को 1970 के दशक में लुटेरों ने चुराया था। कहा जाता है कि जिन बदमाशों ने ये काम किया था वे राजस्थान और महाराष्ट्र से बाहर काम करते थे। स्विट्जरलैंड के माध्यम से यूरोप में माल की तस्करी करते थे। इन लुटेरों ने अज्ञात संख्या में मूर्तियों को चुराया था। कई मूर्तियों को तोड़ दिया गया था और बची हुई को बेच दिया गया। साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों ने मूर्तियों को छिपा दिया था।
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भारत ले जाने के लिए उत्साहित
जयशंकर ने ब्रिटेन की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन इंडिया हाउस में मूर्तियों का अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वह मूर्तियों को भारत ले जाने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, 'आज यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हम एक दूसरे की संस्कृति को बढ़ाना चाहते हैं इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान कानूनी, पारदर्शी और नियम-आधारित हो।'
उन्होंने कहा, 'जहां भी कुछ अलग हुआ है और उसे ठीक किया जाता है तो मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है, न केवल इस मामले में बल्कि एक संदेश के रूप में कि यह एक प्रथा है जो आज के समय में स्वीकार्य नहीं है।'
वहीं, आर्ट रिकवरी इंटरनेशनल के क्रिस मैरिनेलो ने कहा, 'यह पांचवीं बार है जब हम मिलान, ब्रसेल्स और लंदन में सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण चीजों को तीन बार भारत को लौटाने में सफल रहे हैं। हम इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के साथ मिलकर काम करते हैं और जब वे इनमें से एक की पहचान करते हैं, तो हम एक सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने के प्रयास में मालिकों के साथ बातचीत करते हैं।'
विरासत को सही जगह पर ले जाना लक्ष्य
लंदन में भारतीय उच्चायोग में व्यापार और अर्थशास्त्र के प्रथम सचिव जसप्रीत सिंह सुखीजा भारत की खोई हुई कलाकृतियों को खोज निकालने के लिए काम करने वाले संगठन इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के साथ इन मूर्तियों को वापस भारत ले जाने पर काम कर रहे हैं। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दुरईस्वामी ने कहा, 'इन अवसरों पर हम जो करना चाहते हैं, उसका उद्देश्य कुछ स्वीकार्य और सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना है ताकि हमारी विरासत को सही जगह पर पहुंचा सकें।'