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Israel: इस्राइलियों की हत्या के दोषी फलस्तीनियों को मिलेगी मौत की सजा, इस्राइल की संसद में पास हुआ नया कानून

Tue, 31 Mar 2026 12:36 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: Shubham Kumar Updated Tue, 31 Mar 2026 12:36 AM IST
सार

क्या इस्राइली संसद में पेश किया गया नया कानून पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा देगा? क्या इससे हिंसा रुकेगी या हालात और बिगड़ेंगे? नेसेट द्वारा पास किए गए इस कानून ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कारण है कि अब इस्राइलियों की हत्या के दोषी पाए जाने वाले फलस्तीनियों को फांसी दी जा सकती है। आइए इसके बारे में जानते हैं।

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Israeli parliament approves death penalty for Palestinians convicted of murdering Israelis News In Hindi
बेंजामिन नेतन्याहू, इस्राइली प्रधानमंत्री - फोटो : एक्स@netanyahu

विस्तार

इस्राइल में एक बड़ा और विवादित फैसला सामने आया है। देश की संसद नेसेट ने सोमवार को एक ऐसा कानून पास किया है, जिसमें इस्राइलियों की हत्या के दोषी पाए जाने वाले फलस्तीनियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान रखा गया है। इस कानून के तहत, अगर वेस्ट बैंक के किसी फलस्तीनी को राष्ट्रवादी वजह से हत्या का दोषी पाया जाता है, तो उसे फांसी दी जा सकती है। यानी ऐसे मामलों में मौत की सजा अब मुख्य सजा होगी।

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बता दें कि इस बिल को पास कराने में इस्राइल के दक्षिणपंथी नेताओं की बड़ी भूमिका रही। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद संसद में मौजूद रहे और उन्होंने इस कानून के समर्थन में वोट दिया। हालांकि, यह कानून सिर्फ आगे होने वाले मामलों पर लागू होगा, पुराने मामलों पर नहीं। साथ ही अदालतों के पास यह अधिकार भी रहेगा कि वे चाहें तो उम्रकैद की सजा भी दे सकती हैं, यहां तक कि इस्राइली नागरिकों के मामलों में भी।
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मानवधिकार संगठनों ने फैसले की आलोचना की
गौर करने वाली बात यह है कि जहां एक ओर इस्राइल में इस कानून को लेकर खूब चर्चाएं चल रही है। दूसरी ओर इस फैसले की कई मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून भेदभावपूर्ण, बेहद कठोर (सख्त) है और इससे हिंसा रुकने की संभावना भी कम है। वहीं फलस्तीनी संगठनों ने भी इसे अन्यायपूर्ण बताया है।

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इस्लाइली सुप्रीम कोर्ट जाने का प्रावधान भी
हालांकि मामले में अब माना जा रहा है कि इस कानून को इस्राइल की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कुल मिलाकर, यह कानून इस्राइल-फलस्तीन तनाव को और बढ़ा सकता है और आने वाले समय में इस पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है।

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