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Israeli Palestinian Conflict: फलस्तीन को मान्यता देने की तैयारी में बेल्जियम, इस्राइल ने लगाई कड़ी फटकार

Tue, 02 Sep 2025 05:16 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रुसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रुसेल्स Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 02 Sep 2025 05:16 PM IST
सार

बेल्जियम ने नौ सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में फलस्तीन को मान्यता देने का एलान किया है। हालांकि, इसके लिए इस्राइली बंधकों की रिहाई और हमास को सत्ता से हटाने की शर्त रखी गई है। बेल्जियम ने वेस्ट बैंक से सामान पर बैन और हमास नेताओं व कट्टर इस्राइली मंत्रियों पर रोक लगाने का भी फैसला किया।

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Israeli Palestinian Conflict Belgium takes step toward recognising Palestine state Israel strongly rebukes
बेल्जियम के विदेश मंत्री प्रेवोट - फोटो : X-@prevotmaxime

विस्तार

बेल्जियम ने घोषणा की है कि वह फलस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह एलान बेल्जियम के विदेश मंत्री ने किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला नौ सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में औपचारिक रूप से पेश किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए दो शर्तें रखी गई हैं। गाजा में बंदी बनाए गए सभी इस्राइली नागरिकों की रिहाई और हमास को राजनीतिक सत्ता से हटाना।
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विदेश मंत्री प्रेवोट ने साफ किया कि बिना इन दो शर्तों के यह मान्यता संभव नहीं है। इसका मतलब है कि फिलहाल यह फैसला तुरंत लागू नहीं हो सकेगा। बेल्जियम ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब गाजा पर इस्राइल की सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है और दुनिया के कई देश फलस्तीन को मान्यता देने की प्रक्रिया में हैं। अब तक 140 से ज्यादा देश फलस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र मान चुके हैं, जिनमें दर्जनभर यूरोपीय देश भी शामिल हैं।
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बेल्जियम का बड़ा एलान: बैन और सख्त कदम
प्रेवोट ने मंगलवार को यह भी कहा कि बेल्जियम वेस्ट बैंक में इस्राइली बस्तियों से आने वाले सामान पर बैन लगाएगा। साथ ही हमास नेताओं, हिंसक यहूदी बसने वालों और दो अतिदक्षिणपंथी इस्राइली मंत्रियों को पर्सोना नॉन ग्राटा यानि देश में प्रवेश न करने योग्य घोषित करेगा। प्रेवोट ने कहा कि यह कदम इस्राइली जनता को दंडित करने के लिए नहीं है, बल्कि सरकार पर अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानून का पालन कराने के लिए उठाया गया है।
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यूरोपीय संघ पर भी दबाव बढ़ाने की अपील
प्रेवोट ने यूरोपीय संघ से भी अपील की कि वह इस्राइल पर और दबाव बनाए। उन्होंने कहा कि ईयू को इस्राइल के साथ व्यापार समझौते यानि एसोसिएशन एग्रीमेंट को निलंबित करना चाहिए। गाजा युद्ध ने यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में मतभेद बढ़ा दिए हैं। बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे देशों में यह मसला राजनीतिक गठबंधनों को भी प्रभावित कर रहा है। हालांकि, इस्राइल और यूरोप के बीच सैन्य, व्यापारिक और शैक्षणिक रिश्ते अब भी काफी मजबूत बने हुए हैं।


इस्राइल की नाराजगी और चेतावनी
बेल्जियम की घोषणा पर इस्राइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश हमास के बहकावे में आ रहे हैं और अंततः उन्हें भी आतंकवाद का सामना करना पड़ेगा। उनके अलावा इस्राइल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच भी संभावित प्रतिबंधों की जद में आ सकते हैं। दूसरी ओर, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी फलस्तीन को मान्यता देने की योजना बनाई है, जिससे इस्राइल पर कूटनीतिक दबाव और बढ़ गया है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता समर्थन
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और कुछ यूरोपीय देशों ने भी फलस्तीन को मान्यता देने की इच्छा जताई है, लेकिन वे इसे फलस्तीनी प्राधिकरण के सुधारों पर निर्भर बता रहे हैं। हालांकि, फलस्तीनी प्राधिकरण को अपने ही लोगों के बीच भ्रष्टाचार और कमजोर प्रशासन के कारण भरोसेमंद नहीं माना जाता। इस्राइल का मानना है कि फलस्तीन को मान्यता देना दरअसल हमास को सात अक्टूबर के हमले के बाद इनाम देने जैसा होगा। वहीं, फलस्तीन की मांग है कि वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा मिलकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाए जाएं।

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