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West Asia: इस्राइली फाइटर जेट ने लाल सागर से दागी बैलिस्टिक मिसाइलें; कतर में हमास नेताओं पर हमला, छह की मौत

Wed, 17 Sep 2025 11:10 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 17 Sep 2025 11:10 PM IST
सार

Israel Launched Ballistic Missiles: इस्राइल ने एक बार फिर हमास नेताओं को निशाना बनाया है, इस बार इस्राइली सेना की तरफ से बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है। कतर में किया गया हमला केवल छह लोगों की मौत तक सीमित नहीं है। इस हमले ने गाजा युद्धविराम की कोशिशों को तहस-नहस कर दिया है।

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Israeli fighter jets launched ballistic missiles from Red Sea in Qatar strike, official says
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। इस्राइल ने कतर की राजधानी दोहा में मौजूद हमास नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक बेहद खतरनाक और नए तरीके का इस्तेमाल किया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, 9 सितंबर को इस्राइली लड़ाकू विमान ने लाल सागर के ऊपर से बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस हमले में छह लोगों की मौत हो गई। यह हमला इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि कतर हमास और इस्राइल के बीच युद्धविराम समझौता कराने की कोशिश कर रहा था। लेकिन इस हमले ने न केवल वार्ता को पूरी तरह तोड़ दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र में खौफ और गुस्से को भी बढ़ा दिया। ठीक एक हफ्ते बाद, इस्राइल ने गाजा सिटी पर जमीनी हमला शुरू कर दिया, जिससे हालात और बिगड़ गए।
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क्यों खास है यह हमला?
इस्राइल ने मिसाइलें ऐसे एंगल से दागीं, जिसकी कतर और अमेरिका को उम्मीद नहीं थी। जानकारी के मुताबिक, इस्राइली की तरफ से दागीं गई मिसाइलें अंतरिक्ष तक गईं और कई गुना तेज रफ्तार से नीचे आईं। कतर की एयर डिफेंस सिस्टम में मौजूद पैट्रियट मिसाइल बैटरियां इतनी ऊंचाई पर मार नहीं कर सकतीं, इसलिए उन्हें इंटरसेप्ट नहीं किया जा सका। यह तरीका इसलिए अपनाया गया ताकि इस्राइल को किसी देश के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन न करना पड़े, खासतौर पर सऊदी अरब का, जिससे इस्राइल रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। लंदन में मौजूद रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के मिसाइल विशेषज्ञ सिद्धार्थ कौशल ने कहा, 'मिसाइल दागने से लेकर लक्ष्य तक पहुंचने में बस कुछ ही मिनट लगे होंगे। इतने कम समय में इंटरसेप्ट करना लगभग नामुमकिन है। अगर पैट्रियट सिस्टम ने मिसाइल को पकड़ भी लिया होता, तब भी उसे मार गिराना केवल किस्मत का खेल होता।'
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इस्राइली हमले की गुप्त योजना
अमेरिकी रक्षा अधिकारी के अनुसार, इस्राइली जेट्स ने लगभग 1700 किलोमीटर दूर से हमला किया। करीब 10 विमान मिशन में शामिल थे और 10 मिसाइलें दागी गईं। यह हमला उस समय किया गया जब हमास नेता गाजा युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे। अमेरिका ने दावा किया कि जैसे ही उसे हमले की जानकारी मिली, उसने कतर को चेतावनी दी, लेकिन कतर का कहना है कि चेतावनी मिसाइलें गिरने के बाद ही आई।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर
खाड़ी देशों की एयर डिफेंस आमतौर पर ईरान से आने वाले हमलों या यमन के हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए तैयार रहती है। मिसाइलें पश्चिम से पूर्व की ओर आईं, जिससे कतर और अमेरिका के निगरानी सिस्टम उन्हें पहचान ही नहीं पाए। इस हमले के बाद अन्य खाड़ी देशों को डर है कि भविष्य में उनके शहर भी निशाना बन सकते हैं। खास बात यह है कि यह हमला सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र से होकर नहीं गया, जिससे इस्राइल और सऊदी के संबंध सामान्य करने की संभावनाएं प्रभावित नहीं हुईं।

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मिसाइलों की ताकत और रहस्य
इस्राइल के पास कई प्रकार की एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। इनमें गोल्डन होराइजन और आईएस02 रॉक शामिल हैं। मिसाइल विशेषज्ञों का अनुमान है कि दोहा पर गिराई गई मिसाइल गोल्डन होराइजन या स्पैरो हो सकती है। स्पैरो मिसाइल में विस्फोटक रहित सिरा लगाने का विकल्प होता है। यही वजह हो सकती है कि पास में मौजूद पेट्रोल पंप फटा नहीं, जबकि हमला घातक था। इसकी मारक दूरी 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। विशेषज्ञ जेफ्री लुईस के अनुसार, 'भले ही वॉरहेड विस्फोटक न हो, उसकी टक्कर इतनी जोरदार होती है कि वह सैकड़ों किलो टीएनटी के बराबर विनाश कर सकता है।'

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युद्ध का बदलता स्वरूप
रूस ने यूक्रेन युद्ध में इसी तरह की मिसाइलों का उपयोग किया है, जिससे उसके विमान सुरक्षित रहते हैं। चीन ने हाल ही में अपने विक्ट्री डे परेड में परमाणु क्षमता वाली एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन किया। इस्राइल ने भी जून 2025 में ईरान पर 12 दिन का युद्ध छेड़ा था, जिसमें इसी प्रकार के 'स्टैंडऑफ वेपन्स' का इस्तेमाल हुआ था।

हमले के बाद इन देशों ने साधी चुप्पी
इस्राइल, कतर और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। व्हाइट हाउस ने भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस पर सवाल इस्राइल से पूछे जाएं।
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