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Israel Protests: इस्राइली सरकार के विरोध में अब सेना भी, आखिर किस कानून के खिलाफ सड़कों पर हैं लोग?
Wed, 08 Mar 2023 06:30 AM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 08 Mar 2023 06:30 AM IST
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benjamin netanyahu
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विस्तार
इस्राइल में सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले कानून के खिलाफ विरोध बढ़ता ही जा रहा है। बीते दो महीने से इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। अब देश की सेना के भीतर भी विरोध शुरू हो चुका है। अधिकारियों ने एक बयान में बताया कि सेना में सैकड़ों सैनिकों ने ट्रेनिंग में भाग लेने की अनिच्छा व्यक्त की है। इसके लिए पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं। वहीं, कई सैनिक प्रशिक्षण मिशन से बाहर निकल चुके हैं।इस्राइल में सैन्य अधिकारी विरोध में क्यों उतरे? न्यायिक सुधर क्या हैं जिनका विरोध हो रहा है? सरकार का क्या रुख है? आइये जानते हैं...
इजरायली सेना
- फोटो :
रॉयटर्स
इस्राइल में सैन्य अधिकारी विरोध में क्यों उतरे?
इस्राइली वायु सेना के लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन के लगभग सभी आरक्षित सदस्यों ने रविवार को कहा कि वे इस सप्ताह के अंत में अपने प्रस्तावित प्रशिक्षण सत्रों में भाग नहीं लेंगे। सदस्यों का दावा है कि उन्होंने देश की न्यायपालिका की शक्ति को कम करने की सरकार की योजना के विरोध में ये कदम उठाया है।
वायुसेना के 69वें स्क्वाड्रन में 40 रिजर्वायर में से 37 ने कहा कि वे बुधवार के अभ्यास का बहिष्कार कर रहे हैं। हैमर्स नाम से मशहूर स्क्वाड्रन दक्षिणी इस्राइल में हेट्ज़ेरिम एयरबेस से F-15I फाइटर जेट्स का संचालन करता है। 2007 में, स्क्वाड्रन ने सीरिया के परमाणु रिएक्टर पर हमला किया था। यह ऑपरेशन ऑर्चर्ड के रूप में दुनियाभर में जाना जाता है। इसकी अचूक क्षमताओं के कारण स्क्वाड्रन को 2018 में सम्मानित किया गया था।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सैन्य नेतृत्व को डर है कि सरकार की योजनाओं पर सेना के भीतर बढ़ते गुस्से से इस्राइल की सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता प्रभावित होगी। अधिकारियों ने कहा कि यह वायु सेना के भीतर अशांति के बारे में सबसे अधिक चिंतित है, सरकार की योजनाओं पर रिजर्व ड्यूटी पायलट बहुत ज्यादा परेशान हैं। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें यह भी डर है कि उन्हें अवैध कार्यों में संलिप्त होने के लिए कहा जा सकता है।
इस्राइली वायु सेना के लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन के लगभग सभी आरक्षित सदस्यों ने रविवार को कहा कि वे इस सप्ताह के अंत में अपने प्रस्तावित प्रशिक्षण सत्रों में भाग नहीं लेंगे। सदस्यों का दावा है कि उन्होंने देश की न्यायपालिका की शक्ति को कम करने की सरकार की योजना के विरोध में ये कदम उठाया है।
वायुसेना के 69वें स्क्वाड्रन में 40 रिजर्वायर में से 37 ने कहा कि वे बुधवार के अभ्यास का बहिष्कार कर रहे हैं। हैमर्स नाम से मशहूर स्क्वाड्रन दक्षिणी इस्राइल में हेट्ज़ेरिम एयरबेस से F-15I फाइटर जेट्स का संचालन करता है। 2007 में, स्क्वाड्रन ने सीरिया के परमाणु रिएक्टर पर हमला किया था। यह ऑपरेशन ऑर्चर्ड के रूप में दुनियाभर में जाना जाता है। इसकी अचूक क्षमताओं के कारण स्क्वाड्रन को 2018 में सम्मानित किया गया था।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सैन्य नेतृत्व को डर है कि सरकार की योजनाओं पर सेना के भीतर बढ़ते गुस्से से इस्राइल की सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता प्रभावित होगी। अधिकारियों ने कहा कि यह वायु सेना के भीतर अशांति के बारे में सबसे अधिक चिंतित है, सरकार की योजनाओं पर रिजर्व ड्यूटी पायलट बहुत ज्यादा परेशान हैं। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें यह भी डर है कि उन्हें अवैध कार्यों में संलिप्त होने के लिए कहा जा सकता है।
israel protests
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
न्यायिक सुधार क्या हैं जिनका विरोध हो रहा है?
इस्राइल के न्याय मंत्री यारिव लेविन ने इसी साल जनवरी के पहले सप्ताह न्यायिक प्रणाली में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था। न्यायिक प्रणाली में संशोधन के जरिए सरकार एक समीक्षा समिति के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के नामांकित व्यक्तियों में सुधार करने और संसद को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को अस्वीकार करने का अधिकार देने का प्रयास कर रही है।
नेतन्याहू सरकार द्वारा प्रस्तावित नए कानून के तहत 120 सीटों वाली इस्राइली संसद में 61 सांसदों के साधारण बहुमत से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द किया जा सकेगा। प्रस्तावित सुधार उस प्रणाली को भी बदल देगा जिसके माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है। इससे न्यायपालिका में राजनेताओं को अधिक नियंत्रण मिलेगा।
इस्राइल के न्याय मंत्री यारिव लेविन ने इसी साल जनवरी के पहले सप्ताह न्यायिक प्रणाली में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था। न्यायिक प्रणाली में संशोधन के जरिए सरकार एक समीक्षा समिति के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के नामांकित व्यक्तियों में सुधार करने और संसद को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को अस्वीकार करने का अधिकार देने का प्रयास कर रही है।
नेतन्याहू सरकार द्वारा प्रस्तावित नए कानून के तहत 120 सीटों वाली इस्राइली संसद में 61 सांसदों के साधारण बहुमत से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द किया जा सकेगा। प्रस्तावित सुधार उस प्रणाली को भी बदल देगा जिसके माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है। इससे न्यायपालिका में राजनेताओं को अधिक नियंत्रण मिलेगा।
इस्राइल में विरोध प्रदर्शन
- फोटो :
सोशल मीडिया
कौन-कौन कर रहा विरोध?
इस्राइल की न्यापालिका से लेकर आम जनता नेतन्याहू सरकार द्वारा प्रस्तावित नए कानून का विरोध कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष एस्तेर हयात भी इसके विरोध में है। उनका कहना है कि ये प्रस्तावित संशोधन, कानूनी प्रणाली पर एक अनियंत्रित हमला है। इससे पता चलता है कि सरकार न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता पर घातक प्रहार करने का इरादा रखती है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार के खिलाफ विपक्षियों का जनवरी से विरोध जारी है। इसी बीच, 14 जनवरी की रात को तेल अवीव में हजारों की संख्या में लोगों ने इस्राइल की न्यायिक प्रणाली में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनकी रूसी राष्ट्रपति पुतिन से तुलना की थी। इस्राइल मीडिया के मुताबिक, ना सिर्फ तेल अवीव बल्कि यरूशलेम में भी नेतन्याहू का विरोध किया गया। सरकार के विरोध में जमा हुए लोगों की संख्या तकरीबन 80 हजार थी।
इस्राइल में सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले नए कानून के प्रस्ताव का विरोध जारी रहा। 21 जनवरी को एक लाख से अधिक लोग इसके खिलाफ तेल अवीव की सड़कों पर उतर आए। यरुशलम, हाइफा, बेर्शेबा और हर्जलिया समेत देश के कई शहरों में हजारों लोगों ने ऐसी रैलियां निकालीं।
इस्राइल की न्यापालिका से लेकर आम जनता नेतन्याहू सरकार द्वारा प्रस्तावित नए कानून का विरोध कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष एस्तेर हयात भी इसके विरोध में है। उनका कहना है कि ये प्रस्तावित संशोधन, कानूनी प्रणाली पर एक अनियंत्रित हमला है। इससे पता चलता है कि सरकार न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता पर घातक प्रहार करने का इरादा रखती है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार के खिलाफ विपक्षियों का जनवरी से विरोध जारी है। इसी बीच, 14 जनवरी की रात को तेल अवीव में हजारों की संख्या में लोगों ने इस्राइल की न्यायिक प्रणाली में प्रस्तावित बदलावों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनकी रूसी राष्ट्रपति पुतिन से तुलना की थी। इस्राइल मीडिया के मुताबिक, ना सिर्फ तेल अवीव बल्कि यरूशलेम में भी नेतन्याहू का विरोध किया गया। सरकार के विरोध में जमा हुए लोगों की संख्या तकरीबन 80 हजार थी।
इस्राइल में सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले नए कानून के प्रस्ताव का विरोध जारी रहा। 21 जनवरी को एक लाख से अधिक लोग इसके खिलाफ तेल अवीव की सड़कों पर उतर आए। यरुशलम, हाइफा, बेर्शेबा और हर्जलिया समेत देश के कई शहरों में हजारों लोगों ने ऐसी रैलियां निकालीं।
फरवरी में इस्राइल के 20 शहरों में हुआ प्रदर्शन
फरवरी के पहले हफ्ते में इस्राइली झंडे लहराती हुई भीड़ ने केंद्रीय काल्पन स्ट्रीट को जाम कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने इस्राइल की नई सरकार को विश्व शांति के लिए खतरा करार दिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस्राइल के यरुशलम, हाइफा, बेर्शेबा और हर्जलिया व तेल अवीव समेत देश के कई शहरों में हजारों लोगों प्रदर्शन किया। हाइफा में हुए विरोध प्रदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री यायर लापिड भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि 'हम अपने देश को बचाएंगे क्योंकि हम एक अलोकतांत्रिक देश में नहीं रहना चाहते हैं।'
फरवरी के पहले हफ्ते में इस्राइली झंडे लहराती हुई भीड़ ने केंद्रीय काल्पन स्ट्रीट को जाम कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने इस्राइल की नई सरकार को विश्व शांति के लिए खतरा करार दिया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस्राइल के यरुशलम, हाइफा, बेर्शेबा और हर्जलिया व तेल अवीव समेत देश के कई शहरों में हजारों लोगों प्रदर्शन किया। हाइफा में हुए विरोध प्रदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री यायर लापिड भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि 'हम अपने देश को बचाएंगे क्योंकि हम एक अलोकतांत्रिक देश में नहीं रहना चाहते हैं।'
बेंजामिन नेतन्याहू(फाइल फोटो)
- फोटो :
Social Media
सरकार का क्या रुख है?
इस्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग द्वारा कानून को रोकने और विपक्ष के साथ बातचीत शुरू करने के आह्वान के बावजूद नेतन्याहू ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया है। हालांकि, प्रस्तावित परिवर्तनों में से कुछ पर चर्चा की जा रही है।
एक ओर विपक्षी नेताओं ने कहना है कि कानून को रोके जाने से पहले वो बात नहीं करेंगे। वहीं, न्याय मंत्री यारिव लेविन ने कहा है कि वह चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन कानून नहीं रोकेंगे। नेतन्याहू और उनके समर्थकों का कहना है कि बहुत अधिक शक्ति वाली न्यायपालिका पर लगाम लगाने के लिए बदलावों की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे यायर नेतन्याहू ने अपने पिता के खिलाफ इस्राइली प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' बताया है जिन्हें जेल में होना चाहिए। यायर ने गुरुवार को ट्विटर पर पोस्ट किया, 'वे प्रदर्शनकारी नहीं हैं। वे अराजकतावादी भी नहीं हैं। वे आतंकवादी हैं।'
इस्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग द्वारा कानून को रोकने और विपक्ष के साथ बातचीत शुरू करने के आह्वान के बावजूद नेतन्याहू ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया है। हालांकि, प्रस्तावित परिवर्तनों में से कुछ पर चर्चा की जा रही है।
एक ओर विपक्षी नेताओं ने कहना है कि कानून को रोके जाने से पहले वो बात नहीं करेंगे। वहीं, न्याय मंत्री यारिव लेविन ने कहा है कि वह चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन कानून नहीं रोकेंगे। नेतन्याहू और उनके समर्थकों का कहना है कि बहुत अधिक शक्ति वाली न्यायपालिका पर लगाम लगाने के लिए बदलावों की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बेटे यायर नेतन्याहू ने अपने पिता के खिलाफ इस्राइली प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' बताया है जिन्हें जेल में होना चाहिए। यायर ने गुरुवार को ट्विटर पर पोस्ट किया, 'वे प्रदर्शनकारी नहीं हैं। वे अराजकतावादी भी नहीं हैं। वे आतंकवादी हैं।'