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Israel: एक साल से हमले की तैयारी कर रहा था हमास, पता होने के बाद भी जानिए कहां चूक गई इस्राइली खुफिया एजेंसी
Tue, 31 Oct 2023 02:10 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 31 Oct 2023 02:10 PM IST
सार
इस्राइली सेना के अधिकारी कई महीनों से पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को आगाह कर रहे थे कि देश में राजनीतिक उथल-पुथल का देश के दुश्मन फायदा उठा सकते हैं लेकिन...
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इस्राइल के सैनिक
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
इस्राइल पर हुए हमास के बर्बर हमले को करीब एक महीना होने जा रहा है लेकिन अभी तक भी लोग ये यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि इस्राइल की सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध लग गई। खासकर तब जब इस्राइल के पास मोसाद जैसी दुनिया की सबसे बेहतरीन खुफिया एजेंसी है, लेकिन बीते एक साल की लापरवाही इस्राइल को भारी पड़ी। जी हां, इस्राइल पर हुआ हमला खुफिया एजेंसियों की एक दिन या एक हफ्ते की लापरवाही का नतीजा नहीं था बल्कि बीते करीब एक साल से इस्राइली सुरक्षा बल खतरे के प्रति बेखबर बने रहे।
साल भर से इस्राइली खुफिया एजेंसियां कर रहीं थी लापरवाही
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल की सिग्नल खुफिया एजेंसी ने हमास के रेडियो सिग्नल सुनने बंद कर दिए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि इन्हें सुनना वक्त की बर्बादी है। अगर इस्राइली खुफिया एजेंसी ने इन सिग्नलों को ट्रैक किया होता तो हमास के इरादों का उसे पहले ही पता चल गया होता। रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल की आंतरिक खुफिया एजेंसी शिन बेत के प्रमुख रोनेन बार को इस्राइल पर हमले की आशंका थी लेकिन उनका मानना था कि यह एक छोटा हमला हो सकता है। रोनेन बार ने इसकी चर्चा सेना के शीर्ष जनरलों से की थी और आतंकरोधी बल को सीमा पर भेजने का फैसला भी किया गया था। हालांकि तब तक काफी देर हो गई और 7 अक्तूबर को हमास के आतंकियों ने इस्राइल पर हमला कर दिया।
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साल भर से इस्राइली खुफिया एजेंसियां कर रहीं थी लापरवाही
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल की सिग्नल खुफिया एजेंसी ने हमास के रेडियो सिग्नल सुनने बंद कर दिए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि इन्हें सुनना वक्त की बर्बादी है। अगर इस्राइली खुफिया एजेंसी ने इन सिग्नलों को ट्रैक किया होता तो हमास के इरादों का उसे पहले ही पता चल गया होता। रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल की आंतरिक खुफिया एजेंसी शिन बेत के प्रमुख रोनेन बार को इस्राइल पर हमले की आशंका थी लेकिन उनका मानना था कि यह एक छोटा हमला हो सकता है। रोनेन बार ने इसकी चर्चा सेना के शीर्ष जनरलों से की थी और आतंकरोधी बल को सीमा पर भेजने का फैसला भी किया गया था। हालांकि तब तक काफी देर हो गई और 7 अक्तूबर को हमास के आतंकियों ने इस्राइल पर हमला कर दिया।
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पीएम बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : सोशल मीडिया
ये चूक पड़ीं इस्राइल को भारी
इस्राइल की सरकार ने सुरक्षा में हुई इस चूक की पूरी जांच करने का वादा किया है लेकिन शुरुआती जांच में जो पता चला है, उसमें सेना, राजनीतिक नेतृत्व और खुफिया एजेंसियों की गंभीर लापरवाही सामने आयी है।
एनवाईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइली सेना के अधिकारी कई महीनों से पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को आगाह कर रहे थे कि देश में राजनीतिक उथल-पुथल का देश के दुश्मन फायदा उठा सकते हैं। साथ ही इस राजनीतिक उथल-पुथल से देश की सुरक्षा भी कमजोर हो रही है लेकिन नेतन्याहू ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
इस्राइली सेना के अधिकारियों ने खतरे का गलत अनुमान लगाया। दरअसल इस्राइली सेना का मानना था कि हमास, इस्राइल पर हमला करने में सक्षम नहीं है और इस्राइल को हिजबुल्ला और ईरान से ज्यादा खतरा था। यही वजह रही कि इस्राइली खुफिया एजेंसियों और सेना का फोकस हिजबुल्ला और ईरान पर रहा और इस बीच हमास ने हमला कर उन्हें चौंका दिया।
सेना के शीर्ष जनरलों से नहीं मिले पीएम नेतन्याहू
24 जुलाई को सेना के दो शीर्ष जनरल पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने इस्राइल की संसद गए थे। इन सैन्य जनरलों ने इस्राइल के सांसदों को संभावित खतरे की चेतावनी दी लेकिन इस्राइस के सांसदों ने सैन्य जनरलों की इस चेतावनी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। साथ ही इस्राइल के एक शीर्ष सैन्य जनरल पीएम नेतन्याहू से मिलकर उन्हें खतरे के बारे में आगाह करने वाले थे लेकिन पीएम नेतन्याहू ने जनरल से मिलने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद सैन्य जनरल ने सार्वजनिक तौर पर देश की सुरक्षा के लिए बढ़ रहे खतरे के प्रति लोगों को आगाह किया लेकिन सरकार की तरफ से जनरल के बयान की आलोचना की और कहा कि इससे लोगों में घबराहट फैलेगी।
इस्राइल की सरकार ने सुरक्षा में हुई इस चूक की पूरी जांच करने का वादा किया है लेकिन शुरुआती जांच में जो पता चला है, उसमें सेना, राजनीतिक नेतृत्व और खुफिया एजेंसियों की गंभीर लापरवाही सामने आयी है।
एनवाईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइली सेना के अधिकारी कई महीनों से पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को आगाह कर रहे थे कि देश में राजनीतिक उथल-पुथल का देश के दुश्मन फायदा उठा सकते हैं। साथ ही इस राजनीतिक उथल-पुथल से देश की सुरक्षा भी कमजोर हो रही है लेकिन नेतन्याहू ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
इस्राइली सेना के अधिकारियों ने खतरे का गलत अनुमान लगाया। दरअसल इस्राइली सेना का मानना था कि हमास, इस्राइल पर हमला करने में सक्षम नहीं है और इस्राइल को हिजबुल्ला और ईरान से ज्यादा खतरा था। यही वजह रही कि इस्राइली खुफिया एजेंसियों और सेना का फोकस हिजबुल्ला और ईरान पर रहा और इस बीच हमास ने हमला कर उन्हें चौंका दिया।
सेना के शीर्ष जनरलों से नहीं मिले पीएम नेतन्याहू
24 जुलाई को सेना के दो शीर्ष जनरल पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने इस्राइल की संसद गए थे। इन सैन्य जनरलों ने इस्राइल के सांसदों को संभावित खतरे की चेतावनी दी लेकिन इस्राइस के सांसदों ने सैन्य जनरलों की इस चेतावनी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। साथ ही इस्राइल के एक शीर्ष सैन्य जनरल पीएम नेतन्याहू से मिलकर उन्हें खतरे के बारे में आगाह करने वाले थे लेकिन पीएम नेतन्याहू ने जनरल से मिलने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद सैन्य जनरल ने सार्वजनिक तौर पर देश की सुरक्षा के लिए बढ़ रहे खतरे के प्रति लोगों को आगाह किया लेकिन सरकार की तरफ से जनरल के बयान की आलोचना की और कहा कि इससे लोगों में घबराहट फैलेगी।
इस्राइल पर हमले के दौरान हमास के आतंकी
- फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे इस्राइली सुरक्षा को हमास के लड़ाकों ने दिया चकमा
हमास के आतंकियों द्वारा की जा रहीं सैन्य गतिविधि की भी इस्राइली सेना को जानकारी थी लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ हमास का युद्धाभ्यास माना। साथ ही इस्राइली सेना को अपने अहंकार की भी कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि इस्राइली सेना ने गाजा सीमा पर 40 मील लंबी फेंसिंग की हुई थी और इस फेंसिंग पर अत्याधुनिक कैमरों और सेंसर्स से नजर रखी जाती थी। कहीं ना कहीं इस्राइली सेना को विश्वास था कि हमास इस तरह से हमला करने की गलती नहीं करेगा लेकिन हमास ने इस्राइल के इस विश्वास को चकनाचूर करते हुए ड्रोन से इन फेंसिंग पर हमला किया और कैमरों और सेंसर्स को तबाह कर दिया। इसके बाद हमास के आतंकी आराम से इस फेंसिंग को तोड़कर गाड़ियों और मोटरसाइकिलों से इस्राइल की सीमा में प्रवेश कर गए।
हमास के आतंकियों ने हिजबुल्ला की तर्ज पर छोटी-छोटी टुकड़ियों में इस्राइल पर हमला किया। साथ ही उन्हें इस्राइल के इलाकों और गाजा सीमा पर मौजूद छोटे-छोटे गांवों की पूरी जानकारी थी। इन टुकड़ियों को तय टारगेट दिए गए थे, यही वजह रही कि इस्राइल को भी इस हमले की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ।
हमास के आतंकियों द्वारा की जा रहीं सैन्य गतिविधि की भी इस्राइली सेना को जानकारी थी लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ हमास का युद्धाभ्यास माना। साथ ही इस्राइली सेना को अपने अहंकार की भी कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि इस्राइली सेना ने गाजा सीमा पर 40 मील लंबी फेंसिंग की हुई थी और इस फेंसिंग पर अत्याधुनिक कैमरों और सेंसर्स से नजर रखी जाती थी। कहीं ना कहीं इस्राइली सेना को विश्वास था कि हमास इस तरह से हमला करने की गलती नहीं करेगा लेकिन हमास ने इस्राइल के इस विश्वास को चकनाचूर करते हुए ड्रोन से इन फेंसिंग पर हमला किया और कैमरों और सेंसर्स को तबाह कर दिया। इसके बाद हमास के आतंकी आराम से इस फेंसिंग को तोड़कर गाड़ियों और मोटरसाइकिलों से इस्राइल की सीमा में प्रवेश कर गए।
हमास के आतंकियों ने हिजबुल्ला की तर्ज पर छोटी-छोटी टुकड़ियों में इस्राइल पर हमला किया। साथ ही उन्हें इस्राइल के इलाकों और गाजा सीमा पर मौजूद छोटे-छोटे गांवों की पूरी जानकारी थी। इन टुकड़ियों को तय टारगेट दिए गए थे, यही वजह रही कि इस्राइल को भी इस हमले की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ।