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Exclusive: इस्राइल में हुए नरसंहार की वजह वहां की अंदरूनी राजनीति? हमले के 10 घंटे बाद क्यों पहुंची सेना

Tue, 10 Oct 2023 04:18 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 10 Oct 2023 04:18 PM IST
सार

प्रोफेसर जांगिड ने बताया कि इस्राइल के रक्षा मंत्री ने इस्तीफे देने की बात कह दी थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि इन विरोध प्रदर्शनों के चलते समाज में बंटवारा हो रहा है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। 

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israel hamas war internal politics behind attack protest over judiciary make army vulnerable
प्रोफेसर खींवराज जांगिड - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इस्राइल पर हमास के आतंकियों के बर्बर हमले से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इनमें ये सवाल भी शामिल है कि इस्राइल की सेना जो बेहद ताकतवर मानी जाती है, उस सेना के इलाके में घुसकर आतंकी कई घंटे तक मौत बरसाते रहे और पूरी सुरक्षा व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढहती दिखी। इस्राइल की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे भारतीय प्रोफेसर खींवराज जांगिड का कहना है कि इस्राइल पर हुए इस खतरनाक हमले की वजह इस्राइल की अंदरूनी राजनीति भी है, जिसके चलते देश की सुरक्षा कमजोर हुई। अमर उजाला ने प्रोफेसर खींवराज जांगिड से एक्सक्लूसिव बातचीत की। आइए जानते हैं कि प्रोफेसर जांगिड ने क्या बताया।
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अंदरूनी राजनीति पड़ी इस्राइल को भारी
प्रोफेसर जांगिड ने कहा कि इस्राइल में बीते कुछ माह पहले न्याय पालिका में किए जा रहे कथित सुधारों के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। यह विरोध प्रदर्शन इतने व्यापक थे, इसे लेकर पूरा इस्राइल दो धड़ों में  बंटा दिखाई दिया। इसे लेकर विवाद इतना बढ़ा था कि इस्राइल के रक्षा मंत्री ने इस्तीफे देने की बात कह दी थी। साथ ही चेतावनी दी थी कि इन विरोध प्रदर्शनों के चलते समाज में बंटवारा हो रहा है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू नहीं माने। बीते कई महीने से इस विवाद से इस्राइल की राजनीति प्रभावित रही और इससे सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर हुई क्योंकि शीर्ष नेता और अधिकारी इस विवाद को सुलझाने में व्यवस्त रहे। इसके चलते कई अहम सुरक्षा बैठकें नहीं हो सकीं। इसी अंदरूनी राजनीति का फायदा आतंकियों ने उठाया और इस्राइल के इतिहास के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दे दिया।
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कई घंटे तक घटनास्थलों पर नहीं पहुंची इस्राइली सेना
प्रोफेसर जांगिड ने बताया कि इस्राइल में भारत की तरह पारंपरिक सेना नहीं है बल्कि वहां आम लोग ही स्वैच्छिक तौर पर सेना में समय-समय पर अपनी सेवाएं देते हैं। न्याय पालिका के मुद्दे पर समाज बंटा तो उसका असर वहां की सेना पर भी पड़ा। शायद यही वजह रही कि हमास के आतंकियों के हमले के करीब 10 घंटे बाद इस्राइल की सेना मौके पर पहुंच सकी, इससे सेना में आपसी समन्वय की साफ कमी दिखाई दी। इस्राइल एक छोटा देश है, जहां कुछ ही घंटे में देश के एक कोने से दूसरे कोने पहुंचा जा सकता है लेकिन हमले के इतने देर बाद सेना का मौके पर पहुंचना इस्राइली सेना में आई कमजोरी का सबूत है। ऐसी भी रिपोर्ट्स आ रही हैं कि कुछ जगहों पर अभी तक सेना पहुंच भी नहीं पाई हैं और अभी भी कुछ जगहों पर लड़ाई जारी है।

इस्राइल में खाली हुए सुपर मार्केट
इस्राइल में नेतृत्व के स्तर पर हो रही चूक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां एक आदेश से खाने-पीने के सामान की किल्लत हो गई है। दरअसल इस्राइली सरकार के एक विभाग ने एडवाइजरी जारी की कि लोग 72 घंटे का खाना पीना अपने पास रखें ताकि आपातकालीन स्थिति से खाने-पीने की कमी ना हो। इसका नतीजा ये हुआ कि इस्राइल की लगभग सभी सुपर मार्केट से खाने पीने के सामान खाली हो गए हैं। इसके चलते महंगाई भी बढ़ गई है और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बाद में सरकार ने ये एडवाइजरी वापस ले ली, लेकिन इससे समझा जा सकता है कि इस्राइल में नेतृत्व के स्तर पर बड़ी लापरवाही हुई है। 


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