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Gaza: इस्राइल-हमास युद्ध से जनता के साथ पर्यावरण को भी नुकसान, छह करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन

Thu, 20 Jun 2024 05:59 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, गाजा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, गाजा Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Jun 2024 05:59 AM IST
सार

गाजा में पिछले 8 महीनों से चल रहे इस्राइल-हमास के बीच युद्ध के कारण वहां की जनता के साथ ही पर्यावरण को भी काफी नुकसान हो रहा है। युद्ध के शुरुआती 120 दिनों में ध्वस्त इमारतों के पुनर्निर्माण से छह करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन होगा।

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Israel-Hamas war causes harm to the public as well as the environment, emissions equivalent to 60 million ton
गाजा में युद्धविराम पर बातचीत - फोटो : ANI

विस्तार

इस्राइल-गाजा संघर्ष मानव जाति के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं। यह संघर्ष न केवल अब तक हजारों लोगों की जिंदगियों को निगल चुका है बल्कि पर्यावरण के लिए भी भयावह साबित हो रहा है। युद्ध के शुरुआती 120 दिनों में ध्वस्त इमारतों के पुनर्निर्माण से छह करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन होगा। इस युद्ध के कारण गाजा का पानी, मिट्टी और हवा तबाह हो चुके हैं। बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को भारी क्षति हुई है। इसके साथ ही प्रदूषित जल आपूर्ति से लेकर जलती हुई इमारतों और शवों से निकलने वाले जहरीले धुएं से भरी हवा के कारण आसपास के जीवन का हर पहलू अब किसी न किसी रूप में प्रदूषण से भर गया है।

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गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले आठ महीनों में यह संघर्ष गाजा में 37,347 जिंदगियों को लील चुका है। गाजा पट्टी पर अब तक 85,372 लोग घायल हो चुके हैं। इस संघर्ष की वजह से अब तक लाखों लोगों को विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी है। इस्राइल में भी अब तक करीब 1,600 जाने जा चुकी हैं। वहीं घायलों का आंकड़ा 14 हजार के करीब पहुंच चुका है। अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता पैट्रिक बिगर का कहना है कि सशस्त्र संघर्ष दुनिया को भयावह गर्मी के कगार पर धकेल रहे हैं। रिपोर्ट में संघर्षों के जलवायु पर पड़ते प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने और उन्हें सीमित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के माध्यम से सैन्य उत्सर्जन की तत्काल रिपोर्टिंग की आवश्यकता है।
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36 देशों के सालाना से भी ज्यादा उत्सर्जन
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल-गाजा संघर्ष के पहले 120 दिनों में उत्सर्जन करीब 26 देशों के वार्षिक उत्सर्जन से भी अधिक रहा। वहीं, इस्राइल और हमास ने इस दौरान युद्ध को लेकर जो निर्माण किए हैं यदि उनकों भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो यह उत्सर्जन 36 देशों के कुल उत्सर्जन से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर 2023 से फरवरी 2024 के शुरुआती 120 दिनों में सीधे तौर पर युद्ध की वजह से औसतन 5,36,410 टन कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) के बराबर उत्सर्जन हुआ था जो बढ़कर 6,52,552 टन तक पहुंच सकता है। इस अवधि के दौरान बड़े पैमाने पर बमबारी, टोही उड़ानों के साथ रॉकेटों से किए हमलों और सैन्य गतिविधियां में काफी तेजी देखी गई।
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10 फीसदी वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार
अध्ययन के निष्कर्ष में कहा गया है इस तरह सैन्य संघर्ष वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के करीब साढ़े दस फीसदी के लिए जिम्मेदार हैं, फिर भी इस उत्सर्जन को अक्सर बहुत कम रिपोर्ट किया जाता है। ऐसे में शोधकर्ताओं ने जलवायु गणनाओं में इस उत्सर्जन को भी ट्रैक और शामिल करने पर जोर दिया है।


लंदन के क्वीन मैरी विश्वविद्यालय से जुड़े प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर बेंजामिन नेमार्क का कहना है कि चूंकि दुनिया जलवायु परिवर्तन और सैन्य संघर्षों के दोहरे संकट से जूझ रही है। ऐसे में युद्ध के पर्यावरणीय प्रभावों को समझना और कम करना बेहद महत्वपूर्ण है।

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