Russia: रूस के एक दशक पहले के ‘एक्शन पर रिएक्शन’ दे रहा आईएस-के, आतंकियों का अफगानिस्तान से करीबी संबंध
इस्लामिक स्टेट की न्यूज एजेंसी अमाक ने टेलीग्राम पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि ये पुतिन के इस्लाम विरोधी कर्मों का नतीजा है। ईरान, सीरिया और तुर्किये जैसे मुस्लिम देशों के करीबी सहयोगी रूस पर आतंकी हमला चौंकाने वाला जरूर है।
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इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया-खुरासान (आईएसआईएस-के या आईएसके) वो संगठन है, जिसने रूस की राजधानी मॉस्को के क्रॉकस सिटी हॉल पर हमले की जिम्मेदारी ली है। अमेरिका ने भी अपने खुफिया नेटवर्क का हवाला देते हुए दावा किया है कि हमला आईएसके ने ही किया है।
इस्लामिक स्टेट की न्यूज एजेंसी अमाक ने टेलीग्राम पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि ये पुतिन के इस्लाम विरोधी कर्मों का नतीजा है। ईरान, सीरिया और तुर्किये जैसे मुस्लिम देशों के करीबी सहयोगी रूस पर आतंकी हमला चौंकाने वाला जरूर है। क्योंकि, ज्यादातर इस्लामी आतंकी संगठनों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा दुश्मन है। विशेषज्ञ आईएसके के मॉस्को पर हमले को करीब एक दशक पहले हुए रूसी एक्शन का रिएक्शन मान रहे हैं। आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है। इसके लड़ाकों में अफगानिस्तान के अलावा तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान व इराक के लड़ाके शामिल हैं। आईएसआईएस के मुख्य मॉड्यूल के खत्म होने के बाद इसका भी विस्तार रुक गया था।
रूस पर क्यों किया हमला
यह बड़ा सवाल है। इसका सीधा जवाब अतीत में मिलता है। 2012-13 में जब आईएसआईएस इराक और सीरिया में विस्तार कर रहा था। तब रूसी राष्ट्रपति के एक फैसले ने आईएसआईएस की कमर तोड़ दी। पुतिन ने 2015 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-अशद का साथ देने का फैसला किया।
वर्षों से बना रहे थे योजना
सुरक्षा परामर्श फर्म सौफान ग्रुप के मुताबिक आईएसके कई वर्षों से अमेरिका और रूस पर हमले की योजना बना रहा है। आतंकी समूह पुतिन को मुस्लिम विरोधी मानता है। पुतिन के चलते खत्म हुआ आईएस पुतिन के बशर-अल-असद का साथ देने से आईएस को एक तरफ से अमेरिका और एक तरफ रूसी हमलों का सामना करना पड़ा और कुछ ही दिनों में यह आतंकी संगठन खत्म हो गया।