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Gaza Crisis: क्या गाजा के अस्पतालों पर हमले कर नियम तोड़ रहा इस्राइल, दुनियाभर से उठे विरोध पर इसका क्या रुख?

Tue, 14 Nov 2023 04:47 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 14 Nov 2023 04:47 PM IST
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सार
Gaza Hospitals: हमास-इस्राइल युद्ध के बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि गाजा के 36 अस्पतालों में से 20 अब काम नहीं कर रहे हैं जिनमें यहां के सबसे बड़े और दूसरे सबसे बड़े अस्पताल अल शिफा और अल-कुद्स भी शामिल हैं।
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Is Israel breaking the international laws by attacking Gaza hospitals
गाजा पट्टी के अस्पताल - फोटो : amar ujala

विस्तार

हमास और इस्राइल के बीच शुरू हुए युद्ध को 38 दिन गुजर चुके हैं। शुरुआत से ही इस संघर्ष का केंद्र हमास के कब्जे वाला गाजा पट्टी बना हुआ है। विशेष तौर पर युद्ध में सुरक्षित किए जाने वाले अस्पतालों की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इसी बीच गाजा पट्टी के सबसे बड़े अस्पताल, अल-शिफा ने काम करना बंद कर दिया है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में 20 से ज्यादा अस्पतालों में काम रुकने की जानकारी दी थी। 



अस्पतालों का मुद्दा अब गाजा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दुनियाभर के नेता इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अस्पतालों की सुरक्षा होनी चाहिए। दूसरी ओर इस्राइल ने अपने रुख को बार-बार स्पष्ट किया है कि हमास अस्पतालों-स्कूलों में आम नागरिकों को अपने आतंकी मंसूबों के लिए मानव ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है।


ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर गाजा के अस्पतालों में क्या हो रहा है? अस्पताल में हमलों का विरोध क्यों हो रहा है? आरोपों पर इस्राइल का क्या रुख है? युद्ध में अस्पताल सुरक्षा क्यों की जाती है, नियम क्या कहते हैं?


पहले जानते हैं कि गाजा के अस्पतालों में क्या हो रहा है?
हमास-इस्राइल युद्ध के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोमवार (13 नवंबर) को जानकारी दी कि अल-शिफा तीन दिनों से बिना पानी के है और अब अस्पताल के रूप में काम नहीं कर रही है। दरअसल, गाजा के अल-शिफा अस्पताल पर बीते दिनों कई हमले हुए, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई है। इस बीच डब्ल्यूएचओ ने कहा कि हमास नियंत्रित क्षेत्र के उत्तरी क्षेत्र में इस्राइल के हमले के कारण मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है। 

इस्राइली सेना ने अस्पताल को खाली करने का आदेश दिया है, लेकिन अभी भी वहां पर सैंकड़ों लोग फंसे हुए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगर अस्पताल के जेनरेटर के लिए जल्द ही ईंधन का इंतजाम नहीं हुआ तो इलाज की कमी से कई लोग मारे जा सकते हैं, जिनमें कई नवजात बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, युद्ध से प्रभावित होने वाला अल-शिफा एकलौता अस्पताल नहीं है। इससे पूर्व संयुक्त राष्ट्र की ने कहा कि गाजा के 36 अस्पतालों में से 20 अब काम नहीं कर रहे हैं जिनमें यहां के सबसे बड़े और दूसरे सबसे बड़े अस्पताल अल शिफा और अल-कुद्स भी शामिल हैं।

Al-Shifa Hospital
Al-Shifa Hospital - फोटो : Social Media

अस्पताल में हमलों का विरोध कौन और क्यों कर रहा है? 
दुनियाभर के संगठन और नेताओं ने पिछले दिनों गाजा के अस्पतालों में हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अल-शिफा अस्पताल में करीब 2300 मरीज, स्वास्थ्य कर्मी और शरणार्थी रह रहे हैं। यहां पिछले कई दिनों से बिजली और पानी नहीं आ रहा है, इंटरनेट सेवा भी बेहद खराब है। इलाके में गोली और बमबारी जारी है। मरीजों की संख्या बढ़ रही है और अस्पताल काम करना बंद कर दिया है।'

वहीं यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बोरेल ने 27 देशों के ब्लॉक की ओर से एक बयान जारी किया है। बोरेल ने चिकित्सा आपूर्ति और अस्पतालों के अंदर नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत दायित्व पर जोर देते हुए इस्राइल से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया। बोरेल ने चेतावनी दी, 'ये दुश्मनी अस्पतालों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं और नागरिकों और चिकित्सा कर्मचारियों पर भयानक असर डाल रही हैं।'

उन्होंने कहा, 'अस्पतालों को, सबसे जरूरी चिकित्सा सामग्री तुरंत मुहैया कराई जानी चाहिए और जिन मरीजों को तत्काल चिकित्सा देखभाल की जरूरत है, उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जाना चाहिए। 'इस संदर्भ में, हम इस्राइल से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकतम संयम बरतने का आग्रह करते हैं।

यूएएन और ईयू के अलावा अमेरिका ने भी अस्पताल पर हमले का विरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपील की है उन्हें उम्मीद है कि अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। बाइडन ने कहा कि अस्पतालों की सुरक्षा होनी चाहिए। 

Al-Shifa Hospital
Al-Shifa Hospital - फोटो : Social Media

आरोपों पर इस्राइल का क्या रुख है?
इस्राइल का आरोप है कि हमास के आतंकियों ने अल शिफा समेत कई अस्पतालों में अपने ठिकाने बनाए हुए हैं। इसी बीच इस्राइली सेना ने दावा किया कि मारा गया हमास कमांडर अमहद सियाम गाजा के एक अस्पताल में करीब 1000 लोगों को बंधक बनाकर रखे हुए था। इस्राइली सेना ने दावा किया कि सियाम गाजा के रनतीसी अस्पताल में डेरा जमाए हुए था और वह अस्पताल में मौजूद आम नागरिकों और मरीजों को इस्राइली चेतावनी के बावजूद दक्षिणी गाजा के सुरक्षित ठिकानों पर नहीं जाने दे रहा था। 
 
इस्राइली सेना ने कहा कि सियाम भी इस बात का उदाहरण है कि हमास आम नागरिकों को अपने आतंकी मंसूबों के लिए मानव ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है। वहीं पिछले महीने के अंत में इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने दावा कि आतंकी संगठन शिफा अस्पताल से ऑपरेट कर रहा है। आईडीएफ का आरोप था कि आतंकियों ने शिफा अस्पताल को हमास का मुख्यालय बना लिया है। सेना के अनुसार हमास के आतंकी गाजा की आम जनता के लिए मौजूद ईंधन, ऑक्सीजन, पानी जैसी बुनियादी चीजों को खत्म कर रहे हैं।

गाजा पट्टी पर में धमाका
गाजा पट्टी पर में धमाका - फोटो : ANI

युद्ध में अस्पताल सुरक्षा क्यों की जाती है, नियम क्या कहते हैं?
जिन संगठनों या देशों ने गाजा के अस्पतालों में इस्राइली हमलों का विरोध किया, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला जरूर दिया। दरअसल, 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के तहत स्कूल, अस्पताल और धर्मस्थल जैसे कुछ स्थान सुरक्षित घोषित किए गए हैं। अस्पतालों को लेकर यह समझौता कहता है कि नागरिक अस्पताल किसी भी परिस्थिति में हमले का उद्देश्य नहीं हो सकते हैं, बल्कि संघर्ष में शमिल पक्षों द्वारा हर समय उनका सम्मान और सुरक्षा की जाएगी।

हालांकि, जिनेवा कन्वेंशन यह भी उल्लेख करता है कि यदि कोई सशस्त्र समूह दुश्मन के लिए हानिकारक कृत्य को अंजाम देने के लिए अस्पताल का उपयोग करता है तो एक अस्पताल इस संरक्षित स्थिति को खो सकता है। 

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