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Iran Warning: अमेरिका-इस्राइल का साथ दिया तो माना जाएगा युद्ध की कार्रवाई, ईरान ने यूरोप को दी कड़ी चेतावनी

Tue, 03 Mar 2026 06:42 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Tue, 03 Mar 2026 06:42 PM IST
सार

ईरान ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि अगर वे अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में शामिल होते हैं तो इसे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान की मिसाइल क्षमता पर कदम उठाने की बात कही थी।

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Iran Warning Supporting America Israel will considered an act of war issued a stern warning to Europe
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है। तेहरान ने साफ कहा है कि अगर यूरोप ने अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान में किसी भी रूप में भाग लिया, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई लगातार बढ़ रही है।

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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘डिफेंसिव एक्शन’ के नाम पर भी अगर कोई देश अमेरिका-इस्राइल अभियान में शामिल होता है, तो उसे आक्रामकता माना जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
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यूरोप के बयान पर कड़ा जवाब
यह प्रतिक्रिया जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को खत्म करने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं। ईरान ने इसे सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने की तैयारी बताया है।
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यूरोपीय देशों की स्थिति
जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वे सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है। यूरोपीय संघ ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।


ब्रिटेन और फ्रांस का रुख
ब्रिटेन ने अमेरिकी बलों को अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा है कि यदि सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस उनकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।

नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता
फ्रांस ने बताया कि प्रभावित देशों में लगभग चार लाख फ्रांसीसी नागरिक मौजूद हैं। हालात बिगड़ने पर उन्हें वाणिज्यिक और सैन्य उड़ानों के जरिए निकाला जा सकता है। इसी बीच क्षेत्र में हमलों का सिलसिला जारी है और रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले से तनाव और बढ़ गया है। ईरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। यूरोप की संभावित भूमिका को लेकर आने वाले दिनों में हालात और स्पष्ट हो सकते हैं।

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