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पश्चिम एशिया संकट: गालिबाफ ने बताया आखिर क्यों विफल हुई इस्लामाबाद शांति वार्ता? कहा- अमेरिका पर भरोसा नहीं
Sun, 12 Apr 2026 03:52 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, तेहरान
आईएएनएस, तेहरान
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 12 Apr 2026 03:52 PM IST
सार
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे गंभीर मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है।
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मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, ईरानी संसद अध्यक्ष
- फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली 20 घंटे से ज्यादा की मैराथन बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। वार्ता की विफलता के तुरंत बाद ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सीधे तौर पर अमेरिका को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान कई भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहल पेश की थीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा। गालिबाफ ने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ही तय करना है कि वह ईरान का विश्वास हासिल करना चाहता है या नहीं।
भरोसे की कमी और पुराने जख्म
ईरानी नेता ने बातचीत शुरू होने से पहले ही अपनी मंशा साफ कर दी थी। उन्होंने कहा था कि ईरान नेक नियति और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ मेज पर आया है, लेकिन पिछले दो युद्धों के कड़वे अनुभवों ने ईरान के मन में अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। गालिबाफ के अनुसार, अमेरिका की कथनी और करनी में अंतर ही इस विफलता की मुख्य वजह बना।
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ईरान के लिए बुरी खबर- जेडी वेंस
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की कि 20 घंटे से अधिक की चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो पाया। वेंस का लहजा सख्त था। उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि हमने विस्तार से चर्चा की, लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।
वेंस ने कहा कि अमेरिका की 'रेड लाइन्स' बिल्कुल साफ हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबी अवधि के लिए यह प्रतिबद्धता जताए कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अस्थायी वादे नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी आश्वासन चाहिए। वेंस ने दावा किया कि वाशिंगटन ने अपना अंतिम प्रस्ताव मेज पर रख दिया है और अब फैसला ईरान को करना है।
यह भी पढ़ें: अधिवक्ता का लाइव कत्ल: 81 सेकंड में हत्या, 20 किक मारने के बाद स्टार्ट हुई बाइक; राजीव हत्याकांड की पूरी कहानी
किन मुद्दों पर फंसा पेंच?
हालांकि गालिबाफ ने अपनी पोस्ट में शांति वार्ता के बारे में ज्यादा विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बातचीत विफल रहने के पीछे दो सबसे बड़े कारण रहे। पहला, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं और निगरानी को लेकर दोनों देशों के बीच गहरी खाई बनी हुई है। इसके अलावा, सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज के रास्ते से होने वाले पारगमन को लेकर भी दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी।
इतिहास बनाने का मौका हाथ से निकला
जानकारों का मानना है कि 1979 की क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच इस स्तर की सीधी बातचीत हो रही थी, जिससे दुनिया को बड़ी उम्मीदें थीं। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। अमेरिकी पक्ष ने अपने प्रस्ताव को अंतिम और सर्वश्रेष्ठ करार दिया था, लेकिन ईरान ने इसे अपर्याप्त माना। फिलहाल, इस्लामाबाद वार्ता के विफल होने से मध्य पूर्व में तनाव कम होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान कई भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहल पेश की थीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा। गालिबाफ ने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ही तय करना है कि वह ईरान का विश्वास हासिल करना चाहता है या नहीं।
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भरोसे की कमी और पुराने जख्म
ईरानी नेता ने बातचीत शुरू होने से पहले ही अपनी मंशा साफ कर दी थी। उन्होंने कहा था कि ईरान नेक नियति और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ मेज पर आया है, लेकिन पिछले दो युद्धों के कड़वे अनुभवों ने ईरान के मन में अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। गालिबाफ के अनुसार, अमेरिका की कथनी और करनी में अंतर ही इस विफलता की मुख्य वजह बना।
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ईरान के लिए बुरी खबर- जेडी वेंस
दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की कि 20 घंटे से अधिक की चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो पाया। वेंस का लहजा सख्त था। उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि हमने विस्तार से चर्चा की, लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।
वेंस ने कहा कि अमेरिका की 'रेड लाइन्स' बिल्कुल साफ हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबी अवधि के लिए यह प्रतिबद्धता जताए कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अस्थायी वादे नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी आश्वासन चाहिए। वेंस ने दावा किया कि वाशिंगटन ने अपना अंतिम प्रस्ताव मेज पर रख दिया है और अब फैसला ईरान को करना है।
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किन मुद्दों पर फंसा पेंच?
हालांकि गालिबाफ ने अपनी पोस्ट में शांति वार्ता के बारे में ज्यादा विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बातचीत विफल रहने के पीछे दो सबसे बड़े कारण रहे। पहला, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं और निगरानी को लेकर दोनों देशों के बीच गहरी खाई बनी हुई है। इसके अलावा, सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज के रास्ते से होने वाले पारगमन को लेकर भी दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी।
इतिहास बनाने का मौका हाथ से निकला
जानकारों का मानना है कि 1979 की क्रांति के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच इस स्तर की सीधी बातचीत हो रही थी, जिससे दुनिया को बड़ी उम्मीदें थीं। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। अमेरिकी पक्ष ने अपने प्रस्ताव को अंतिम और सर्वश्रेष्ठ करार दिया था, लेकिन ईरान ने इसे अपर्याप्त माना। फिलहाल, इस्लामाबाद वार्ता के विफल होने से मध्य पूर्व में तनाव कम होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
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