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ईरान: 'सिक्कों का सुल्तान' जिसे फांसी दे दी गई

Thu, 15 Nov 2018 12:26 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 15 Nov 2018 12:26 PM IST
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Iran: Sultan of coins which was hanged
वहीद मजलूमीन और मोहम्मद इस्माइल गासेमी - फोटो : FARSNEWS
ईरान में दो टन सोने के सिक्कों के साथ गिरफ्तार हुए वहीद मजलूमीन को बुधवार की सुबह फांसी दे दी गई। राजधानी तेहरान के अभियोजन कार्यालय ने बताया कि वहीद मजलूमीन और उनके साथी मोहम्मद इस्माइल गासेमी की मौत की सजा को ईरान की सबसे बड़ी अदालत की मंजूरी मिल गई थी।
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वहीद मजलूमीन और मोहम्मद इस्माइल गासेमी को अदालत ने भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराध के मामले में कसूरवार ठहराया था। उन दोनों पर सोने के सिक्कों की जमाखोरी के जरिए मुद्रा बाजार के कामकाज में अनधिकृत रूप से दखल देने का आरोप लगाया गया था।
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इस मामले में वहीद मजलूमीन के साथ और भी लोग गिरफ्तार किए गए थे।   ईरान की मुद्रा रियाल पिछले साल की दर प्रति डॉलर 40,500 से बढ़कर 135,000 पर पहुंच गई है।
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कौन हैं वहीद मजलूमीन?

जब इस साल जुलाई में तेहरान के पुलिस चीफ ने दो टन सोने की अशर्फियों के साथ एक शख्स की गिरफ्तारी की ख्बर दी और उसे 'सिक्कों के सुल्तान' के नाम से नवाजा तो ईरान के आम लोग वहीद मजलूमीन को नहीं के बराबर जानते थे।

उस समय तेहरान पुलिस ने बताया था कि "इस शख्स ने अपने लोगों को आदेश दिया था कि तेहरान के बाजार में तमाम सिक्कों को जिस भी कीमत पर हो, खरीद लो ताकि आने वाले दिनों में वे खुद सोने के सिक्कों की कीमत तय करें।"

फिर बाद में हालांकि ये भी घोषणा की गई कि मजलूमीन की दो टन सोने की अशर्फियां जब्त नहीं की गई हैं। लेकिन ये भी कहा गया कि "उन्होंने और उनके बेटे ने दो टन से ज्यादा सिक्के खरीदे हैं।"

तब से लेकर अब तक मजलूमीन का नाम ईरानी मीडिया में बार-बार लिया गया और उनके केस की फाइल फांसी की सजा के लिए आगे बढ़ा दी गई। लेकिन इस फाइल में 'सिक्कों का सुल्तान' एक मात्र शख्स नहीं है जिसे आर्थिक अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी।

सिक्कों की आपूर्ति में गिरावट

पिछले साल जून महीने के आखिर में नए तरह की सोने की कुल अशर्फियां 12 लाख तूमान से भी अधिक थीं लेकिन जैसे ही विनिमय दर में तेजी आई, मुद्रा की कीमत भी उसी अनुपात में बढ़ गई। फिर इस साल जुलाई में जब वहीद मजलूमीन की गिरफ्तारी की खबर आई तो सोने के सिक्कों की कीमत तीन मिलियन तूमान से भी ऊपर पहुंच गई।

न्याय विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मजलूमीन और उनके सहयोगियों ने बाजार से सिक्कों का जखीरा इकट्ठा करके सिक्कों की आपूर्ति में गिरावट लाकर सिक्कों की कीमतें बढ़ा दी थीं।

56 साल के मजलूमीन को नजदीक से जानने वालों का कहना है कि वे 30 साल से भी ज्यादा समय से तेहरान के बाजार में सोने और सिक्कों के लेनदेन का काम करते आ रहे थे। तेहरान के वनक रोड की गली के दुकानदार मजलूमीन को वहीद के नाम से बुलाते थे। इसी गली में उनका दफ्तर भी था, जहां से उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

लोकल मीडिया में वहीद के पड़ोसी दुकानदारों के हवाले से ये कहा जा रहा है कि मजलूमीन एक मेहनती शख्स थे और वे अपनी अक्ल और हुनर के बल पर इस मकाम तक पहुंचे और उनपर लगे इल्जाम झूठे थे।

ईरान की अर्थव्यवस्था

इसी तरह तेहरान के सबजा मैदान बाजार में भी कुछ लोगों का कहना था कि कुछ साल पहले जब मजलूमीन को बंदी बनाया गया था तो रिहा होने के बाद उन्होंने विदेशी विनिमय का बिजनेस छोड़ दिया था। उन्होंने खुद को केवल सोने के कारोबार तक समेट लिया था।

वहीद मजलूमीन की कुछ साल पहले की गिरफ्तारी की बात से इन लोगों का आशय उस घटना से था जब अतीत में उन्हें ईरान की अर्थव्यवस्था ख्ासकर विदेशी मुद्रा के कारोबार में दखल डालने के आरोप में लगभग 6 महीने के लिए जेल की सजा हुई थी।

ईरान के न्याय विभाग का कहना है कि वहीद मजलूमीन और उनके बेटे मोहम्मद रजा की गिरफ्तारी अदालती आदेश के तहत हुई थी। लेकिन ईरान का केंद्रीय बैंक न्याय विभाग से सहमत नहीं लगता। उसकी राय में इन लोगों की गतिविधियां संदेह रहित और सद्भावपूर्ण थीं।

गिरफ्तारी के वक्त केंद्रीय बैंक की तरफ से ये बयान आया कि "हमने इन डॉलरों को उन्हीं लोगों के हवाले कर दिया है।" आखिरकार अदालत ने वहीद मजलूमीन और उनके बेटे को दोष मुक्त करते हुए ये फैसला दिया था कि इन लोगों ने कोई पाप नहीं किया है।

 

पिछली गिरफ्तारी के वक्त

तेहरान पुलिस की तरफ से पैरवी कर रहे सरकारी वकील मुरतजा तौरक के अनुसार वहीद मजलूमीन को अक्तूबर 2012 में ईरान के सूचना मंत्रालय के अधिकारियों ने मरीवान के सीमा पर उस समय गिरफतार किया था जब वे गैरकानूनी तौर पर देश से बाहर फरार करने वाले थे।

पर ये सारी बातें पिछली गिरफ्तारी और उसके बाद हुई रिहाई से जुड़ी हैं। इरना समाचार एजेंसी ने हाल ही में एक वीडियो फुटेज जारी करते हुए कहा था कि कुछ दिनों पहले 'सिक्कों के इस सुल्तान' की रिहाई के लिए महमूद बहमनी नाम के एक शख्स ने दखल देने की कोशिश की थी।

महमूद बहमनी ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के कार्यकाल में ईरान के केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष के पद पर थे। साल 1992 में विदेशी मुद्रा एवं विनिमय बाजार जो उछाल आया था, उसका इलजाम भी वहीद मजलूमीन पर लगाया गया था।

ईरान के बाजार में सक्रिय कुछ लोगों का कहना है कि नजलूमीन बाजार के दूसरे खिलाड़ीयों के आगे इसलिए रहते थे क्योंकि उनकी पहुंच निर्णय लेने वाली संस्थाओं तक थी और किसी निर्णय की घोषणा से पहले ही उनको इसकी ख्बर मिल जाती थी।

मौत की सजा का समर्थन

मजलूमीन पर ईरान की अर्थव्यवस्था में दखल देने और भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप था। पिछले कुछ महीनों में विदेशी मुद्रा और सोने की कीमतों में बहुत तेजी आई है। अमरीकी डॉलर की कीमत 19,000 तूमान से भी ऊपर चली गई थी और सोने के सिक्के की कीमत 50 लाख तूमान तक पहुँच गई थी। बाद में ये कीमतें सरकार के हस्तक्षेप से थोड़ी नीचे आईं।

बढ़ती कीमतों के मद्देनजर ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख्मेनई ने आर्थिक अपराध के अभियुक्तों के मामले को सामान्य प्रावधान से हटकर अलग से जाँच और कार्रवाई करने का आदेश दिया।

न्याय विभाग के प्रवक्ता ने ये बयान दिया था कि वहीद मजलूमीन की मौत की सजा के आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय ने पुनर्विचार के बाद उसकी पुष्टि की थी। सरकार का ये दावा है कि मजलूमीन और उनके सहयोगियों का टर्न ओवर 14 हजार करोड़ तूमान से अधिक पहुंच गया था।

करेंसी की तस्करी
इस साल की शुरुआत में जब केंद्रीय बैंक ने ऐसे लोगों की एक सूची तैयार की जो सिक्के और विदेशी विनिमय बाजार में व्यवधान पैदा करते थे तो इन नामों में वहीद मजलूमीन का नाम स्पष्ट था। इसके बाद मजलूमीन के बेटे (मोहम्मद रजा) को न्यायपालिका के आदेश पर बंदी बनाया गया।

न्यायपालिका का कहना है कि "मजलूमीन के बेटे एक संगठित विनिमय तस्करों के नेटवर्क का सदस्य थे और वे अपने पिता के निर्देश पर थोक विनिमय की तस्करी करते थे।"

अदालत में पहली सुनवाई के दौरान मजलूमीन ने कहा था कि "साल 2013 के बाद अगर किसी ने मेरे पास एक डॉलर बेचा है या किसी से मैंने एक डॉलर खरीदा है तो उसकी रसीद मुझे दिखाई जाए। मैं ये मान जाऊंगा। मैं रोजाना कम से कम 500 सोने की अशर्फियां एक बिलयन तूमान कीमत की खरीदता हूं और इसी तरह हफ्ते भर में बाजार में सात बिलियन तूमान की कीमत की खरीद-फरोख्त हो जाती है।"

इसी साल अप्रैल में सरकार ने डॉलर और तूमान के विनिमय दर पर आधिकारिक नीति की घोषणा की थी। इसके तहत एक डॉलर के बराबर 4,200 तूमान तय किया गया और ईरान सरकार ने केंद्रीय बैंक की तयशुदा कीमत के अतिरिक्त बाकी तमाम कीमतों को अवैध ठहराया।

इन हालात में मुद्रा एवं विनिमय बाजार में पहुंच कठिन हो गई तो ऐसी स्थिति में सोने के सिक्कों की खरीद में बहुत मुनाफा रहा।
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