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Iran Kamikaze Drone: ईरान की ड्रोन बनाने की क्षमता से भौंचक क्यों हैं पश्चिमी जानकार?

Tue, 08 Nov 2022 06:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 08 Nov 2022 06:39 PM IST
सार

Iran Kamikaze Drone: रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन टेक्नोलॉजी का गुजरे दशकों के दौरान तेजी से विकास हुआ है। ड्रोन का सबसे पहले इस्तेमाल इस्राइल ने 1973 में अरब देशों के साथ अपने युद्ध के दौरान जासूसी के लिए किया था। ऐसे ड्रोन बनाने में महारत इस्राइली इंजीनियरों ने अमेरिका जाकर हासिल की थी...

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Iran Kamikaze Drone: Western experts stunned by Iran ability to build drones
Iran Kamikaze Drone - फोटो : Agency

विस्तार

यूक्रेन युद्ध में रूस ने जिस पैमाने पर ईरान में बने ड्रोन का इस्तेमाल किया है, उसे रक्षा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा गया है। ईरान के ड्रोन्स काफी असरदार साबित हुए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक पहले समझा जाता था कि ऐसे मारक हथियार बनाने की क्षमता सिर्फ विकसित देशों के पास है। लेकिन ईरान के ऐसी क्षमता हासिल कर लेने से अब बिल्कुल नई परिस्थिति सामने आ गई है।

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अमेरिका ने हाल में इस बात जोरदार कूटनीतिक प्रचार किया कि रूस ने ईरान में बने ड्रोन हासिल किए हैं और युद्ध में वह उनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि रूस और ईरान ने ऐसी खबरों का खंडन किया है, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि रूस ने ईरानी ड्रोन बीते अगस्त में हासिल किए।

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रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन टेक्नोलॉजी का गुजरे दशकों के दौरान तेजी से विकास हुआ है। ड्रोन का सबसे पहले इस्तेमाल इस्राइल ने 1973 में अरब देशों के साथ अपने युद्ध के दौरान जासूसी के लिए किया था। ऐसे ड्रोन बनाने में महारत इस्राइली इंजीनियरों ने अमेरिका जाकर हासिल की थी। उसके बाद ड्रोन्स का बड़ी संख्या में इस्तेमाल अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक युद्धों में किया।

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इस सिलसिले में ईरान ने 2011 में पहली बार ध्यान खींचा, जब उसने अमेरिका के एक आरक्यू-170 ड्रोन को मार गिराया। 2018 में आरक्यू-170 से मिलते-जुलते ईरान के एक ड्रोन को इस्राइल ने सीरिया के ऊपर मार गिराया था। मगर तब तक किसी को अंदाजा नहीं था कि ईरान वैसे उन्नत ड्रोन बना लेगा, जिनकी मार हाल में यूक्रेन में देखने को मिली है। समझा जाता है कि रूस ने ईरान के शाहेद सीरिज के ड्रोन हासिल किए हैं। ये ड्रोन छोटी मिसाइलों को ले जाने में भी सक्षम हैं। उधर अमेरिका ने भी यूक्रेन को मारक ड्रोन उपलब्ध कराए हैं।

मगर आम चर्चा सबसे ज्यादा इसी सवाल पर है कि ईरान ने ऐसे उन्नत ड्रोन बनाने में सफलता कैसे पा ली? कुछ विशेषज्ञों ने इसके आधार पर अनुमान लगाया है कि दूसरे अस्त्र निर्माण में भी ईरान के पास उससे अधिक क्षमता हो सकती है, जितना अब तक माना जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ईरानी ड्रोंस से यूक्रेन को कितनी क्षति होगी, यह तीन बातों पर निर्भर करेगा। इनमें एक यह है कि आखिर ईरान कब तक रूस को ड्रोन सप्लाई करने में सक्षम बना रहता है। ईरान के इस्राइल और सऊदी अरब से खराब संबंध हैं। इसे देखते हुए वह अपने लिए पर्याप्त ड्रोन रखने के बाद ही रूस को इनकी आपूर्ति करेगा। दूसरा सवाल यह है कि रूस ईरानी ड्रोंस से हमला करने में अपनी क्षमता किस हद तक बनाए रखेगा। तीसरा पहलू यह है कि यूक्रेन किस हद तक ड्रोंस को मार गिराने की अपनी क्षमता विकसित कर पाता है।

पश्चिमी विशेषज्ञों की ईरानी ड्रोंस पर नजर इसलिए भी है, क्योंकि चीन के साथ अमेरिका का तनाव बढ़ रहा है। समझा जाता है कि चीन के पास भी उन्नत ड्रोन हैं, जिनका इस्तेमाल वह ताइवान से युद्ध होने की स्थिति में कर सकता है।

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