IAEA के साथ लुका-छिपी: ईरान की नहीं बची परमाणु डील में 'दिलचस्पी', हो रही देरी से उठे सवाल
पश्चिमी पर्यवेक्षकों का कहना है कि ईरान दबाव बनाने की नीति पर चल रहा है। पिछले दिनों वह इस एजेंसी के निरीक्षणों को अपने देश में आने देने पर राजी हो गया था। लेकिन बाद में उसने इस राह में कई रुकावटें डाल दीं। इस हालात के कारण पश्चिमी राजनयिक हलकों में ये आशंका गहरा गई है कि 2015 में हुए परमाणु डील को फिर से जिंदा करना लगातार ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है...
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ईरान परमाणु डील में अमेरिका की वापसी के लिए यहां चल रही वार्ता में निराशाजनक स्थिति बन गई है। पश्चिमी मीडिया का आरोप है कि ईरान के नए कट्टरपंथी प्रशासन के रुख से ऐसा हुआ है। इन रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान लगातार वार्ता की मेज पर लौटने की इच्छा जता रहा है। लेकिन उसकी गतिविधियां उसके बयानों के उलट हैं।
पश्चिमी पर्यवेक्षकों का कहना है कि ईरान दबाव बनाने की नीति पर चल रहा है। वह संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ भी लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। पिछले दिनों वह इस एजेंसी के निरीक्षणों को अपने देश में आने देने पर राजी हो गया था। लेकिन बाद में उसने इस राह में कई रुकावटें डाल दीं। इस हालात के कारण पश्चिमी राजनयिक हलकों में ये आशंका गहरा गई है कि 2015 में हुए परमाणु डील को फिर से जिंदा करना लगातार ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।
जब ये डील हुई, तब अमेरिका में बराक ओबामा राष्ट्रपति थे। उनके प्रशासन की पहल पर ही ही ये करार हुआ था, जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। लेकिन ओबामा के बाद राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया। जो बाइडन ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद इसमें फिर से अमेरिका को शामिल करने के लिए ईरान से बातचीत शुरू की। लेकिन उसमें ज्यादा प्रगति नहीं हो सकी है। पिछले जून से बातचीत ठहरी हुई है।
इस बीच खबर है कि ईरान अपनी परमाणु क्षमता में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है। कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईरान की क्षमता उस हद तक पहुंचने वाली है, जिसके बाद वह बहुत कम समय की तैयारी में परमाणु हथियार बनाने में सक्षम हो जाएगा। एक वरिष्ठ राजनयिक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘बेशक ईरान समय काट रहा है। इस बीच वह अधिक राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के मकसद से अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाता रहेगा। ज्यादा संभावना इसी बात की है कि ईरान तभी बातचीत की मेज पर लौटेगा, जब पश्चिमी देश उसे कुछ रियायतें दें।’
एक अन्य राजयनिक ने इस वेबसाइट से कहा कि ईरान अब संभवतया अमेरिका को कमजोर समझ रहा है। यह अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अफगानिस्तान में जो हालात बने, उसका नतीजा है। उस राजनयिक ने कहा कि अगर ईरान में ऐसी धारणा है, तो बातचीत में उसका और सख्त रुख देखने को मिलेगा।
अब स्वतंत्र विश्लेषकों को भी उम्मीद नहीं है कि ईरान परमाणु डील जल्द फिर से लागू हो पाएगी। थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप के विश्लेषक हेनरी रोम ने कहा है कि अब ये संभावना नहीं है कि ऐसा इस साल हो पाएगा। इस डील में ईरान की कितनी दिलचस्पी बची है, इसको लेकर अनिश्चय बढ़ रहा है। उससे इस डील में देर होने की आशंका भी बढ़ रही है।
आईएईए ने पिछले रविवार को एक गोपनीय रिपोर्ट अपने सदस्य देशों को भेजी थी। वेबसाइट पॉलिटिको का कहना है कि उस रिपोर्ट की कॉपी उसे हाथ लगी है। उसके मुताबिक आईएईई ने कहा है कि ईरान ने हाल में कराज परमाणु स्थल पर उसके निरीक्षकों को नहीं जाने दिया। यह हाल में ईरान के साथ आईएईए के हुए समझौते का उल्लंघन है।