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Iran: क्या जंग के मुहाने पर ईरान? विदेश मंत्री ने अमेरिका-इस्राइल को दी खुली चेतावनी, कहा- देंगे करारा जवाब
Mon, 12 Jan 2026 11:35 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 12 Jan 2026 11:35 PM IST
सार
ईरान ने अमेरिका और इस्राइल को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी सशस्त्र सेनाएं हर हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। देश में जारी हिंसा के लिए ईरान ने विदेशी साजिश को जिम्मेदार ठहराया है। आइए जानते हैं विदेशी साजिश का आरोप क्यों लगा रहा ईरान?
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इस्माइल बघाई
- फोटो : X-@IRIMFA_EN
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विस्तार
ईरान में जारी व्यापक अशांति और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच तेहरान ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा है कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई को नाकाम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि देश की सेना को जनता का पूरा समर्थन हासिल है और हर पल सैन्य तैयारियों को और मजबूत किया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब देते हुए बगाई ने कहा कि ईरान हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र ने बार-बार साबित किया है कि वह अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा पूरे साहस और ताकत से करता है। उनके मुताबिक, अगर किसी ने ईरान पर हमला करने की कोशिश की, तो सशस्त्र बल पहले की तरह इस बार भी मुंहतोड़ जवाब देंगे।
ये भी पढ़ें- कौन है अरिहा शाह?: जिसका मुद्दा PM मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने उठाया; पूरे मामले पर क्या बोला विदेश मंत्रालय
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विदेशी साजिश का आरोप क्यों लगा रहा ईरान?
ईरान का आरोप है कि हालिया हिंसा और अव्यवस्था के पीछे विदेशी दखल है। बगाई ने दावा किया कि शुरू में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन बाद में अमेरिका और इस्राइल के अधिकारियों के हस्तक्षेप वाले बयानों के बाद हालात बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि गर्म और ठंडे हथियारों के इस्तेमाल के साथ देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश की गई। ईरान का दावा है कि वह इस विदेशी साजिश से जुड़े दस्तावेज जल्द सामने रखेगा।
ईरान में अभी कैसे हैं हालात?
ये भी पढ़ें- अमेरिका में अपराध में शामिल लोगों पर कार्रवाई, अब तक एक लाख से ज्यादा वीजा रद्द; भारतीयों की बढ़ी चिंता
अमेरिका, इस्राइल और यूरोप की प्रतिक्रिया क्या है?
मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने साइबर हमलों से लेकर सीधे सैन्य कार्रवाई तक की संभावना का जिक्र किया, हालांकि किसी अंतिम फैसले से इनकार किया। इस्राइल ने भी ईरान की स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है। वहीं, यूरोपीय संसद की अध्यक्ष मेटसोला ने ईरानी राजनयिकों के संसद परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने का ऐलान किया।
ईरान के भीतर सरकार का जवाब क्या है?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने नागरिकों से ‘राष्ट्रीय प्रतिरोध मार्च’ में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक समस्याओं और जनता की शिकायतों को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा, दंगों और आतंकी तत्वों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी मीडिया ने हजारों लोगों की मौजूदगी वाली रैलियों के दृश्य दिखाए, जिनमें झंडे लहराते और सरकार के समर्थन में नारे लगाते लोग नजर आए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इस्राइल पर देश के भीतर आतंकी युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दुश्मनों ने गलत आकलन किया है। बीते साल जून में इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु और अन्य ठिकानों पर हमलों के बाद से क्षेत्रीय तनाव पहले ही बढ़ा हुआ है। मौजूदा हालात में जरा-सी चूक पूरे पश्चिम एशिया को बड़े टकराव की ओर धकेल सकती है।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब देते हुए बगाई ने कहा कि ईरान हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र ने बार-बार साबित किया है कि वह अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा पूरे साहस और ताकत से करता है। उनके मुताबिक, अगर किसी ने ईरान पर हमला करने की कोशिश की, तो सशस्त्र बल पहले की तरह इस बार भी मुंहतोड़ जवाब देंगे।
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विदेशी साजिश का आरोप क्यों लगा रहा ईरान?
ईरान का आरोप है कि हालिया हिंसा और अव्यवस्था के पीछे विदेशी दखल है। बगाई ने दावा किया कि शुरू में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए, लेकिन बाद में अमेरिका और इस्राइल के अधिकारियों के हस्तक्षेप वाले बयानों के बाद हालात बिगड़ गए। उन्होंने कहा कि गर्म और ठंडे हथियारों के इस्तेमाल के साथ देश को अराजकता की ओर धकेलने की कोशिश की गई। ईरान का दावा है कि वह इस विदेशी साजिश से जुड़े दस्तावेज जल्द सामने रखेगा।
ईरान में अभी कैसे हैं हालात?
- तेहरान, मशहद और कई बड़े शहरों में विरोध और जवाबी रैलियां जारी हैं।
- सरकारी आंकड़ों से इतर मानवाधिकार एजेंसियों ने 544 मौतों का दावा किया है।
- 10681 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
- सरकारी समर्थक रैलियों में अमेरिका मुर्दाबाद और इस्राइल मुर्दाबाद के नारे लगे।
- इंटरनेट और संचार सेवाओं में रुकावट से हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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अमेरिका, इस्राइल और यूरोप की प्रतिक्रिया क्या है?
मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ईरान को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने साइबर हमलों से लेकर सीधे सैन्य कार्रवाई तक की संभावना का जिक्र किया, हालांकि किसी अंतिम फैसले से इनकार किया। इस्राइल ने भी ईरान की स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है। वहीं, यूरोपीय संसद की अध्यक्ष मेटसोला ने ईरानी राजनयिकों के संसद परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने का ऐलान किया।
ईरान के भीतर सरकार का जवाब क्या है?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने नागरिकों से ‘राष्ट्रीय प्रतिरोध मार्च’ में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक समस्याओं और जनता की शिकायतों को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन हिंसा, दंगों और आतंकी तत्वों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी मीडिया ने हजारों लोगों की मौजूदगी वाली रैलियों के दृश्य दिखाए, जिनमें झंडे लहराते और सरकार के समर्थन में नारे लगाते लोग नजर आए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इस्राइल पर देश के भीतर आतंकी युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दुश्मनों ने गलत आकलन किया है। बीते साल जून में इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु और अन्य ठिकानों पर हमलों के बाद से क्षेत्रीय तनाव पहले ही बढ़ा हुआ है। मौजूदा हालात में जरा-सी चूक पूरे पश्चिम एशिया को बड़े टकराव की ओर धकेल सकती है।
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