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यूक्रेन संकट सुलझाने के लिए भारत की पहल: रूस ने जताया नई दिल्ली का आभार, पेस्कोव बोले- विचारों का स्वागत है
Wed, 07 Oct 2026 05:57 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, मॉस्को
पीटीआई, मॉस्को
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 07 Oct 2026 05:57 PM IST
सार
रूस ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान में योगदान देने की भारत की तैयारी का स्वागत किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को भारत की पहल और उसके विचारों के लिए आभारी है। यह बयान यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने भारत के प्रस्ताव को कीव को मिले चार प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया था।
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क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
रूस ने यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने में योगदान देने की भारत की तैयारी का स्वागत किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रमुख सहयोगियों में शामिल क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बुधवार को कहा कि रूस इस रुख और भारत की ओर से दिए जा रहे विचारों के लिए आभारी है। पेस्कोव से मीडिया में आई उन खबरों के बारे में सवाल पूछा गया था, जिनमें कहा गया था कि भारत ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए तीन हिस्सों वाला नया प्रस्ताव भेजा है।
सरकारी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, पेस्कोव ने कहा, "भारत यूक्रेन के आसपास की स्थिति को सुलझाने में व्यावहारिक योगदान देने की अपनी तैयारी जाहिर कर रहा है और हम अपने भारतीय मित्रों की इस तैयारी और उनके द्वारा पेश किए जा रहे विचारों के लिए आभारी हैं।" पेस्कोव का यह बयान यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा के उस बयान के कुछ दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने रूस के साथ संभावित युद्धविराम को लेकर भारत के प्रस्ताव को कीव को मिले चार प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया था।
यूक्रेन ने भी किया भारत के प्रस्ताव का जिक्र
सिबिहा ने शुक्रवार को कीव में पत्रकारों से कहा था, "हमारे पास चार प्रस्ताव हैं। इनमें सबसे व्यापक प्रस्ताव भारत का है। हम ऊर्जा के मद्देनजर और काला सागर में युद्धविराम के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल इस संयोजन में।" भारत के अलावा तुर्किये, मिस्र और अमेरिका की ओर से भी संभावित युद्धविराम के प्रस्ताव दिए गए हैं।
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सिबिहा के अनुसार, यूक्रेन ऐसा युद्धविराम चाहता है जिसमें केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और बंदरगाह ढांचे पर हमले तथा काला सागर की स्थिति भी शामिल हो। इस बीच रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है। युद्ध के कारण हजारों नागरिकों की मौत हुई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
पुतिन भी कर चुके हैं पीएम मोदी के प्रयासों की तारीफ
पिछले सप्ताह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूक्रेन संघर्ष के समाधान से जुड़े विचारों की सराहना की थी। वाल्दाई अंतरराष्ट्रीय चर्चा क्लब की वार्षिक बैठक में पुतिन ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने का मुद्दा लगातार उठाते हैं और हर मुलाकात में इस विषय में गहरी रुचि दिखाते हैं।
तास के अनुसार, पुतिन ने कहा था कि मोदी "पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के उद्देश्य से बहुत अच्छे विचार" पेश करते हैं। पिछले महीने नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन और मोदी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन संघर्ष और शांति के लिए चल रही पहलों की जानकारी दी थी।
यूक्रेन किन शर्तों पर करना चाहता है रूस के साथ समझौता?
इससे पहले पिछले महीने पेस्कोव ने कहा था कि रूस यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के लिए भारत के शांति प्रयासों का स्वागत करेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि संवाद और कूटनीति पर भारत के जोर के साथ रूस का रुख मेल खाता है। भारत के प्रस्ताव पर चर्चा ऐसे समय हो रही है जब यूक्रेन में रूसी हमले तेज हुए हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने कहा है कि उनका देश युद्धविराम के अलग-अलग प्रारूपों पर विचार के लिए तैयार है, लेकिन इसमें ऊर्जा ढांचे, बंदरगाहों और काला सागर से जुड़े हमलों को भी शामिल किया जाना चाहिए। यूक्रेन लगातार अग्रिम मोर्चे पर बिना शर्त युद्धविराम की मांग करता रहा है। वहीं, मॉस्को ने ऐसे युद्धविराम को स्वीकार नहीं किया है और उसका कहना है कि इसके बजाय व्यापक शांति समझौता किया जाना चाहिए।
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सरकारी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, पेस्कोव ने कहा, "भारत यूक्रेन के आसपास की स्थिति को सुलझाने में व्यावहारिक योगदान देने की अपनी तैयारी जाहिर कर रहा है और हम अपने भारतीय मित्रों की इस तैयारी और उनके द्वारा पेश किए जा रहे विचारों के लिए आभारी हैं।" पेस्कोव का यह बयान यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा के उस बयान के कुछ दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने रूस के साथ संभावित युद्धविराम को लेकर भारत के प्रस्ताव को कीव को मिले चार प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया था।
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यूक्रेन ने भी किया भारत के प्रस्ताव का जिक्र
सिबिहा ने शुक्रवार को कीव में पत्रकारों से कहा था, "हमारे पास चार प्रस्ताव हैं। इनमें सबसे व्यापक प्रस्ताव भारत का है। हम ऊर्जा के मद्देनजर और काला सागर में युद्धविराम के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल इस संयोजन में।" भारत के अलावा तुर्किये, मिस्र और अमेरिका की ओर से भी संभावित युद्धविराम के प्रस्ताव दिए गए हैं।
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सिबिहा के अनुसार, यूक्रेन ऐसा युद्धविराम चाहता है जिसमें केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ऊर्जा और बंदरगाह ढांचे पर हमले तथा काला सागर की स्थिति भी शामिल हो। इस बीच रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है। युद्ध के कारण हजारों नागरिकों की मौत हुई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
पुतिन भी कर चुके हैं पीएम मोदी के प्रयासों की तारीफ
पिछले सप्ताह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूक्रेन संघर्ष के समाधान से जुड़े विचारों की सराहना की थी। वाल्दाई अंतरराष्ट्रीय चर्चा क्लब की वार्षिक बैठक में पुतिन ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने का मुद्दा लगातार उठाते हैं और हर मुलाकात में इस विषय में गहरी रुचि दिखाते हैं।
तास के अनुसार, पुतिन ने कहा था कि मोदी "पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के उद्देश्य से बहुत अच्छे विचार" पेश करते हैं। पिछले महीने नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन और मोदी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को यूक्रेन संघर्ष और शांति के लिए चल रही पहलों की जानकारी दी थी।
यूक्रेन किन शर्तों पर करना चाहता है रूस के साथ समझौता?
इससे पहले पिछले महीने पेस्कोव ने कहा था कि रूस यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने के लिए भारत के शांति प्रयासों का स्वागत करेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि संवाद और कूटनीति पर भारत के जोर के साथ रूस का रुख मेल खाता है। भारत के प्रस्ताव पर चर्चा ऐसे समय हो रही है जब यूक्रेन में रूसी हमले तेज हुए हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने कहा है कि उनका देश युद्धविराम के अलग-अलग प्रारूपों पर विचार के लिए तैयार है, लेकिन इसमें ऊर्जा ढांचे, बंदरगाहों और काला सागर से जुड़े हमलों को भी शामिल किया जाना चाहिए। यूक्रेन लगातार अग्रिम मोर्चे पर बिना शर्त युद्धविराम की मांग करता रहा है। वहीं, मॉस्को ने ऐसे युद्धविराम को स्वीकार नहीं किया है और उसका कहना है कि इसके बजाय व्यापक शांति समझौता किया जाना चाहिए।