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ईरान में 165 बच्चियों की मौत का दोषी कौन?: ट्रंप के दावे पर जांच समूह ने उठाए सवाल, वीडियो जारी कर US को घेरा
Mon, 09 Mar 2026 06:33 PM IST
Nirmal Kant
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरूशलम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरूशलम
Published by: Nirmal Kant
Updated Mon, 09 Mar 2026 06:33 PM IST
सार
जांचकर्ताओं के समूह बेलींगकैट ने हाल ही में जारी वीडियो से संकेत दिया है कि ईरानी स्कूल पर 28 फरवरी को जो हमला हुआ था, वह अमेरिका की टोमहॉक मिसाइल से किया गया था। विशेषज्ञों और उपग्रह की तस्वीरों के अनुसार यह हमला आईआरजीसी बेस के पास तेज बमबारी के बीच हुआ।
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अमेरिका ईरान में जंग
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
जांचकर्ताओं के समूह बेलींगकैट ने कहा कि हाल ही में जारी किया गया एक वीडियो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के विपरीत प्रतीत हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्कूल में हुए हमले के लिए ईरान जिम्मेदार है। पश्चिम एशिया में नए संघर्ष की शुरुआत के दौरान एक ईरानी स्कूल पर हमले में 165 से ज्यादा लोग मारे गए थे। वीडियो में दिखाए गए हमले से संकेत मिलता है कि वास्तव में यह घटना अमेरिकी की कार्रवाई हो सकती है, न कि ईरान की।
यह हमला रिवॉल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) के बेस के पास स्थित स्कूल में हुआ था। विशेषज्ञों ने उपग्रह तस्वीरों और वीडियो के आधार पर कहा कि तेज बमबारी के बीच स्कूल पर यह हमला हुआ था। इससे पता चलता है कि यह युद्ध की रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा था।
वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
क्या यह हमला अमेरिका ने किया?
बॉल ने बताया कि जिस गोले से स्कूल पर हमला हुआ, वह टोमहॉक क्रूज मिसाइल थी। यह मिसाइल केवल अमेरिका के पास है। इसका मतलब है कि हमला अमेरिका ने किया होगा। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने भी माना कि उसने इस युद्ध में टोमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। 28 फरवरी को स्कूल के पास ही स्थित अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप यूएसएस अब्राहम लिंकन के जहाज यूएसएस स्प्रूंस से टोमहॉक मिसाइल दागते हुए फोटो भी जारी किया गया था।
ये भी पढ़ें: 'किल एंड डंप' नीति का शिकार बलूच: मानवाधिकार संगठन का आरोप- पाकिस्तानी सेना ने सात निर्दोष लोगों का किया कत्ल
घटना का सही आंकलन क्यों मुश्किल है?
इस घटना का सही आंकलन करना कठिन है, क्योंकि विस्फोट से बचे बम के टुकड़ों की कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं है और युद्ध के दौरान कोई स्वतंत्र एजेंसी साइट पर जांच के लिए नहीं पहुंची। शनिवार को जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि क्या अमेरिका इस विस्फोट के लिए जिम्मेदार था, जिसमें ज्यादातर बच्चे मारे गए, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना कोई सबूत दिए कहा, मेरी राय में जो मैंने देखा, वह ईरान ने किया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की मिसाइलें सटीक निशाना लगाने वाली नहीं है। इसके बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस मामले की जांच कर रहा है।
क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून की विशेषज्ञ जेनिना डिल ने एक्स पर लिखा कि यदि यह हमला गलती से हुआ, यानी हमलावर को लगा कि वह स्कूल बल्कि पास के आईआरजीसी के बेस का हिस्सा है- तब भी यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि हमलावरों की जिम्मेदारी होती है कि वे यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करें कि उनका निशाना सही है, ताकि निर्दोष नागरिक सुरक्षित रहें।
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यह हमला रिवॉल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) के बेस के पास स्थित स्कूल में हुआ था। विशेषज्ञों ने उपग्रह तस्वीरों और वीडियो के आधार पर कहा कि तेज बमबारी के बीच स्कूल पर यह हमला हुआ था। इससे पता चलता है कि यह युद्ध की रणनीतिक कार्रवाई का हिस्सा था।
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वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
- बेलींगकैट ने तीन सेकंड का वीडियो साझा किया है। यह वीडियो उसी दिन का जब स्कूल पर हमला हुआ था। इसे रविवार को ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने प्रसारित किया।
- वीडियो में दिखाया गया है कि एक गोला एक इमारत पर गिर रहा है और काले धुएं का गुबार उठ रहा है, जो संभवत: पहले हुए हमलों से उठजे धुएं के साथ मिल रहा है।
- बेलींगकैट के शोधकर्ता ट्रेवर बॉल ने वीडियो की लोकेशन स्कूल के पास के क्षेत्र में तय की, जिसकी एसोसिएटेड प्रेस ने भी पुष्टि की।
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New video footage shows a US Tomahawk missile hitting an IRGC facility in Minab, Iran, on Feb 28, showing for the first time that the US struck the area. The footage also shows smoke already rising from the vicinity of the girls’ school, where 175 people were reportedly killed. pic.twitter.com/4jBXrNcRJO
— Trevor Ball (@Easybakeovensz) March 8, 2026
क्या यह हमला अमेरिका ने किया?
बॉल ने बताया कि जिस गोले से स्कूल पर हमला हुआ, वह टोमहॉक क्रूज मिसाइल थी। यह मिसाइल केवल अमेरिका के पास है। इसका मतलब है कि हमला अमेरिका ने किया होगा। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने भी माना कि उसने इस युद्ध में टोमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। 28 फरवरी को स्कूल के पास ही स्थित अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप यूएसएस अब्राहम लिंकन के जहाज यूएसएस स्प्रूंस से टोमहॉक मिसाइल दागते हुए फोटो भी जारी किया गया था।
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घटना का सही आंकलन क्यों मुश्किल है?
इस घटना का सही आंकलन करना कठिन है, क्योंकि विस्फोट से बचे बम के टुकड़ों की कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं है और युद्ध के दौरान कोई स्वतंत्र एजेंसी साइट पर जांच के लिए नहीं पहुंची। शनिवार को जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि क्या अमेरिका इस विस्फोट के लिए जिम्मेदार था, जिसमें ज्यादातर बच्चे मारे गए, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिना कोई सबूत दिए कहा, मेरी राय में जो मैंने देखा, वह ईरान ने किया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की मिसाइलें सटीक निशाना लगाने वाली नहीं है। इसके बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस मामले की जांच कर रहा है।
क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून की विशेषज्ञ जेनिना डिल ने एक्स पर लिखा कि यदि यह हमला गलती से हुआ, यानी हमलावर को लगा कि वह स्कूल बल्कि पास के आईआरजीसी के बेस का हिस्सा है- तब भी यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि हमलावरों की जिम्मेदारी होती है कि वे यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करें कि उनका निशाना सही है, ताकि निर्दोष नागरिक सुरक्षित रहें।