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गहरा आर्थिक संकट: आखिर पाकिस्तान ने क्यों मानी आईएमएफ की इतनी ‘अपमानजनक’ शर्तें?

Thu, 25 Nov 2021 05:36 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Nov 2021 05:36 PM IST
सार

आईएमएफ ने यह शर्त भी रखी थी कि एसबीपी के निदेशक मंडल की नियुक्ति पाकिस्तान सरकार अपनी इच्छा के मुताबिक नहीं कर पाएगी। लेकिन बाद में जब पाकिस्तान सरकार ने शर्तों में रियायत की गुजारिश की, तब यह शर्त हटा ली गई। लेकिन बाकी किसी शर्त को हटाने से आईएमएफ ने साफ इनकार कर दिया...

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international monetary fund gives funds to state bank of pakistan with strict conditions to Imran Khan government
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से पाकिस्तान को मिली हालिया राहत अल्पकालिक साबित हो सकती है। इसकी वजह यह है कि आईएमएफ ने पाकिस्तान के आगे और कर्ज ले सकने का रास्ता बंद कर दिया है। आईएमएफ ने पाकिस्तान की ये अर्जी ठुकरा दी है कि देश के केंद्रीय बैंक के फिर कर्ज लेने की गुंजाइश वह बनाए रखे। अब सामने आए तथ्यों के मुताबिक आईएमएफ ने बेहद कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान को सहायता दी है। इस सहायता की वजह से स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) को आईएमएफ की कड़ी निगरानी में काम करना होगा। जो शर्त पाकिस्तान ने मंजूर की है, उसमें यह भी शामिल है कि एसबीपी अपने पूरे मुनाफे को अब पाकिस्तान सरकार को ट्रांसफर नहीं कर सकेगा।

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सरकार के पास नहीं हैं संसाधन

पर्यवेक्षकों का कहना है कि बेहद गहरे आर्थिक संकट की वजह से पाकिस्तान ने इतनी सख्त शर्तों को मंजूर किया। इसके बाद अपनी लाचारी का इजहार करते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि देश पर बढ़ रहा विदेशी कर्ज और देश के अंदर छोटा टैक्स आधार ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ से जुड़े मसले बन गए हैँ। सरकार के पास आज जन कल्याण पर खर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।

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आईएमएफ ने यह शर्त भी रखी थी कि एसबीपी के निदेशक मंडल की नियुक्ति पाकिस्तान सरकार अपनी इच्छा के मुताबिक नहीं कर पाएगी। लेकिन बाद में जब पाकिस्तान सरकार ने शर्तों में रियायत की गुजारिश की, तब यह शर्त हटा ली गई। लेकिन बाकी किसी शर्त को हटाने से आईएमएफ ने साफ इनकार कर दिया। बाद में इमरान खान ने कहा कि देश के अंदर ‘टैक्स चुकाने का कल्चर’ नहीं है और यही पाकिस्तान की सबसे बड़ी मुश्किल है।
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जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार देश के अंदर हर साल टैक्स राजस्व को आठ खरब डॉलर तक ले जाना चाहती है। लेकिन इसमें उसे सफलता नहीं मिली है। अब उसने टैक्स कलेक्शन में टेक्नोलॉजी के ज्यादा इस्तेमाल का फैसला किया है। लेकिन इससे कितना फायदा होगा, यह अभी साफ नहीं है।

केवल 30 लाख प्रत्यक्ष करदाता

पाकिस्तान कैसे संकट में है, इसका अंदाजा फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के एक कार्यक्रम में लगा। ये कार्यक्रम टैक्स वसूली के सिस्टम को दुरुस्त करने के मकसद से आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम में दिए अपने भाषण में इमरान ने कहा- ‘हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे पास देश चलाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। इसलिए हमें कर्ज लेना पड़ा है।’

पाकिस्तान सरकार के वित्तीय सलाहकार शौकत तरीन ने इस मौके पर बताया कि देश में सिर्फ 30 लाख प्रत्यक्ष करदाता हैं। जबकि देश में कम से कम ऐसे डेढ़ करोड़ लोग हैं, जो प्रत्यक्ष कर देने के योग्य हैं। अब सरकार की कोशिश इन तमाम लोगों को टैक्स दायरे में लाने की है।



जानकारों के मुताबिक सरकार का इरादा किस हद तक पूरा होगा, यह अनिश्चित है। फिलहाल, सूरत यह है कि उसे बेहद अपमानजनक शर्तों पर आईएमएफ से कर्ज लेना पड़ा है। आईएमएफ ने जो शर्तें थोपीं, उनमें यह भी शामिल है कि एसबीपी में सरकार के प्रतिनिधि यानी संघीय वित्त सचिव को वहां मतदान का अधिकार नहीं होगा। जबकि एसबीपी में 96 फीसदी शेयरहोल्डिंग सरकार की ही है।

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