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अमेरिका में बजा भारत का डंका: हडसन नदी पर INS सुदर्शिनी ने फहराया तिरंगा, नेवल रिव्यू में दिखा नौसेना का शौर्य

Sun, 05 Jul 2026 08:05 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, न्यूयॉर्क।
एएनआई, न्यूयॉर्क। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 05 Jul 2026 08:05 AM IST
सार

भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी ने अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत न्यूयॉर्क में आयोजित भव्य 'परेड ऑफ सेल' में हिस्सा लिया। 'लोकायन 2026' अभियान के तहत 13,000 नॉटिकल मील की दूरी तय कर पहुंचे इस स्वदेशी जहाज ने हडसन नदी पर तिरंगा लहराकर भारत की समुद्री ताकत और कूटनीति का लोहा मनवाया।
 

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ins sudarshini represents india at us international naval review 250 sail4th new york
आईएनएस सुदर्शिनी - फोटो : @ANI/ अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका में देश का मान बढ़ाया है। अमेरिका अपने 250वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है। इस मौके पर न्यूयॉर्क में 'यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250' और 'सेल250' का आयोजन हुआ। हडसन नदी पर आयोजित भव्य 'परेड ऑफ सेल' में भारतीय नौसेना के इस जहाज ने भी हिस्सा लिया। तीन मस्तूलों वाले इस शानदार जहाज पर शान से तिरंगा लहरा रहा था। यह नजारा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। 
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हडसन नदी पर ऐतिहासिक परेड
अमेरिका में भारतीय दूतावास ने इस गौरवपूर्ण क्षण को सोशल मीडिया पर साझा किया। दूतावास ने बताया कि आईएनएस सुदर्शिनी ने चार जुलाई को न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के पोर्ट पर प्रवेश किया। इस विशाल जहाज ने परेड ऑफ सेल में खास ध्यान खींचा। पूरी दुनिया के नौसैनिक जहाजों के बीच भारतीय जहाज की चमक अलग ही थी। यह भागीदारी भारत और अमेरिका के मजबूत होते नौसैनिक रिश्तों को बयां करती है। यह जहाज अंतरराष्ट्रीय मंच पर आपसी सहयोग और दोस्ती का संदेश दे रहा है।
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10 महीने लंबा लोकायन अभियान की खास बातें क्या? 
आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा बेहद खास और ऐतिहासिक है। यह जहाज इस समय 'लोकायन 2026' अभियान पर निकला हुआ है। यह महासागरों को पार करने वाला एक लंबा ट्रांस-ओशनिक अभियान है।
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13,000 मील का सफर: यह अभियान कोच्चि से शुरू हुआ था। पिछले पांच महीनों में यह जहाज 13,000 नॉटिकल मील से अधिक की दूरी नाप चुका है।

वसुधैव कुटुंबकम की भावना: इस अभियान का मकसद दुनिया भर की नौसेनाओं के बीच आपसी विश्वास बढ़ाना है। भारत हमेशा से 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया एक परिवार है के सिद्धांत पर चलता है। यह यात्रा इसी भावना को समर्पित है।

पिछले अहम पड़ाव: न्यूयॉर्क आने से पहले यह जहाज मैरीलैंड के बाल्टीमोर पोर्ट पर पहुंचा था। वहां इसका शानदार स्वागत हुआ। बाल्टीमोर आने के लिए जहाज ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर नहर से गुजरा था। इस दौरान उसने मिड-अटलांटिक के कई बड़े पुलों को पार किया था।


यह भी पढ़ें: 'थर्ड वर्ल्ड कंट्री बन रहा यूरोप': ट्रंप ने आप्रवासन नीति पर उठाए सवाल, क्या अमेरिका का भी होगा यही हाल?

वैश्विक कूटनीति का अहम हिस्सा
बाल्टीमोर से पहले इस जहाज ने वर्जीनिया के नॉरफॉक में हिस्सा लिया था। वहां 19 से 23 जून तक 'सेल250 वर्जीनिया' समारोह आयोजित हुआ था। उस समय भी सुदर्शिनी ने दुनिया भर के जहाजों के साथ परेड ऑफ सेल और सिटी क्रू परेड में दम दिखाया था। आईएनएस सुदर्शिनी मूल रूप से भारतीय नौसेना का एक सेल ट्रेनिंग शिप यानी नौकायन प्रशिक्षण पोत है। इसका मुख्य काम नौसैनिकों को पारंपरिक नौकायन की बारीकियां सिखाना है। इसके साथ ही यह जहाज समुद्री कूटनीति का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। अमेरिका के इस देशव्यापी जश्न में अब यह जहाज आगे बोस्टन और न्यू ऑरलियन्स जैसे बंदरगाहों का रुख करेगा।
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