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'थर्ड वर्ल्ड कंट्री बन रहा यूरोप': ट्रंप ने आप्रवासन नीति पर उठाए सवाल, क्या अमेरिका का भी होगा यही हाल?

Sun, 05 Jul 2026 07:27 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, वाशिंगटन।
एएनआई, वाशिंगटन। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 05 Jul 2026 07:27 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप और अमेरिका की आव्रजन नीतियों पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। क्या वाकई बाहरी लोगों के आने से विकसित देश 'थर्ड वर्ल्ड कंट्री'  यानी तीसरी दुनिया के देश में बदल सकते हैं? H-1B वीजा और नागरिकता कानूनों पर ट्रंप ने क्या-क्या कहा? जानिए...
 

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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

क्या यूरोप की आप्रवासन नीतियां उसे बर्बादी की ओर ले जा रही हैं? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो कुछ ऐसा ही दावा किया है। शनिवार को ट्रंप ने यूरोप की इमिग्रेशन पॉलिसी की कड़ी आलोचना की। ट्रंप का मानना है कि विकासशील देशों से आने वाले अपराधियों को पनाह देने का परिणाम आज पूरा यूरोप भुगत रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका में उनका चुनाव बिल्कुल सही समय पर हुआ है।
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क्या लिखा ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी एक पोस्ट में उन्होंने हमला बोला। ट्रंप ने लिखा, 'यूरोप अब सीख रहा है कि जब आप तीसरी दुनिया (थर्ड वर्ल्ड) के अपराधियों को अंदर लेते हैं, तो आप खुद एक 'थर्ड वर्ल्ड कंट्री' बन जाते हैं। यह बहुत तेज़ी से होता है, पलक झपकते ही। मैं बिल्कुल सही समय पर चुना गया।'
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क्या अमेरिका के लिए भी है यही चेतावनी?
क्या अमेरिका भी इसी खतरे का सामना कर रहा है? ट्रंप की मानें तो हां। कुछ दिन पहले भी उन्होंने ठीक यही चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि 'थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज़' यानी तीसरी दुनिया के देश से होने वाला बड़े पैमाने का आप्रवासन अमेरिका के भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है। इस हफ्ते की शुरुआत में उन्होंने पोस्ट किया था कि यदि आप बाहरी देशों से लोगों को लाते हैं, तो आप भी जल्द ही वैसा ही देश बन जाएंगे, और फिर आप कुछ नहीं कर सकते। उनका लोकप्रिय 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' का नारा इसी सोच को दर्शाता है।

यह भी पढ़ें: ईरान: गाजा-लेबनान में इस्राइल की कार्रवाई पर भड़के पेजेशकियन, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को घेरा: क्या आरोप लगाए?

H-1B वीजा और नागरिकता पर क्या है ट्रंप का रुख?
आठ जून को ट्रंप ने संघीय जजों की भी कड़ी आलोचना की थी। दरअसल, एक अदालत ने उनके प्रशासन की ओर से  H-1B वीजा पर लगाए गए 100,000 अमेरिकी डॉलर के शुल्क को खारिज कर दिया था। ट्रंप ने इन अदालती फैसलों को 'पागलपन' करार दिया। आखिर H-1B वीजा का ढांचा क्या है? यह अमेरिकी अतिथि-कार्यकर्ता मॉडल की अहम नींव है। सरकार हर साल 65,000 मानक परमिट की सीमा तय करती है। इसके अलावा 20,000 स्लॉट खास तौर पर उन उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं, जिन्होंने अमेरिकी संस्थानों से उच्च डिग्री हासिल की है।
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