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दुनिया भर में स्वतंत्र पत्रकारिता की पहल: सरकारी शिकंजे से प्रेस को आजाद करने की मुहिम हुई शुरू, बनाया विशेष फंड

Fri, 01 Oct 2021 03:40 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 01 Oct 2021 03:40 PM IST
सार

शुरुआत में इस फंड में दस करोड़ डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस धन से निम्न और मध्य आय वर्ग वाले देशों में स्वतंत्र मीडिया संस्थान खड़ा करने की कोशिश की जाएगी। संस्थापकों ने उम्मीद जताई है कि 2022 में ऐसे पहले संस्थान अस्तित्व में आ जाएंगे...

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Initiative of independent journalism around the world, Campaign started to free press from government
स्वतंत्र पत्रकारिता - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दुनिया के दो बड़े मीडिया घरानों का नेतृत्व कर चुकी एक जानी-मानी शख्सियत ने अब एक स्वतंत्र वैश्विक मीडिया कायम करने की पहल की है। इस पहल को लेकर मीडिया के हलकों में गहरी दिलचस्पी देखी जा रही है। खबर है कि अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के पूर्व सीईओ और ब्रिटेन की मशहूर प्रसारण संस्था- बीबीसी के पूर्व महानिदेशक मार्क थॉम्पसन ने फिलीपीन की पत्रकार मारिया रेसा के साथ मिल कर ये पहल शुरू की है। मारिया रेसा की पहचान प्रेस स्वतंत्रता के लिए अभियान चलाने वाली कार्यकर्ता की भी रही हैं।

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बताया जाता है कि इस पहल के तहत दुनिया भर में स्वतंत्र मीडिया संस्थान खड़े किए जाएंगे। उनमें दुनिया भर के पत्रकारों का सहयोग लिया जाएगा। बताया जाता है कि दुनिया भर में प्रेस की आजादी पर कस रहे शिकंजे को देखते हुए ये पहल शुरू की गई है। ऐसी शिकायत है कि खासकर कोविड-19 महामारी आने के बाद से दुनिया भर में सरकारों की तरफ से प्रेस पर नियंत्रण कसने की कोशिशें तेज हो गई हैं। खासकर ऐसा उन देशों में हुआ है, जहां लोकतंत्र नहीं है, या लोकतंत्र कमजोर अवस्था में है।
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एक रिपोर्ट में बताया गया है कि थॉम्पसन ने न्यूयॉर्क टाइम्स का सीईओ रहते हुए प्रेस के खिलाफ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जुबानी हमलों का मुकाबला करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उधर रेसा पर फिलीपीन्स में उनके पत्रकारीय काम के लिए साइबर कानून के तहत कई मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। 2018 में मशहूर अमेरिकी पत्रिका टाइम ने उन्हें पर्सन ऑफ द ईयर के खिताब से सम्मानित किया था। आरोप है कि रेसा पर उनके देश में तमाम मुकदमे फिलपीन्स सरकार की आलोचना करने के कारण दर्ज कराए गए हैं।
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ताजा खबर के मुताबिक थॉम्पसन और रेसा इस नई पहल के बनाए गए बोर्ड (संचालन मंडल) के सह-अध्यक्ष होंगे। इस पहल को इंटरनेशनल फंड फॉर पब्लिक इंटरेस्ट मीडिया का नाम दिया गया है। ये फंड एक अक्तूबर से अस्तित्व में आ गया है। इस फंड का प्रबंधन शीतल व्यास को दिया गया है, जिन्हें इस पहल का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है। शीतल व्यास की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय विकास रणनीतिकार के रूप में रही है।

शुरुआत में इस फंड में दस करोड़ डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस धन से निम्न और मध्य आय वर्ग वाले देशों में स्वतंत्र मीडिया संस्थान खड़ा करने की कोशिश की जाएगी। संस्थापकों ने उम्मीद जताई है कि 2022 में ऐसे पहले संस्थान अस्तित्व में आ जाएंगे।

बताया जाता है कि कई परोपकारी संगठनों और व्यक्तियों ने फंड के लिए चंदा देने का वादा किया है। उनमें अमेरिका सरकार से जुड़ी एजेंसी नेशनल एडॉवमेंट फॉर डेमोक्रेसी भी है। संस्थापकों ने कहा है कि वे इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए कई देशों की सरकारों, बड़ी टेक कंपनियों, कॉरपोरेट सेक्टर, विकास के लिए अनुदान देने वाली एजेंसियों और परोपकारी संगठनों से संपर्क करेंगे।

थॉम्पसन ने कहा है कि स्वतंत्र मीडिया द्वारा निर्भय पत्रकारिता लोकतंत्र का एक अनिवार्य स्तंभ है। रेसा ने कहा है- अगर आप लोगों को लोगों को झूठ पर यकीन करने के लिए तैयार कर लें, तो आप उन पर पूरा नियंत्रण कायम कर सकते हैं। रेसा ने कहा कि अभी दुनिया में ऐसा ही हो रहा है।

लेकिन कई आलोचकों ने सवाल उठाया है कि अगर अमेरिकी सरकार से जुड़ी एजेंसी, अन्य देशों की सरकारें और कॉरपोरेट सेक्टर भी इस नई पहल का हिस्सा बनेंगे, तो मौजूदा और इस नए मीडिया में क्या वास्तविक फर्क रह जाएगा।

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